राहुल गांधी बोले- डेटा AI का पेट्रोल है, Indo-US ट्रेड डील से भारत के 1.5 अरब लोगों का डेटा विदेश चला जाएगा, PM मोदी ने अमेरिकी चोकहोल्ड में सरेंडर किया।
विदेशी कंपनियों को भारत का डेटा फ्री? राहुल गांधी का PM पर चोकहोल्ड वाला तंज
राहुल गांधी का तीखा हमला: डेटा ही AI का असली ईंधन
लोकसभा में बजट पर बहस के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया AI की होड़ में है, लेकिन AI का पेट्रोल डेटा है। बिना डेटा के AI कुछ नहीं। भारत के 1.4 अरब लोग दुनिया का सबसे बड़ा डेटा पूल बनाते हैं। यह हमारी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन सरकार ने इसे Indo-US ट्रेड डील में दाँव पर लगा दिया। राहुल ने PM मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने अमेरिकी दबाव में भारत का डेटा सरेंडर कर दिया।
ये बयान 11 फरवरी 2026 को X (पूर्व ट्विटर) पर भी शेयर किया। राहुल ने लिखा कि AI क्रांति खतरे और मौके दोनों ला रही है। हमारा IT सेक्टर, जो इकोनॉमी का सितारा है, खतरे में है। हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की नौकरियाँ जा सकती हैं अगर हम तैयार न हुए। लेकिन डेटा पर कंट्रोल रखें तो भारत AI लीडर बन सकता है। सरकार के AI समिट को मौका गँवा दिया गया।
Indo-US ट्रेड डील: डेटा पर क्या हुआ समझौता?
राहुल के मुताबिक इंडो-US इंटरिम ट्रेड डील में डिजिटल ट्रेड के नाम पर भारत ने अपनी आज़ादी खो दी। डेटा लोकलाइजेशन की ज़रूरत खत्म, अमेरिका को फ्री डेटा फ्लो, डिजिटल टैक्स पर लिमिट, सोर्स कोड डिस्क्लोज़ करने की बाध्यता नहीं। विदेशी कंपनियाँ पहले से ही फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब, अमेज़न, एंड्रॉयड से हमारा डेटा कंट्रोल करती हैं। अब ये डील उन्हें और ताकत देगी। भारत के 1.5 अरब लोगों का डेटा सुरक्षित स्टोर करना मुश्किल हो जाएगा।
राहुल ने कहा कि अमेरिका अपनी सुपरपावर स्टेटस बचाने के लिए भारत के डेटा पर नज़र रखे हुए है। चीन का भी डेटा पूल बड़ा है, लेकिन भारत का डेटा ज़्यादा डायनामिक है क्योंकि हम फ्रीडम देते हैं। यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका का डेटा मिलाकर भी चीन से कम्पिट नहीं कर सकता। इसलिए अमेरिका को हमारा डेटा चाहिए। PM ने इसे विदेशी पावर को सौंप दिया। यह शर्मनाक है।
AI क्रांति: भारत के लिए खतरा या मौका?
लोकसभा स्पीच में राहुल ने मार्शल आर्ट्स का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया चोकहोल्ड की जंग में है। एनर्जी, फाइनेंस, अब डेटा को हथियार बनाया जा रहा। भारत को डेटा, फूड सिक्योरिटी, एनर्जी सिस्टम बचाने होंगे। AI से IT इंडस्ट्री चैलेंज होगी। इंफोसिस जैसी कंपनियाँ जो कांग्रेस-यूपीए ने बनाईं, वे मुश्किल में पड़ेंगी। लेकिन डेटा कंट्रोल करें तो नई जॉब्स, इनोवेशन आ सकता है।
राहुल ने चेतावनी दी कि बिना डेटा के AI बेकार है। इंटरनल कॉम्बस्शन इंजन की बात बिना पेट्रोल के न हो। दुनिया AI की बात कर रही, लेकिन डेटा को इग्नोर कर रही। भारत को अपना डेटा पूल पहचानना चाहिए। पॉपुलेशन बोझ नहीं, ताकत है। अगर हम इसे प्रोटेक्ट करें तो ग्लोबल AI फ्यूचर शेप कर सकते हैं।
विदेशी कंपनियों का डेटा मोनोपॉली खत्म कैसे?
राहुल ने आरोप लगाया कि विदेशी टेक जायंट्स हमारा डेटा यूज़ करके प्रॉफिट कमाते हैं, लेकिन टैक्स कम देते। ट्रेड डील से डिजिटल टैक्स लिमिट हो गया। सोर्स कोड ट्रांसपेरेंसी नहीं मिलेगी। भारत को अपना डेटा यूज़ करने के हर स्टेप पर रोका जाएगा। सरकार को डेटा लोकलाइजेशन, टैक्स, एल्गोरिदम ट्रांसपेरेंसी पर सख्ती करनी चाहिए। तभी हम AI में लीडर बनेंगे।
भारत vs चीन: डेटा पूल में कौन आगे?
राहुल ने संसद में साफ कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े डेटा पूल – भारत और चीन। दोनों 1.4 अरब आबादी। लेकिन भारत का डेटा बेहतर क्योंकि हम ज़्यादा फ्रीडम देते हैं। लोग डायनामिक चीज़ें करते हैं। अमेरिका डॉलर बचाने के लिए भारत का डेटा चाहता है। यूरोप-अमेरिका का डेटा कम्पिट नहीं कर सकता। इसलिए ट्रेड डील में दबाव डाला गया। भारत को अपना एसेट बचाना होगा।
IT सेक्टर पर AI का असर: नौकरियाँ जाएँगी?
राहुल ने IT इंडस्ट्री को चेताया। AI से कोडिंग, सॉफ्टवेयर जॉब्स ऑटोमेट हो जाएँगी। भारत का IT सेक्टर जो लाखों लोगों को रोज़गार देता है, चैलेंज्ड होगा। लेकिन ये मौका भी है। अपना डेटा यूज़ करके हम AI टूल्स बना सकते हैं। विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करें। ट्रेनिंग दें, न्यू स्किल्स सिखाएँ। वरना बेरोज़गारी बढ़ेगी।
सरकार का AI समिट: लीडरशिप दिखाने का मौका गँवा दिया
कुछ दिनों में भारत AI समिट होस्ट करने वाला है। राहुल ने कहा ये परफेक्ट मौका था लीडरशिप दिखाने का। 1.4 अरब लोगों का डेटा यूज़ करके ग्लोबल AI फ्यूचर शेप करें। लेकिन ट्रेड डील ने हाथ बाँध दिए। अमेरिकी चोकहोल्ड में फँस गए। अब डेटा पर कंट्रोल खो चुके। समिट सिर्फ़ शो लगेगा। असली लीडरशिप डेटा प्रोटेक्शन से आती।
BJP का जवाब: राहुल के आरोप झूठे
BJP ने राहुल के आरोपों को सिरे से खारिज किया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा ये ब्लैटेंट लाई है। ट्रेड डील से भारत को फायदा होगा। डेटा सॉवरेन्टी पर कोई समझौता नहीं। राहुल पॉलिटिकल गेम खेल रहे। सरकार डेटा प्रोटेक्शन लॉ बना रही। AI पॉलिसी मजबूत है। लेकिन राहुल का फोकस डेटा को नेशनल एसेट बनाने पर सही लगता। बहस जारी रहेगी।
डेटा प्रोटेक्शन: भारत को क्या करना चाहिए?
राहुल की बात सही लगती अगर देखें तो डेटा 21वीं सदी का ऑयल है। भारत को डेटा प्रोटेक्शन लॉ सख्त करना चाहिए। लोकलाइजेशन अनिवार्य करें। विदेशी कंपनियों से टैक्स लें। सोर्स कोड चेक करने का अधिकार रखें। अपना AI इकोसिस्टम बनाएँ। युवाओं को ट्रेन करें। तभी AI में सुपरपावर बनेंगे। ट्रेड डील्स में डेटा क्लॉज़ सावधानी से लिखें।
कुल मिलाकर राहुल का मैसेज साफ है। डेटा बचाओ, AI जीतो। PM पर ऑटोनॉमी का सवाल उठाया। राजनीतिक बहस से ऊपर उठकर पॉलिसी बनानी होगी। भारत का डेटा हमारी ताकत है। इसे गँवाना देश के लिए नुकसान होगा। आने वाले दिनों में ये मुद्दा और गरमाएगा।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: राहुल गांधी ने डेटा को AI का क्या कहा?
उत्तर: राहुल ने कहा कि डेटा AI का पेट्रोल है, बिना डेटा के AI बेकार है, भारत का सबसे बड़ा डेटा पूल हमारी ताकत है। - प्रश्न: Indo-US ट्रेड डील से क्या नुकसान बताया?
उत्तर: डेटा लोकलाइजेशन खत्म, फ्री फ्लो अमेरिका को, डिजिटल टैक्स लिमिट, सोर्स कोड ट्रांसपेरेंसी न मिलना। - प्रश्न: राहुल ने PM मोदी पर क्या आरोप लगाया?
उत्तर: अमेरिकी चोकहोल्ड में सरेंडर कर भारत का डेटा विदेशी पावर को सौंप दिया। - प्रश्न: भारत का डेटा पूल चीन से कैसे बेहतर?
उत्तर: भारत की आबादी ज़्यादा डायनामिक, फ्रीडम ज़्यादा, इसलिए डेटा क्वालिटी बेहतर। - प्रश्न: IT सेक्टर पर AI का क्या असर होगा?
उत्तर: सॉफ्टवेयर जॉब्स चैलेंज होंगी, लेकिन डेटा कंट्रोल से नए मौके बनेंगे।
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