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US सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के ‘ग्लोबल टैरिफ’ गिराए, राहुल गांधी का हमला: “PM मोदी की गद्दारी अब बेनकाब”

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Rahul Gandhi Modi betrayal compromised
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US सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA के तहत ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को 6–3 से रद्द कर दिया। इसके बाद राहुल गांधी ने भारत‑US ‘इंटरिम ट्रेड डील’ पर PM मोदी को “compromised” बताते हुए कहा कि “गद्दारी बेनकाब” हो गई। ट्रंप ने अब Trade Act 1974 की Section 122 के तहत 10% टैरिफ लाने की बात कही है।

ट्रंप टैरिफ पर कोर्ट का झटका, भारत‑US ‘इंटरिम डील’ पर सियासत तेज: राहुल बोले—“दोबारा सरेंडर करेंगे”

US कोर्ट ने ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ गिराए, भारत में ‘इंटरिम डील’ पर सियासत तेज

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक “ग्लोबल टैरिफ” को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद भारत में भी राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई, क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत‑US इंटरिम ट्रेड डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। राहुल ने X पर लिखा कि “PM compromised हैं” और “उनकी गद्दारी अब बेनकाब हो गई है”।

राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि मोदी सरकार अब डील को “री-नेगोशिएट” नहीं कर पाएगी और “फिर से सरेंडर करेगी”। उनका हमला ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद नए टैरिफ प्लान की बात कर रहा है।

US सुप्रीम कोर्ट का फैसला: IEEPA के तहत टैरिफ ‘कानूनी अधिकार से बाहर’

रिपोर्ट के मुताबिक, US सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का इस्तेमाल करते हुए व्यापक इम्पोर्ट टैरिफ लगाकर अपनी कानूनी सीमा पार की। कोर्ट के अनुसार IEEPA का दायरा “इमरजेंसी” स्थितियों में कुछ आर्थिक कदमों तक है, लेकिन इसके आधार पर व्यापक टैरिफ लगाना राष्ट्रपति का एकतरफा अधिकार नहीं माना जा सकता।

यह फैसला अमेरिकी व्यापार नीति और वैश्विक सप्लाई‑चेन दोनों के लिए बड़ा माना जा रहा है, क्योंकि इससे कई देशों पर लगे “सामान्य/विस्तृत” टैरिफ का आधार कमजोर पड़ गया।

ट्रंप की प्रतिक्रिया: “भयानक फैसला”, अब Section 122 के तहत 10% टैरिफ का संकेत

रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने इस फैसले को “terrible decision” बताया और कहा कि वे 1974 के Trade Act की Section 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लाने की दिशा में जाएंगे। Section 122 एक कम इस्तेमाल होने वाला प्रावधान है, जिसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति अस्थायी रूप से इम्पोर्ट सरचार्ज (कुछ शर्तों के साथ) लागू कर सकते हैं।

Section 122 की खास बात यह है कि यह अस्थायी व्यवस्था है: इसके तहत अधिकतम 15% तक का इम्पोर्ट सरचार्ज लगाया जा सकता है और अवधि अधिकतम 150 दिन होती है। यही कारण है कि कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप का “अगला हथियार” यही बताया जा रहा है।

भारत में विवाद क्यों: इंटरिम ट्रेड डील की टाइमिंग और “लेवरेज” का सवाल

US कोर्ट के फैसले के बाद बहस का मुख्य बिंदु यह बन गया कि भारत ने इंटरिम ट्रेड डील इतनी जल्दी क्यों साइन की। रिपोर्ट के अनुसार शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पहले ही यह सवाल उठाया था कि भारत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किए बिना जल्दबाज़ी क्यों की, और क्या इस प्रक्रिया में भारत ने ऊर्जा खरीद (रूसी तेल) व किसानों के हित जैसे मुद्दों पर अपना “लेवरेज” कमजोर किया।

प्रियंका ने पोस्ट्स में यह भी कहा कि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद “बाकी दुनिया” 10% टैरिफ की स्थिति में आ गई, जबकि भारत के पास अब उतना मोलभाव बचता है या नहीं—यह एक अहम सवाल है। उन्होंने ब्राज़ील का उदाहरण देकर दावा किया कि कुछ देश ज्यादा टैरिफ के बावजूद “झुके नहीं”।

राहुल गांधी का हमला: “betrayal stands exposed”, “he will surrender again”

राहुल गांधी ने X पर लिखा: “The PM is compromised. His betrayal now stands exposed. He can’t renegotiate. He will surrender again.” यह बयान उन्होंने US सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ‑वर्डिक्ट के बाद दिया और इसे भारत‑US इंटरिम ट्रेड डील से जोड़कर प्रधानमंत्री पर “कमजोर सौदेबाज़ी” का आरोप लगाया।

कांग्रेस का तर्क यह दिखता है कि अगर ट्रंप के पुराने टैरिफ कानूनी तौर पर टिकने वाले नहीं थे, तो भारत को सौदे में उतनी जल्दी नहीं करनी चाहिए थी। इसी लाइन पर राहुल का “गद्दारी/सरेंडर” वाला हमला खड़ा है।

सरकार पर उठ रहे मुख्य सवाल (पॉलिटिकल डिबेट के आधार पर)

इस पूरे विवाद में सरकार के सामने कुछ बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं, जिन पर आने वाले दिनों में बहस और तेज हो सकती है:

  1. क्या भारत ने US कोर्ट के फैसले का इंतजार किए बिना जल्दी करके अपनी नेगोशिएटिंग पोजिशन कमजोर कर ली?
  2. रूसी तेल खरीद और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भारत ने कौन‑सी प्रतिबद्धताएं दीं, और उनका दायरा क्या है?
  3. कृषि/किसान हित और आयात टैरिफ के मुद्दे पर डील के अंदरूनी प्रावधान क्या हैं, और उनका घरेलू असर क्या पड़ेगा?
  4. अगर ट्रंप Section 122 के तहत अस्थायी टैरिफ लाते हैं, तो भारत की रणनीति क्या होगी—री‑नेगोशिएशन, WTO विकल्प, या सेक्टर‑स्पेसिफिक समाधान?

IEEPA बनाम Section 122: फर्क एक नजर में (रीडर्स के लिए सरल टेबल)

तालिका: ट्रंप के टैरिफ टूल्स का बेसिक फर्क

पहलूIEEPA (1977)Trade Act Section 122 (1974)
उपयोग का आधारराष्ट्रीय आपातकाल/इमरजेंसी शक्तियां“Balance of payments” जैसी स्थितियों के लिए अस्थायी उपाय
कोर्ट की स्थितिसुप्रीम कोर्ट ने व्यापक टैरिफ हेतु अधिकार से बाहर कहाअस्थायी सरचार्ज/कोटा की अनुमति, समय‑सीमा स्पष्ट
अधिकतम दर/सीमाइस विवाद में व्यापक टैरिफ लगाए गए15% तक, अधिकतम 150 दिन
मौजूदा ट्रंप संकेत“ग्लोबल टैरिफ” गिरने के बाद विकल्प खोज10% ग्लोबल टैरिफ का संकेत

आगे क्या: ट्रेड नीति फिर से अनिश्चित, भारत में राजनीति और तेज होगी

US सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने ट्रंप के टैरिफ एजेंडे को एक बड़ा झटका दिया है, लेकिन ट्रंप ने वैकल्पिक कानूनी रास्ता अपनाने का संकेत देकर यह साफ कर दिया है कि टैरिफ‑प्रेशर की राजनीति जल्दी खत्म नहीं होने वाली। ऐसे में भारत में भी इंटरिम डील, ऊर्जा नीति और घरेलू हितों को लेकर राजनीतिक बहस जारी रह सकती है।

FAQs (5)

  1. US सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ पर क्या फैसला दिया?
    कोर्ट ने 6–3 से कहा कि IEEPA के तहत व्यापक इम्पोर्ट टैरिफ लगाकर ट्रंप प्रशासन ने अपनी कानूनी सीमा पार की, इसलिए वे टैरिफ टिक नहीं सकते।
  2. राहुल गांधी ने इस फैसले के बाद क्या कहा?
    राहुल ने X पर PM मोदी को “compromised” बताया और कहा कि उनकी “betrayal stands exposed” है; साथ ही यह भी लिखा कि मोदी “renegotiate” नहीं कर पाएंगे और “surrender again” करेंगे।
  3. ट्रंप अब टैरिफ के लिए कौन सा रास्ता अपनाने की बात कर रहे हैं?
    ट्रंप ने कहा कि वे Trade Act 1974 की Section 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लाने का कदम उठा सकते हैं।
  4. Section 122 क्या अनुमति देता है?
    Section 122 के तहत राष्ट्रपति अस्थायी रूप से इम्पोर्ट सरचार्ज 15% तक और अधिकतम 150 दिन के लिए लागू कर सकते हैं (कुछ शर्तों के साथ)।
  5. भारत‑US इंटरिम डील पर विवाद क्यों हो रहा है?
    आलोचकों का कहना है कि भारत ने US कोर्ट के फैसले का इंतजार किए बिना जल्दी डील की, जिससे ऊर्जा खरीद (रूसी तेल) और किसानों/टैरिफ हितों पर भारत का “लेवरेज” कमजोर हो सकता है—इसी आधार पर राहुल और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाए।

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