बिहार सरकार ने शैक्षिक और धार्मिक संस्थानों के पास मांस-मछली की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा – बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति रोकने, स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के लिए।
“स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव और पर्यावरण” के नाम पर नया नियम: बिहार में शैक्षिक-धार्मिक स्थलों के पास नॉन-वेज बैन
बिहार में स्कूल-मंदिर के पास मांस-मछली की बिक्री पर रोक: “बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति रोकने” का दावा
पटना से मिली ताज़ा खबर के अनुसार, बिहार सरकार ने शैक्षिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाली जगहों के पास मांस व मछली की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को पटना में घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सिन्हा ने कहा, “यह नई सरकार का नया कदम है। बिहार का बदलता चेहरा साफ दिख रहा है। हमने अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के अंदर बैठक की। जनकल्याण संवाद में बुद्धिजीवियों से हुई चर्चा को गंभीरता से लिया।”
प्रतिबंध के कारण: स्वास्थ्य से लेकर सामाजिक सद्भाव तक
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह फैसला कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। “स्वास्थ्य के नज़रिए से, सामाजिक मेल‑जोल के लिए और बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति रोकने के लिए शैक्षिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों के पास और भीड़भाड़ वाली ओपन जगहों पर मांस व मछली की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी।”
सिन्हा ने जोर दिया कि सरकार का इरादा किसी के खान‑पान की आदतों को नियंत्रित करना नहीं है। “लोग इससे आगे के नियमों का पालन करें। हमें खान‑पान से कोई समस्या नहीं है, लेकिन सामाजिक मेल‑जोल और शुद्धता के भाव को आहत न करने, किसी की भावनाओं को ठेस न पहुँचने और पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।”
जनकल्याण संवाद और अर्बन डेवलपमेंट विभाग की भूमिका
यह घोषणा अर्बन डेवलपमेंट एंड हाउसिंग डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के एक पत्र के बाद आई है, जिसमें मांस‑मछली की खुली बिक्री पर चिंता जताई गई थी। सिन्हा ने बताया कि जनकल्याण संवाद में बुद्धिजीवियों से हुई चर्चा को आधार बनाकर यह कदम उठाया गया।
| कारण | विवरण |
|---|---|
| स्वास्थ्य | प्रदूषण और अस्वच्छता रोकना |
| सामाजिक सद्भाव | भावनाएँ आहत न हों |
| पर्यावरण | प्रदूषण नियंत्रण |
| बच्चों पर असर | हिंसक प्रवृत्ति रोकना |
लागू करने और प्रवर्तन का इंतज़ार
फिलहाल लागू करने और प्रवर्तन की विस्तृत जानकारी का इंतज़ार है। यह नियम शहरी क्षेत्रों में लागू होगा, जहाँ भीड़भाड़ वाली जगहें, स्कूल, कॉलेज और धार्मिक स्थल हैं।
सियासी बहस की संभावना
यह फैसला राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है। विपक्ष इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव का आरोप लगा सकता है, जबकि सरकार इसे सामाजिक सुधार बताएगी।
5 FAQs
- बिहार सरकार ने मांस-मछली बिक्री पर क्या प्रतिबंध लगाया?
शैक्षिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाली जगहों के पास खुली बिक्री पर रोक। - उपमुख्यमंत्री ने प्रतिबंध का मुख्य कारण क्या बताया?
बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति रोकना, स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण। - यह फैसला कब और कैसे आया?
जनकल्याण संवाद में बुद्धिजीवियों की चर्चा और अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की बैठक के बाद। - सरकार का खान-पान पर स्टैंड क्या है?
कोई नियंत्रण नहीं, बस शुद्धता, भावनाएँ और प्रदूषण रोकने के लिए। - लागू करने की डिटेल्स कब आएंगी?
अभी इंतज़ार, प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पत्र के बाद।
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