असम के करबी आंगलॉन्ग में सु-30 MKI क्रैश में शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थे। पिता रविंद्र ने बताया कि हादसे से एक दिन पहले बात हुई थी।
4 साल की सेवा, सपनों का पूरा होना: नागपुर के पायलट पुरवेश की शहादत ने देश को झकझोरा
असम में सु-30 MKI क्रैश: पुरवेश दुरगकर की शहादत, ऑपरेशन सिंदूर का हीरो
असम के करबी आंगलॉन्ग जिले में गुरुवार को भारतीय वायुसेना के एक सु-30 MKI फाइटर जेट के क्रैश होने की घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। इस हादसे में फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर (28) और स्क्वाड्रन लीडर अनुज शहीद हो गए। जोरहाट एयरबेस से ट्रेनिंग सॉर्टी पर निकले विमान का संपर्क शाम 7:42 बजे टूट गया और क्रैश साइट बेस से करीब 60 किलोमीटर दूर मिली। पुरवेश दुरगकर नागपुर के रहने वाले थे और उनकी शहादत ने परिवार, दोस्तों और वायुसेना को गहरा सदमा दिया। पिता रविंद्र दुरगकर ने बताया कि बेटा अपनी सेवा पर बेहद गर्व करता था।
ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा: पाहलगाम हमले के बाद की कार्रवाई
पुरवेश दुरगकर का नाम पिछले साल मई में शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा हुआ था। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के पाहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें द रेसिस्टेंस फ्रंट (लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी) ने हमला किया था। 7 मई को शुरू हुए इस ऑपरेशन में भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान और PoK में कई आतंकी कैंपों को निशाना बनाया और 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। पाकिस्तान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिन्हें भारत ने रोका। बाद में भारतीय हवाई हमलों के बाद 10 मई को युद्धविराम हुआ। पुरवेश ऑपरेशन में शामिल थे, लेकिन परिवार को बाद में पता चला।
पिता से आखिरी बातचीत: हादसे से एक दिन पहले हुई
रविंद्र दुरगकर ने PTI को बताया कि पुरवेश से आखिरी बार हादसे से एक दिन पहले बात हुई थी। उन्होंने कहा कि बेटा फाइटर जेट उड़ाने और उसकी स्पीड का अनुभव साझा करता था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पुरवेश के पास फोन नहीं था, इसलिए 15 दिनों बाद परिवार को पता चला कि वह शामिल था। पिता ने कहा कि बेटा देश सेवा पर गर्व करता था, लेकिन सिर्फ 4 साल की सेवा में शहीद हो गया। पुरवेश अविवाहित थे, माता-पिता और अमेरिका में रहने वाली बहन को बचा छोड़ गए।
जोरहाट से सॉर्टी: क्या हुआ विमान क्रैश में?
पुरवेश और अनुज जोरहाट एयरबेस से शाम को ट्रेनिंग सॉर्टी पर निकले थे। पुरवेश मूल रूप से तेजपुर एयरबेस पर तैनात थे, लेकिन रनवे काम के चलते जोरहाट से उड़ान भर रहे थे। संपर्क टूटने के 60 किलोमीटर दूर क्रैश साइट मिली, जहां दोनों पायलट शहीद हो चुके थे। IAF ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। पुरवेश ने नागपुर में स्कूली शिक्षा पूरी की थी।
परिवार का दर्द: सपनों का पूरा होना, लेकिन अधूरा सफर
पिता रविंद्र ने कहा कि पुरवेश को IAF जॉइन करने का सपना था, जो पूरा हो गया, लेकिन देश सेवा कम ही कर पाया। उन्होंने कहा कि बेटे का बलिदान प्रेरणा देगा। पुरवेश 10 दिन पहले नागपुर में फैमिली गेट-टुगेदर के लिए आए थे। पड़ोसी ने बताया कि वह सहयोगी अधिकारियों का सम्मान करता था।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था: पाहलगाम हमले का जवाब
पाहलगाम हमले के बाद 7 मई को शुरू ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने PoK और पाक में कैंप ध्वस्त किए। पाक ने जवाबी हमले किए, भारत ने इंटरसेप्ट किया। 10 मई को युद्धविराम। पुरवेश इसमें शामिल थे।
शहादत पर देश श्रद्धांजलि: IAF का गौरव
IAF ने दोनों पायलटों को सलाम किया। पुरवेश का छोटा सफर देशभक्ति का प्रतीक बन गया। परिवार ने कहा कि बेटे का सपना पूरा हुआ।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: सु-30 MKI क्रैश कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: असम के करबी आंगलॉन्ग में गुरुवार को जोरहाट एयरबेस से सॉर्टी पर निकले विमान का क्रैश हुआ। - प्रश्न: पुरवेश दुरगकर कौन थे?
उत्तर: 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट, नागपुर के रहने वाले, तेजपुर एयरबेस पर तैनात, ऑपरेशन सिंदूर में शामिल। - प्रश्न: ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
उत्तर: पाहलगाम हमले के जवाब में 7 मई 2025 को शुरू, PoK में कैंप नष्ट किए। - प्रश्न: पिता ने क्या बताया?
उत्तर: हादसे से एक दिन पहले बात हुई, पुरवेश सेवा पर गर्व करता था। - प्रश्न: पुरवेश का परिवार?
उत्तर: माता-पिता नागपुर में, बहन अमेरिका में, अविवाहित।
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