असम स्पेशल रिवीजन के बाद फाइनल वोटर लिस्ट में 0.97% गिरावट, लेकिन मुस्लिम बहुल जिलों जैसे बारपेटा, मोरीगांव में बढ़ोतरी। विपक्ष ने वोट चोरी का आरोप लगाया।
असम चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में खेल? बारपेटा जैसे जिलों में 3.3% बढ़ोतरी का रहस्य
असम मतदाता सूची में क्या हुआ बदलाव?
असम में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर ने 10 फरवरी 2026 को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की। कुल मतदाताओं की संख्या 2.52 करोड़ से घटकर 2.49 करोड़ हो गई, यानी 0.97 प्रतिशत की कमी। इसमें 2.43 लाख नाम कटे। पुरुष मतदाता 1.25 करोड़ से घटकर 1.24 करोड़, महिला 1.26 करोड़ से 1.24 करोड़ और थर्ड जेंडर 379 से 343 रह गए। ये लिस्ट 2026 विधानसभा चुनाव के लिए बनी है। असम के 35 जिलों में सिर्फ 10 में बढ़ोतरी हुई।
मुस्लिम बहुल जिलों में क्यों बढ़े वोटर?
सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि बढ़ोतरी वाले 10 जिलों में से 8 मुस्लिम बहुल हैं। बरपेटा में 3.3 प्रतिशत की सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई, उसके बाद मोरीगांव 0.7 प्रतिशत और बोंगाईगांव 0.6 प्रतिशत। गोलपारा, धुबरी, नागांव, हैलाकांडी, बाजाली, माजुली और साउथ सलमारा भी इस लिस्ट में हैं। 2011 सेंसस के मुताबिक ये जिले मुस्लिम बहुल थे। बरपेटा में तो 28,625 नए वोटर जुड़े। स्रीभूमि (करिमगंज) में 3.2 प्रतिशत और धुबरी में 2.8 प्रतिशत गिरावट आई।
स्पेशल रिवीजन प्रक्रिया कैसे चली?
ये SIR नवंबर 2025 से शुरू हुई। ड्राफ्ट लिस्ट 27 दिसंबर को आई, क्लेम्स और आपत्तियों का समय 22 जनवरी तक चला। असम को पैन-इंडिया SIR के दूसरे फेज से बाहर रखा गया क्योंकि यहाँ पहले से स्ट्रिक्ट NRC लागू है। चुनाव आयोग ने कहा कि ये रिवीजन डुप्लिकेट, मृत और शिफ्टेड नाम हटाने के लिए था। लेकिन विपक्ष ने इसे वोट चोरी का हथियार बताया। असम में 126 विधानसभा सीटों पर ये लिस्ट लागू होगी। कुल मिलाकर राज्य स्तर पर गिरावट आई लेकिन कुछ जिलों में स्थिरता दिखी।
विपक्ष के आरोप: वोट चोरी का खेल?
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने जनवरी में ही BJP पर हमला बोला। उन्होंने दिसपुर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की, आरोप लगाया कि BJP अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने वर्कर्स को निर्देश दिया कि विपक्ष समर्थक वोटरों के नाम कटवाओ। MLA अखिल गोगोई ने कहा कि मंत्री अशोक सिंघल को ज़िम्मेदारी दी गई। विपक्ष बोला कि खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के असली वोटरों को परेशान किया जा रहा। BJP CM हिमंता बिस्वा सरमा ने खारिज किया, कहा ये ट्रांसपेरेंट प्रोसेस है। FIR में ज़ूम मीटिंग का वीडियो सबूत के तौर पर मांगा गया।
NRC का बैकग्राउंड और असर क्यों?
असम में 2019 NRC ने 19 लाख लोगों को बाहर किया, जो विवादों में रहा। SIR को इससे जोड़कर देखा जा रहा। चुनाव आयोग ने असम को दूसरे फेज SIR से छोड़ा क्योंकि NRC पहले से सख्त है। लेकिन विपक्ष का दावा है कि SR के बहाने नाम काटे गए। मुस्लिम बहुल जिलों में बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठे कि क्या नए नाम जोड़े गए। ट्राइबल और अपर असम जिलों में गिरावट आई, जैसे स्रीभूमि में 31,000 नाम कम। ये ट्रेंड चुनावी रणनीति पर बहस छेड़ रहा। कुल 32 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़ोतरी हुई।
जिलों में ट्रेंड्स का विश्लेषण
लोअर असम के मुस्लिम जिलों धुबरी, साउथ सलमारा, गोलपारा, बरपेटा में नेट गेन। सेंट्रल असम के मोरीगांव, नागांव में भी बढ़े लेकिन दर्रांग, होजई में गिरे। अपर असम और ट्राइबल इलाकों में ज़्यादा कटौती। बरपेटा सबसे बड़ा गेनर जहां 25,000 से ज़्यादा जुड़े। साउथ सलमारा में मामूली 200 की बढ़ोतरी। ये आंकड़े CEO की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि ये जनसांख्यिकीय बदलाव दिखाता है। लेकिन डेटा की सत्यता पर सवाल बाकी।
राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं?
2026 चुनाव से पहले ये लिस्ट BJP के लिए फायदेमंद लग रही क्योंकि अपर असम में हिंदू-ट्राइबल वोटर कम हुए। विपक्ष चेतावनी दे रहा कि ये लोकतंत्र पर हमला। कांग्रेस बोली कि अल्पसंख्यकों को टारगेट किया गया लेकिन आंकड़े उलट दिख रहे। BJP का दावा है कि डुप्लिकेट नाम हटे, असली वोटर बचे। हिमंता सरकार SR को सफ़ल बताकर क्रेडिट ले रही। लेकिन कोर्ट में चुनौतियाँ आ सकती हैं। असम की राजनीति हमेशा NRC, CAA पर गरम रहती है।
क्या आगे कोई बदलाव संभव?
फाइनल लिस्ट में अब बदलाव मुश्किल लेकिन आपत्ति का समय था। विपक्ष FIR के ज़रिए दबाव बनाएगा। चुनाव आयोग ने कहा प्रोसेस पारदर्शी था। असम के 35 जिलों में ये वैरिएशन सामान्य माना जा रहा। लेकिन मुस्लिम जिलों की बढ़ोतरी विपक्ष को हथियार देगी। कुल 2.49 करोड़ वोटर 126 सीटों पर फैले। ये चुनाव असम की जनसांख्यिकी पर बहस छेड़ेगा। सरकार को जवाब देना पड़ेगा कि कटौती कैसे हुई।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: असम फाइनल वोटर लिस्ट में कुल कितनी कमी आई?
उत्तर: ड्राफ्ट 2.52 करोड़ से घटकर 2.49 करोड़ मतदाता रह गए, यानी 0.97 प्रतिशत या 2.43 लाख नाम कटे। - प्रश्न: कौन से जिले सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वाले रहे?
उत्तर: बरपेटा (3.3%), मोरीगांव (0.7%), बोंगाईगांव (0.6%); इनमें से ज्यादातर मुस्लिम बहुल। - प्रश्न: विपक्ष ने क्या आरोप लगाए SR पर?
उत्तर: वोट चोरी, BJP ने अल्पसंख्यक वोटरों के नाम कटवाए; FIR दर्ज की गई दिलीप सैकिया के खिलाफ। - प्रश्न: असम को पैन-इंडिया SIR दूसरे फेज से क्यों बाहर रखा?
उत्तर: क्योंकि यहाँ पहले से स्ट्रिक्ट NRC लागू है, इसलिए अलग स्पेशल रिवीजन किया गया। - प्रश्न: कुल कितने जिले बढ़ोतरी वाले रहे?
उत्तर: 35 में से 10 जिलों में वोटर बढ़े, जिनमें 8 मुस्लिम बहुल जैसे धुबरी, नागांव आदि।
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