Home देश EC का SC को चिट्ठी: बंगाल SIR में स्टाफ पर हिंसा का सिस्टमैटिक पैटर्न रोकें!
देश

EC का SC को चिट्ठी: बंगाल SIR में स्टाफ पर हिंसा का सिस्टमैटिक पैटर्न रोकें!

Share
EC Supreme Court Bengal SIR violence, systematic threats poll staff
Share

EC ने SC को बताया – बंगाल SIR में चुनाव अधिकारीयों पर सिस्टमैटिक हिंसा, TMC ममता के बयान उकसा रहे। CEO ऑफिस घेराव, 700 की भीड़, मुरशिदाबाद माइक्रो-ऑब्जर्वर्स अटैक, FIR न होने का आरोप। ममता के SC अपीयरेंस के बाद काउंटर। पूरा विवाद।

140 मौतों का दावा झूठा? EC बोला TMC उकसा रही हिंसा, पुलिस FIR नहीं कर रही

EC का SC को SOS: बंगाल SIR में हमारे स्टाफ पर हिंसा का सिस्टमैटिक पैटर्न रोकें

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। एक तरफ ममता बनर्जी ने खुद पेश होकर कहा कि SIR से 140 मौतें हुईं, लाखों वोटर प्रभावित। दूसरी तरफ चुनाव आयोग (EC) ने एफिडेविट दाखिल कर आरोप लगाया – हमारे चुनाव अधिकारीयों पर सिस्टमैटिक हिंसा और धमकियां हो रही हैं। ममता के भड़काऊ बयान इसका कारण। पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही।

EC ने कहा – बंगाल में SIR स्मूथ नहीं चल रहा, जबकि दूसरे राज्यों में ठीक। यह राज्य मशीनरी की नाकामी और राजनीतिक हस्तक्षेप का नतीजा। SC से तुरंत हस्तक्षेप मांग।

ममता के 4 फरवरी SC अपीयरेंस के ठीक बाद EC का यह काउंटर। आइए पूरा विवाद समझें।

SIR विवाद का बैकग्राउंड: ममता vs EC

EC ने जून–अक्टूबर 2025 में SIR ऑर्डर जारी किए। वोटर लिस्ट क्लीन करने BLO चेक। दस्तावेज़ मांग। TMC ने विरोध किया – नाम कट रहे, मौतें हो रही। ममता ने CEC को लेटर लिखा। 4 फरवरी को CJI सुर्या कांत बेंच में पर्सनली आर्ग्यू। SC ने EC को नोटिस जारी किया।

5 FAQs

प्रश्न 1: EC ने SC को क्या बताया बंगाल SIR पर?
उत्तर: स्टाफ पर सिस्टमैटिक हिंसा–धमकियां। ममता के भड़काऊ बयान, पुलिस FIR न कर रही।

प्रश्न 2: कौन से बड़े इंसिडेंट्स EC ने गिनाए?
उत्तर: 24 नवंबर CEO घेराव, उत्तर दिनाजपुर 700 भीड़ हमला, मुरशिदाबाद 9 माइक्रो हटे।

प्रश्न 3: ममता ने SC में क्या कहा?
उत्तर: SIR से 140 मौतें, माइक्रो बिना अथॉरिटी। SC ने नोटिस जारी।

प्रश्न 4: SC ने क्या निर्देश दिया?
उत्तर: EC जवाब दो, 9 फरवरी हियरिंग। इनोसेंट बचाओ।​

प्रश्न 5: राजनीतिक मतलब?
उत्तर: TMC vs EC–BJP। 2026 चुनाव से लिंक।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

“जॉब छोड़कर गुजारा भत्ता से बचना” अब आम चाल? दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त संदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि कई पढ़े-लिखे पति स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेकर...