Home देश इंदौर में ज़हरीले पानी से 15 मौतें: CM मोहन यादव की कड़ी कार्रवाई, अफसरों की कुर्सी गई!
देशमध्य प्रदेश

इंदौर में ज़हरीले पानी से 15 मौतें: CM मोहन यादव की कड़ी कार्रवाई, अफसरों की कुर्सी गई!

Share
Pipeline Leak to 15 Deaths: Indore’s ‘Life-Threatening’ Water System Exposed by Lab Tests
Share

इंदौर में दूषित पेयजल से 15 लोगों की मौत और 2,000 से ज्यादा बीमार होने के बाद CM मोहन यादव ने निगम के शीर्ष अधिकारियों को हटाने के निर्देश दिए। लैब रिपोर्ट ने शहर की पानी सप्लाई को “जानलेवा” बताया, पाइपलाइन लीकेज को मुख्य कारण माना गया।

नल में ज़हर, नलों पर राजनीति: इंदौर वाटर कंटैमिनेशन ट्रैजेडी के बाद MP सरकार की सख्त कार्रवाई

इंदौर का ज़हरीला पानी कांड: 15 मौतें, 2,000 से ज्यादा बीमार, अब सरकार की सख्त कार्रवाई

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी की सप्लाई ने तीन दिनों में कम से कम 15 लोगों की जान ले ली और 2,000 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त (वॉमिटिंग–डायरिया) की चपेट में आ गए। लैब जांच में साफ हुआ कि पेयजल में खतरनाक स्तर की संदूषित चीजें मिलीं, जिसके बाद रिपोर्ट ने इंदौर की पानी सप्लाई व्यवस्था को “life-threatening” यानी जानलेवा करार दिया।

घटना के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ी कार्रवाई करते हुए इंदौर नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर को तत्काल हटाने और वाटर डिस्ट्रीब्यूशन वर्क्स विभाग के इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर से जिम्मेदारी वापस लेने के निर्देश दिए। उन्होंने यह घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की।

क्या हुआ इंदौर में? – घटना की शुरुआत और बीमारी का फैलाव

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक इलाके में सप्लाई हुआ पानी कुछ ही घंटों में लोगों को बीमार करने लगा। कई कॉलोनियों में लोगों को अचानक तेज उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन और बुखार की शिकायतें होने लगीं। तीन दिनों के भीतर 2,000 से ज्यादा लोग बीमार बताए गए, जिनमें से 15 लोगों की मौत हो गई।

स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तुरंत कैंप लगाकर मरीजों का इलाज शुरू किया। अस्पतालों में डायरिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस के केस तेजी से बढ़े। प्राथमिक जांच में संदेह दूषित पेयजल पर गया, जिसके बाद पानी के सैंपल लैब भेजे गए।

लैब रिपोर्ट: “जानलेवा” पानी सप्लाई सिस्टम

लैब टेस्ट में पाया गया कि सप्लाई किए गए पानी में संदूषित पदार्थ मौजूद थे, जो उल्टी–दस्त के बड़े प्रकोप के लिए जिम्मेदार रहे। अधिकारियों ने बताया कि इसी दूषित पानी की वजह से 15 लोगों की मौत हुई। जांच रिपोर्ट ने इंदौर की पानी सप्लाई व्यवस्था को “life-threatening” बताया, यानी अगर सुधार न हो तो भविष्य में भी लोगों की जान जोखिम में रह सकती है।

इंदौर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) ने कहा कि पानी दूषित होने की मुख्य वजह पाइपलाइन में लीकेज थी, जहां से गंदा पानी और संभवतः सीवर या संक्रमणकारी सामग्री पेयजल लाइन में घुस गई।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्रवाई: अफसरों पर गाज

CM मोहन यादव ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस “दुर्भाग्यपूर्ण घटना” के लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है और साथ ही राज्य भर में सुधारात्मक कदम भी शुरू किए जा रहे हैं।

उन्होंने निर्देश दिए:
– इंदौर नगर निगम कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर को शो-कॉज नोटिस जारी किया जाए।
– एडिशनल कमिश्नर को तत्काल इंदौर से हटा दिया जाए।
– वाटर डिस्ट्रीब्यूशन वर्क्स विभाग के इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर से विभाग की जिम्मेदारी वापस ली जाए।
– इंदौर नगर निगम में खाली पड़े आवश्यक पदों को तुरंत भरा जाए।

सरकारी मीटिंग और पूरे राज्य की समीक्षा

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस घटना से जुड़े मामले में संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ-साथ राज्य के बाकी शहरों में भी सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए उसी शाम 16 नगर निगमों के मेयर, चेयरपर्सन, कमिश्नरों के साथ-साथ सभी जिला कलेक्टर्स, स्वास्थ्य विभाग, शहरी विकास विभाग, पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग और अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की वर्चुअल मीटिंग बुलाई गई।

इस बैठक में पूरे राज्य की पेयजल व्यवस्था की समीक्षा, लीकेज की पहचान, क्लोरीन स्तर, ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति और मॉनिटरिंग मेकनिज्म पर चर्चा होनी है, ताकि दूसरी जगह ऐसी त्रासदी न हो।

पहले हुई कार्रवाई: पहले भी हटाए गए अधिकारी

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस घटना से पहले भी एक अधिकारी को सेवा से हटा दिया गया था और दो अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था, जब दूषित पानी पीने से हजारों लोग बीमार हुए थे। इससे साफ होता है कि स्थानीय स्तर पर लापरवाही का सिलसिला पहले से चल रहा था, जिस पर समय रहते सख्त निगरानी नहीं रखी गई।

कारण: पाइपलाइन लीकेज, निगरानी में कमी

CMHO के अनुसार, पानी दूषित होने का सीधा कारण पाइपलाइन में लीकेज था। ऐसे मामलों में अक्सर होता यह है कि
– पुरानी और जर्जर पाइपलाइन में क्रैक पड़ जाते हैं।
– भारी बारिश या सीवर ओवरफ्लो की स्थिति में बाहर का गंदा पानी पाइप के अंदर घुस जाता है।
– अगर क्लोरीनेशन और नियमित टेस्टिंग कमजोर हो, तो बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैल जाते हैं।

इंदौर के मामले में भी पाइपलाइन लीकेज की वजह से सप्लाई पानी में खतरनाक बैक्टीरियल या फीकल कंटैमिनेशन होने की आशंका जताई गई, जिसे लैब रिपोर्ट ने पुष्ट किया।

इंदौर की पेयजल व्यवस्था पर सवाल

इंदौर देश के सबसे साफ शहरों में गिना जाता रहा है, लेकिन इस घटना ने उसकी पेयजल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। “life-threatening water supply system” जैसी टिप्पणी किसी भी शहर के लिए बड़ा अलार्म है। इसका मतलब है कि:
– पाइपलाइन नेटवर्क पुराना और रिस्की है।
– गुणवत्ता जांच (क्वालिटी मॉनिटरिंग) पर्याप्त नहीं।
– लीकेज डिटेक्शन और रिपेयर सिस्टम कमजोर है।

अगर समय रहते बड़े पैमाने पर सर्वे, रिपेयर और मॉनिटरिंग नहीं की गई तो भविष्य में भी इसी तरह के प्रकोप दोहराने का खतरा बना रहेगा।

जनस्वास्थ्य के लिए सीख: क्या बदलना जरूरी है?

  1. नियमित पानी जांच
    हर जोन/वार्ड से नियमित अंतराल पर पानी के सैंपल लेकर लैब टेस्ट अनिवार्य हों। टेस्ट रिपोर्ट को पब्लिक पोर्टल पर डालना पारदर्शिता बढ़ाएगा।
  2. पाइपलाइन मैपिंग और रिन्यूअल
    पुरानी पाइपलाइनों का GIS मैपिंग कर धीरे-धीरे उनका रिन्यूअल जरूरी है। जहां बार-बार लीकेज की शिकायतें आती हों, वहां प्रायोरिटी से नई लाइन डाली जाए।
  3. रियल-टाइम मॉनिटरिंग
    क्लोरीन सेंसर, स्मार्ट मीटर और प्रेशर सेंसर से लीकेज और कंटैमिनेशन को जल्दी पकड़ने वाली स्मार्ट वॉटर सिस्टम की जरूरत है, खासकर बड़े शहरों में।
  4. पब्लिक अवेयरनेस
    लोगों को जागरूक किया जाए कि अगर पानी में गंदगी, बदबू, रंग में फर्क या अचानक डायरिया के केस बढ़ें तो तुरंत हेल्थ और वाटर विभाग को सूचना दें।
  5. जवाबदेही तय
    सिर्फ सस्पेंशन नहीं, अगर लापरवाही से मौतें हुई हैं तो आपराधिक जिम्मेदारी (जैसे IPC की धारा 304A) भी तय हो सकती है। इससे सिस्टम में डर और जिम्मेदारी दोनों बढ़ेंगे।

5 FAQs

  1. इंदौर में दूषित पानी से कितनी मौतें हुईं और कितने लोग बीमार हुए?
    तीन दिनों में दूषित पेयजल से 15 लोगों की मौत हुई और 2,000 से ज्यादा लोग उल्टी–दस्त से बीमार पड़े।
  2. दूषित पानी का कारण क्या था?
    इंदौर के CMHO के मुताबिक, पाइपलाइन में लीकेज की वजह से गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया, जिससे पानी दूषित हो गया।
  3. लैब रिपोर्ट में क्या कहा गया?
    लैब टेस्ट में पानी में खतरनाक संदूषित पदार्थ पाए गए और इंदौर की पानी सप्लाई प्रणाली को “life-threatening” यानी जानलेवा कहा गया।
  4. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्या कार्रवाई की?
    CM ने इंदौर के एडिशनल कमिश्नर को हटाने, वाटर डिस्ट्रीब्यूशन के इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर से जिम्मेदारी वापस लेने, शो-कॉज नोटिस जारी करने और निगम में खाली पद तुरंत भरने के निर्देश दिए।
  5. पूरे राज्य के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
    CM ने 16 नगर निगमों के मेयर, कमिश्नर, जिले के कलेक्टरों और संबंधित विभागों के साथ वर्चुअल मीटिंग बुलाकर पूरे राज्य की पानी सप्लाई व्यवस्था की समीक्षा और समयबद्ध सुधार कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

अजित पवार की मौत में कुछ संदिग्ध है? संजय राउत का बड़ा सवाल, क्या हादसा था या साजिश?

महाराष्ट्र डिप्टी CM अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को बारामती प्लेन...

यूनियन बजट 2026 पर ममता का तीखा हमला: “बंगाल को एक पैसा भी नहीं, झूठ का पुलिंदा!”

ममता बनर्जी ने यूनियन बजट 2026-27 को ‘दिशाहीन, दृष्टिहीन, एंटी-पीपल’ बताया। बंगाल...

मंत्रियों के वेतन पर 1102 करोड़ का खर्च? बजट 2026 में क्या–क्या छिपा है इस आंकड़े में?

बजट 2026-27 में मंत्रियों, PMO, कैबिनेट सचिवालय और राज्य मेहमानों के मनोरंजन...

बजट 2026: विकास भारत का मजबूत आधार या सिर्फ घोषणाएं? PM मोदी ने बताई सच्चाई

बजट 2026: PM मोदी ने सराहा, बोले – विकास भारत 2047 का...