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हीरो राजन कुमार को मिला दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान।

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भागलपुर (बिहार) । भागलपुर के स्थानीय गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र भागलपुर में युग चेतना फाउंडेशन, अंग-जन-गण,अंग मदद फाउंडेशन और अंगिका सभा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को आयोजित दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान समारोह में हीरो राजन कुमार को दानवीर कर्ण राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया।यह सम्मान शहर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. डी.पी. सिंह के द्वारा प्रदान किया गया। यह सम्मान जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष समाजसेवी डॉ.शंभू दयाल खेतान,शहर के जाने-माने चिकित्सक प्रो. डॉ. रतन कुमार मंडल,डॉ. रमेश आत्मविश्वास समेत अन्य प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति में दिया गया।
यह आयोजन विश्व मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित अंग अंगिका साहित्य महोत्सव मातृभाषा के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
दानवीर कर्ण, जो महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक हैं, त्याग, दान और मानवीय मूल्यों के प्रतीक माने जाते हैं। हीरो राजन कुमार कर्ण की भूमिका में कर्ण जीवंत स्वरूप अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया।
उनके नाम पर दिया जाने वाला यह सम्मान साहित्य और समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को समर्पित है।
बिहार के मुंगेर निवासी हीरो राजन कुमार जिन्हें ‘चार्ली चैपलिन-2’ के नाम से जाना जाता है।
उनका चार्ली चैपलिन-द्वितीय लाइव प्रस्तुति की ऊर्जा और प्रत्यक्ष संपर्क दर्शकों के साथ एक गहरा असर डालता है।जब भारतीय अभिनेता हीरो राजन कुमार मंच पर जीते-जागते भावों के साथ चार्ली चैपलिन-द्वितीय का अभिनय करते हैं, तो दर्शक सीधे उनसे जुड़ते हैं। यही रंगमंच की जादुई ताकत है,जो आज भी लोगों को बांधे रखती है। लाइव परफॉरमेंस की वह ऊर्जा, पल-पल का कनेक्शन,सब कुछ दर्शकों को सीधे दिल से जोड़ देता है। हीरो राजन कुमार जब चार्ली चैपलिन-2 बनकर स्टेज पर आते हैं, तो रंगमंच का जादू सच में सबके रोंगटे खड़े कर देता है।
यहीं तो ख़ासियत है रंगमंच की,वह डिजिटल दुनिया से परे एक अलग ही अनुभव देता है।वह एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं,जो अभिनेता, कलाविद, कवि, सामाजिक कार्यकर्ता और किसान भी हैं।
उन्होंने चार्ली चैपलिन के रूप में सबसे ज़्यादा लाइव शो करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 5157 से अधिक सजीव प्रस्तुतियाँ दी हैं।
26 जनवरी 2025 को गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपनी कविता “जय हो” का पाठ किया, जिसे काफी सराहना मिली। वे बिहार फिल्म एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन (BAFTA) ट्रस्ट, मुंगेर, बिहार से जुड़े हैं और उन्होंने गणतंत्र दिवस परेड में अपनी टीम का नेतृत्व भी किया था। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों और टेली – फिल्म्स में काम किया है। जिनमें ‘नमस्ते बिहार’, ‘शहर मसीहा नहीं’, ‘लहरिया कट’ और हाल ही में ‘आखिर’ शामिल हैं। वह अपनी साइलेंट कॉमेडी के लिए भी जाने जाते हैं। इससे पहले उन्हें प्रतिष्ठित आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र राष्ट्रीय सम्मान से भी परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें “डॉ. कलाम यूथ रत्न अवॉर्ड 2025” से सम्मानित किया गया है। वह एक बहुत ही प्रतिभाशाली और प्रसिद्ध कलाकार हैं,जो अपनी कला और सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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