लोकसभा में राहुल गांधी ने हर्दीप पुरी का एप्स्टीन फाइल्स से नाम लिया, तो मंत्री ने कहा – UN राजदूत के समय IPI डेलिगेशन में 3-4 मीटिंग्स हुईं, क्राइम से कोई लेना-देना नहीं।
राहुल ने लोकसभा में पुरी को घेरा, तो मंत्री ने कहा – युबा नेता को समझना चाहिए क्राइम फाइल्स
लोकसभा में राहुल गांधी ने क्या कहा हर्दीप पुरी पर?
11 फरवरी 2026 को लोकसभा में बजट बहस के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बड़े धमाके किए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री हर्दीप सिंह पुरी का नाम जेफरी एप्स्टीन फाइल्स में आया है। एप्स्टीन एक कुख्यात अमेरिकी फाइनेंशियर था, जिस पर सेक्स ट्रैफिकिंग और नाबालिगों के शोषण के गंभीर आरोप थे। राहुल ने इसे उठाकर सरकार पर सवाल ठोके।
राहुल का कहना था कि ये फाइल्स कई बड़े नेताओं, सेलेब्स और पॉलिटिकल फिगर्स को एप्स्टीन से जोड़ती हैं, जैसे डोनाल्ड ट्रंप और बिल क्लिंटन। उन्होंने पुरी को निशाने पर लेते हुए इशारा किया कि ऐसे कनेक्शन सरकार की इमेज खराब करते हैं। ये बयान सदन में हंगामा मचा गया। विपक्ष ने तालियाँ बजाईं, तो सत्ताधारी BJP वाले भड़क गए।
हर्दीप पुरी ने तुरंत क्या जवाब दिया?
लोकसभा स्पीच के तुरंत बाद यूनियन मिनिस्टर हर्दीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने राहुल को “युवा नेता” कहकर तंज कसा और कहा कि एप्स्टीन फाइल्स क्राइम, पैडोफीलिया और सेक्सुअल फैंटसी आइलैंड के बारे में हैं। मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं। पुरी ने साफ कहा कि उन्होंने एप्स्टीन से सिर्फ़ 3-4 बार मिले, वो भी न्यूयॉर्क में UN राजदूत रहते हुए।
पुरी ने बताया कि 2009 से 2017 तक वो भारत के UN में राजदूत थे। रिटायरमेंट के बाद इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के साथ जुड़े। वहाँ ICM प्रोजेक्ट के सेक्रेटरी जनरल बने। IPI डेलिगेशन में सिलिकॉन वैली के लोगों से मिलना पड़ता था, जिसमें एप्स्टीन भी कभी-कभी शामिल होता। लेकिन ये प्रोफेशनल मीटिंग्स थीं, क्राइम से दूर।
एप्स्टीन फाइल्स में पुरी का नाम कैसे आया?
अमेरिकी कोर्ट ने 3 मिलियन ईमेल्स रिलीज़ किए हैं। उनमें पुरी का नाम 2 ईमेल्स में आता है। एक ईमेल रीड हॉफमैन (लिंक्डइन को-फाउंडर) को भेजा था, जिसमें एप्स्टीन को CC किया। पुरी ने लिखा था कि भारत में 500 मिलियन इंटरनेट यूज़र्स होंगे, मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया के मौके हैं। ये 2014 का था, जब वो प्राइवेट सिटीज़न थे।
पुरी ने ईमेल पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि एप्स्टीन ने उन्हें ही “टू-फेस्ड” कहा था एक ईमेल में। इससे साफ है कि कोई दोस्ती नहीं थी। वो एप्स्टीन के प्राइवेट आइलैंड लिटिल सेंट जेम्स कभी नहीं गए। जैसे ही स्कैंडल पता चला, कॉन्टैक्ट कट कर लिया। ये सब पब्लिक डोमेन में है।
राहुल गांधी पर पुरी का तीखा हमला क्यों?
पुरी ने राहुल को “अस” कहा और बोले कि वो इन्यूएंडो पॉलिटिक्स करते हैं। यानी बिना प्रूफ के शक पैदा करना। उन्होंने कहा कि युवा नेता को समझना चाहिए कि फाइल्स क्राइम विक्टिम्स के केस हैं, मेरी मीटिंग्स का इससे कोई कनेक्शन नहीं। BJP ने इसे बेसलेस आरोप बताया।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाते ने भी ईमेल से पुरी पर सवाल उठाए थे। पुरी ने जवाब दिया कि ये फैक्ट्स सब जानते हैं। उन्होंने राहुल को नोट लिखा था पहले ही। अब BJP संसदीय विशेषाधिकार भंग का प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रूफ दिखाओ।
जेफरी एप्स्टीन कौन था, फाइल्स क्या कहती हैं?
जेफरी एप्स्टीन अमीर फाइनेंशियर था। 2019 में सेक्स ट्रैफिकिंग चार्जेस लगे। उसके पास प्राइवेट आइलैंड था, जहाँ अमीर लोग कथित तौर पर नाबालिग लड़कियों के साथ पार्टी करते थे। अगस्त 2019 में गिरफ्तार हुआ, सितंबर में जेल में मरा। फाइल्स में ट्रंप, क्लिंटन जैसे नाम आए, लेकिन ज़्यादातर में नाम आने से अपराध साबित नहीं होता।
पुरी ने साफ किया कि फाइल्स गलत कामों के बारे में हैं। मेरी मीटिंग्स IPI के थ्रू थीं, जो पीस और मल्टीलेटरलिज़म पर काम करता था। एप्स्टीन कभी ICM का मेंबर नहीं था। ये सिर्फ़ नेटवर्किंग थी।
इस विवाद का राजनीतिक मतलब क्या?
ये मामला बजट सेशन के बीच आया, जहाँ राहुल मोदी सरकार पर हमलावर थे। एप्स्टीन फाइल्स का ज़िक्र करके उन्होंने BJP को अंतरराष्ट्रीय स्कैंडल से जोड़ने की कोशिश की। लेकिन पुरी के जवाब ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया। BJP ने इसे डिस्ट्रैक्शन टैक्टिक बताया।
संसद में हंगामा हुआ। स्पीकर ने राहुल को फटकार लगाई। अब विशेषाधिकार प्रस्ताव से मामला और गर्मा सकता है। विपक्ष कह रहा है कि प्रूफ़ हैं, BJP चुप कराना चाहती है। लेकिन पुरी के डिटेल्ड जवाब से बहस में BJP ऊपर दिख रही।
पुरी का बैकग्राउंड और UN करियर
हर्दीप सिंह पुरी IFS अधिकारी रहे। 2009-13 तक UN में भारत के राजदूत। वहाँ IPI से जुड़े। ICM चेयर किए, जो UN रिफॉर्म्स पर काम करता था। 2014 में मोदी सरकार बनी, तो मंत्री बने। पेट्रोलियम, हाउसिंग जैसे मंत्रालय संभाले। कई अवॉर्ड्स मिले।
उनका कहना है कि न्यूयॉर्क में 8 साल रहे, सिलिकॉन वैली वालों से मिलना आम था। एप्स्टीन को उनके कांटैक्ट्स ने इंट्रोड्यूस किया। लेकिन जैसे ही न्यूज़ आई, दूर हो गए। कोई पर्सनल टाई नहीं।
कांग्रेस का पक्ष क्या है?
कांग्रेस ने कहा कि फाइल्स में नाम आना अपने आप में सवाल खड़ा करता है। सुप्रिया श्रीनाते ने ट्वीट किया कि कौन इंट्रोड्यूस किया पुरी को। राहुल ने सदन में इसे बड़ा मुद्दा बनाया। लेकिन प्रूफ़ न दिखाने से BJP हावी हो गई। अब वो कह रहे हैं कि ये डिफैमेशन है।
BJP प्रवक्ता ने कहा कि राहुल हैबिटुअल लायर हैं। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने नोटिस की बात कही। शाम 5 बजे तक जवाब माँगा गया। ये सेशन का हाईलाइट बन गया।
क्या ये विवाद खत्म होगा?
संभवतः नहीं। बजट डिबेट में ये बार-बार उठेगा। पुरी ने सारे फैक्ट्स रख दिए, ईमेल पढ़े। अगर कांग्रेस प्रूफ़ नहीं दिखाएगी तो पीछे हटनी पड़ेगी। ये केस दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्कैंडल्स को घरेलू पॉलिटिक्स में कैसे घसीटा जाता है। लेकिन ट्रांसपेरेंसी अच्छी रही।
आम आदमी सोचे – नाम आना अपराध साबित नहीं करता। लेकिन पॉलिटिशियन पर सवाल ज़ायज़ हैं। पुरी ने क्लियर कर दिया, अब बॉल कांग्रेस के पाले में।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: राहुल गांधी ने लोकसभा में हर्दीप पुरी पर क्या आरोप लगाया?
उत्तर: उन्होंने कहा कि पुरी का नाम एप्स्टीन फाइल्स में है, जो सेक्स ट्रैफिकिंग स्कैंडल से जुड़ी हैं और कई बड़े नामों को लिंक करती हैं। - प्रश्न: हर्दीप पुरी ने एप्स्टीन से कितनी बार मुलाकात की?
उत्तर: सिर्फ़ 3-4 बार, वो भी 2009-17 के दौरान न्यूयॉर्क में UN राजदूत रहते IPI/ICM डेलिगेशन के हिस्से के तौर पर। - प्रश्न: पुरी ने राहुल को क्या जवाब दिया?
उत्तर: युवा नेता को समझना चाहिए कि फाइल्स क्राइम केस हैं, मेरी मीटिंग्स प्रोफेशनल थीं, आइलैंड नहीं गया और कॉन्टैक्ट कट किया स्कैंडल के बाद। - प्रश्न: एप्स्टीन फाइल्स में पुरी का नाम कैसे आया?
उत्तर: 3 मिलियन ईमेल्स में 2 ईमेल्स – एक रीड हॉफमैन को, एप्स्टीन CC में, भारत के बिज़नेस मौक़ों पर। - प्रश्न: BJP क्या एक्शन ले रही?
उत्तर: संसदीय विशेषाधिकार भंग का प्रस्ताव लाने की तैयारी, किरेन रिजिजू ने राहुल को नोटिस दी प्रूफ़ दिखाने को।
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