Home देश क्या जज परफेक्ट होते हैं? CJI सूर्या कांत ने कहा दिखावा करने से नेतृत्व कमजोर होता है
देश

क्या जज परफेक्ट होते हैं? CJI सूर्या कांत ने कहा दिखावा करने से नेतृत्व कमजोर होता है

Share
CJI Surya Kant speech, judicial leadership imperfect judges
Share

CJI सूर्या कांत ने Commonwealth Judicial Educators सम्मेलन में कहा कि जजों को परफेक्ट मानना संस्था को नुकसान पहुंचाता है। विनम्रता, निरंतर सीखना जरूरी। Commonwealth Apex Body का प्रस्ताव।

जजों की गलतियों को मानना क्यों जरूरी? CJI ने Commonwealth Apex Body का प्रस्ताव रखा

CJI सूर्या कांत का बयान: जज परफेक्ट नहीं, दिखावा करने से नेतृत्व कमजोर

13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में Commonwealth Judicial Educators (CJEs) के 11वें द्विवार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन पर मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि न्यायिक नेतृत्व जजों की कमियों से कमजोर नहीं पड़ता, बल्कि तब कमजोर होता है जब जज अपनी कमियों को छिपाने का दिखावा करते हैं। CJI ने जोर दिया कि जजों को अपॉइंटमेंट के बाद भी निरंतर सीखना, सुधारना और बेहतर बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून जीवंत चीज है, जो समय के साथ बदलता है। जजों को सिर्फ पुराने केसों का पालन ही नहीं, बल्कि वर्तमान न्याय के लिए कानून को नई व्याख्या भी देनी चाहिए। यह बयान सम्मेलन के थीम ‘Educating for Judicial Leadership’ पर बिल्कुल फिट बैठता है।

जजों को परफेक्ट मानना क्यों गलत? CJI ने समझाया

CJI ने कहा कि लंबे समय से यह सोच रही है कि जज अपॉइंटमेंट के बाद तैयार माल होते हैं – परिपूर्ण और बेदाग। लेकिन यह सोच संस्था को चमकाती तो है, सेवा नहीं करती। जजों को अपरिपूर्ण मानना जरूरी है, क्योंकि तभी विकास, सुधार और सुधार संभव होता है। उन्होंने कहा कि इतिहास के सबसे सम्मानित न्यायिक नेता वे थे जो अपनी सीमाओं को जानते थे, गलतियों की संभावना स्वीकारते थे और सीखने को तैयार रहते थे। विनम्रता सिर्फ व्यक्तिगत गुण नहीं, बल्कि पेशेवर सुरक्षा कवच है। हर न्यायिक अधिकारी को यह सिखाया जाना चाहिए। भारतीय कहावत ‘विद्या ददाति विनयम’ को उद्धृत किया।

Commonwealth Apex Body का प्रस्ताव: वैश्विक सुधार का प्लान

CJI ने एक कट्टरपंथी बदलाव की वकालत की। उन्होंने Commonwealth Apex Body बनाने का प्रस्ताव रखा, जो सदस्य देशों में न्यायिक शिक्षा, बार और बेंच को एकजुट करे। यह बॉडी Commonwealth Lawyers Association, Legal Education Association और Magistrates’ and Judges’ Association को जोड़ेगी। इसका मकसद सिद्धांत, ट्रेनिंग और प्रैक्टिस में सहयोग बढ़ाना। CJI ने कहा कि Commonwealth Judicial Education Institute (CJEI) जजों को कानून के सिर्फ व्याख्याकार नहीं, बल्कि न्याय के बुद्धिमान संरक्षक बनाता है। महाद्वीपों, संस्कृतियों और कानूनी परंपराओं के बीच पीयर लर्निंग जरूरी। इससे वैश्विक न्यायिक बुद्धिमत्ता का लाभ मिलेगा।

न्यायिक शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण? CJI का नजरिया

CJI ने कहा कि दुनिया बदल रही है, समाज नई चुनौतियां ला रहा है। जजों को पूर्वाग्रहों की महारत के साथ कानून को वर्तमान न्याय के अनुरूप व्याख्या करने की चपलता भी चाहिए। CJEI जैसे प्लेटफॉर्म जजों को नैतिक और तकनीकी चुनौतियों से निपटने को तैयार करते हैं। आपसी सीखना न्यायिक विकास का जीवन रक्त है। इससे फैसले न सिर्फ कानूनी, बल्कि वैश्विक बुद्धिमत्ता से समृद्ध होते हैं। CJEI को सराहा कि यह शिक्षकों को जोड़ता है, बिना स्थानीय संदर्भ मिटाए। सम्मेलन में टेक्नोलॉजी, पर्यावरण न्याय, इंटेग्रिटी, पब्लिक कॉन्फिडेंस, जजों का स्वास्थ्य और फैसले लिखने की कला पर चर्चा होगी।

जजों की ट्रेनिंग: पुरानी सोच से नया बदलाव

CJI ने कहा कि जजों को अपॉइंटमेंट के बाद तैयार उत्पाद मानना पुरानी सोच है। अब ईमानदार आधार अपनाना होगा – जज संस्थाओं की तरह विकासशील हैं। Commonwealth Judicial Educators परिवर्तनकारी यात्राओं के शांत वास्तुकार हैं। सम्मेलन समयानुकूल है। जजों को युवा कानूनी सदस्यों को शामिल कर भविष्य तैयार करना चाहिए। नई सोच से संस्थाएं डायनामिक और फ्यूचर–रेडी बनेंगी। यह संदेश न सिर्फ भारत, बल्कि सभी Commonwealth देशों के लिए प्रासंगिक है।

भारतीय संदर्भ में CJI का संदेश क्यों खास?

भारत में NJDG और NJA जैसे प्लेटफॉर्म जजों की ट्रेनिंग कर रहे हैं। CJI ने पहले भी न्यायिक शिक्षा पर जोर दिया। यह बयान जजों पर बढ़ते प्रेशर के बीच आया। पेंडेंसी, केस बैकलॉग, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन में सुधार की जरूरत। विनम्रता से पब्लिक ट्रस्ट बढ़ेगा। Commonwealth Apex Body से भारत को लीडरशिप मिल सकती है। युवा जजों को मेंटरशिप और इनोवेटिव लर्निंग पर फोकस।

क्या होगा आगे: सम्मेलन के नतीजे

सम्मेलन में कानून–टेक इंटरसेक्शन, पर्यावरण न्याय, जजों की अखंडता, पब्लिक कॉन्फिडेंस, वेलनेस और फैसले लिखने पर सत्र होंगे। CJI ने इसे सामूहिक सीखने का मौका बताया। Apex Body का प्रस्ताव आगे चर्चा में रहेगा। यह न्यायपालिका को मजबूत बनाने का कदम। जजों को विनम्र रहना सिखाने से संस्था मजबूत होगी।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: CJI सूर्या कांत ने जजों के बारे में क्या कहा?
    उत्तर: जज अपरिपूर्ण होते हैं, परफेक्ट बनने का दिखावा करने से न्यायिक नेतृत्व कमजोर होता है; विनम्रता जरूरी।
  2. प्रश्न: Commonwealth Apex Body क्या है?
    उत्तर: CJI का प्रस्ताव – सदस्य देशों में न्यायिक शिक्षा, बार, बेंच को जोड़ने वाली टॉप बॉडी, सहयोग बढ़ाने के लिए।
  3. प्रश्न: सम्मेलन का थीम क्या था?
    उत्तर: ‘Educating for Judicial Leadership’ – जजों को लीडर बनाने पर फोकस।
  4. प्रश्न: CJI ने जजों की भूमिका कैसे परिभाषित की?
    उत्तर: पूर्वाग्रहों की महारत के साथ कानून की वर्तमान व्याख्या; निरंतर सीखना और सुधार।
  5. प्रश्न: CJEI की क्या भूमिका बताई?
    उत्तर: जजों को न्याय के संरक्षक बनाने वाला, वैश्विक चुनौतियों से निपटने को तैयार करने वाला।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

बड़ी बहन की सुसाइड के 15 दिन बाद भाई-बहन ने वाराणसी होटल में क्यों दी जान?

हैदराबाद के गणेश गौड़ (46) और धनलक्ष्मी (38) वाराणसी होटल में मृत...

ऑपरेशन सिंदूर: CDS ने बताया असली विजय कैसे हासिल होती है, पाक के दावे क्यों झूठे?

CDS जनरल अनिल चौहान ने पुणे सेमिनार में पाकिस्तान पर निशाना साधा...