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क्या केंद्र राज्यों को 25.44 लाख करोड़ दे रहा या सिर्फ आंकड़े दिखा रहा? सीतारामन का दावा

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2026-27 में राज्यों को 25.44 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर होंगे – टैक्स शेयर 41% और केंद्रीय योजनाओं का हिस्सा। सीतारामन ने लोकसभा में कहा, फाइनेंस कमीशन की सिफारिशें पूरी तरह लागू। 2.7 लाख करोड़ की बढ़ोतरी।

फाइनेंस कमीशन ने साफ कहा – केंद्र ने एक भी पैसा कम नहीं किया, सच क्या है?

राज्यों को कितना पैसा मिलेगा 2026-27 में?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने 11 फरवरी 2026 को लोकसभा में बजट चर्चा पर जवाब देते हुए एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि 2026-27 में कुल 25.44 लाख करोड़ रुपये राज्यों को ट्रांसफर किए जाएंगे। इसमें राज्यों का टैक्स डिवोल्यूशन का हिस्सा और केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (CSS) के तहत रिलीज शामिल हैं। ये आंकड़ा पिछले साल के रिवाइज्ड एस्टीमेट से 2.7 लाख करोड़ रुपये ज्यादा है। इससे साफ है कि केंद्र राज्यों को ज्यादा संसाधन दे रहा है। विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य का शेयर कम नहीं किया गया।

सीतारामन ने जोर देकर कहा कि केंद्र ने डिविजिबल पूल का 41 प्रतिशत राज्यों को दिया है। ये 16वीं फाइनेंस कमीशन की सिफारिश के मुताबिक है। कमीशन ने 2018-19 से 2022-23 तक के ट्रांसफर चेक किए और पाया कि हर साल सिफारिशें पूरी हुईं। CAG सर्टिफाइड डेटा से साफ है कि कोई कटौती नहीं हुई। राज्यों को अब कोई शक करने की गुंजाइश नहीं बची। ये पारदर्शिता फिस्कल फेडरलिज्म को मजबूत बनाएगी। सरकार का फोकस अब आउटकम पर है।

टैक्स डिवोल्यूशन क्या है और कैसे तय होता है?

टैक्स डिवोल्यूशन का मतलब है केंद्र द्वारा वसूले गए टैक्स का एक हिस्सा राज्यों को लौटाना। संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत फाइनेंस कमीशन हर पांच साल ये तय करता है। 16वीं कमीशन ने 2026-31 के लिए 41 प्रतिशत रखा, जो 15वीं कमीशन जैसा ही है। इसमें इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स का डिविजिबल पूल आता है, GST नहीं। 2026-27 के लिए ये करीब 15.26 लाख करोड़ रुपये का अनुमान है। बाकी CSS ग्रांट्स से आता है। इससे राज्यों को अपनी योजनाएं चलाने का पैसा मिलता है।

केंद्र ने कहा कि ग्रॉस टैक्स रिसीट 44.04 लाख करोड़ रुपये होंगे। ये 2025-26 RE से 8 प्रतिशत ज्यादा है। कुल खर्च 53.47 लाख करोड़ रखा गया है। कैपिटल एक्सपेंडिचर 12.22 लाख करोड़ (GDP का 3.1 प्रतिशत) है। ये 11.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। राज्यों को भी कैपेक्स के लिए स्पेशल असिस्टेंस दी जा रही है। 50 साल वाली लोन स्कीम को बढ़ाकर 2 लाख करोड़ किया गया।

विपक्ष के आरोपों पर सीतारामन का जवाब

बजट चर्चा में विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्यों का शेयर कम हो रहा है। कुछ राज्यों ने कहा कि फंड डिले हो रहे हैं। सीतारामन ने इसे सिरे से खारिज किया। उन्होंने 16वीं फाइनेंस कमीशन का हवाला दिया। कमीशन ने खुद कन्फर्म किया कि हर साल ट्रांसफर सही रहा। कोई राज्य का शेयर रिड्यूस नहीं हुआ। 41 प्रतिशत का पूरा हिस्सा दिया गया। ये फैक्ट्स से साबित है। अब बहस आंकड़ों पर होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहले भी कमीशन ने चेक किया। 2018 से 2023 तक सब परफेक्ट मैच। राज्यों को अब CAG डेटा देखना चाहिए। केंद्र ने लेटर एंड स्पिरिट में फॉलो किया। फिस्कल डिसिप्लिन पर जोर दिया गया। राज्यों से भी कहा कि ऑफ-बजट बॉरोइंग बंद करें। सब्सिडी रेशनलाइज करें। अनटारगेटेड कैश ट्रांसफर पर चेतावनी दी। ये सब राज्यों के हित में है।

केंद्रीय योजनाओं का फंड कैसे जाता है राज्यों तक?

केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं (CSS) में केंद्र और राज्य मिलकर खर्च करते हैं। 2026-27 में इनके तहत भी बड़ा हिस्सा राज्यों को मिलेगा। कुल 25.44 लाख करोड़ में ये अहम भाग है। SNA SPARSH जैसे पोर्टल से ट्रैकिंग होती है। पैसा ग्राउंड वर्क के आधार पर रिलीज होता है। इससे लीकेज कम होता है। लाभार्थी तक पैसा समय पर पहुंचता है। राज्यों को अब प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग पर फोकस करना होगा।

सीतारामन ने MSME और इंडस्ट्री सपोर्ट का भी जिक्र किया। MSME की डेफिनिशन वाइड की गई। मीडियम साइज्ड एक्सपोर्टर्स को मदद। क्रेडिट ग्रोथ 13.8 प्रतिशत रही। नॉन-फूड बैंक क्रेडिट 13 प्रतिशत बढ़ा। NBFC 15.4 प्रतिशत। स्किलिंग और एजुकेशन को इंटीग्रेट करने का प्लान। इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के पास मेगा एंटरप्रेन्योरशिप हब्स। केंद्र राज्य मिलकर जॉब क्रिएटर्स को सपोर्ट करेगा।

मेडिकल टूरिज्म और बायो-फार्मा पर फोकस

बजट में बायो-फार्मा को बूस्ट दिया गया। पांच रीजनल मेडिकल हब्स बनेंगे। मेडिकल टूरिज्म बढ़ेगा। इससे जॉब्स और इकोनॉमी को फायदा। इंडस्ट्री को सपोर्ट के लिए नई स्कीम्स। स्टेट्स के साथ पार्टनरशिप रेडी। युवाओं के लिए न्यू एम्प्लॉयमेंट चांसेज। इंफ्रास्ट्रक्चर पर लेबर इंटेंसिव सेक्टर्स। पब्लिक कैपेक्स 12 लाख करोड़ से ज्यादा। ये सब विकास को गति देगा।

राज्यों के लिए ये ट्रांसफर क्यों महत्वपूर्ण?

25.44 लाख करोड़ से राज्य अपनी योजनाएं चला सकेंगे। सड़क, हेल्थ, एजुकेशन पर खर्च बढ़ेगा। लेकिन राज्यों को भी अपनी कमाई बढ़ानी होगी। प्रॉपर्टी टैक्स GIS बेस्ड सिस्टम बनाएं। रूरल-अर्बन ग्रांट्स 60:40। अर्बनाइजेशन प्रीमियम के लिए 10,000 करोड़। पेरी-अर्बन विलेजेस को मर्ज करने पर इनसेंटिव। फिस्कल डेफिसिट GSDP का 3 प्रतिशत रखें। इससे सस्टेनेबल ग्रोथ होगी।

16वीं फाइनेंस कमीशन की मुख्य बातें

कमीशन ने वर्टिकल डिवोल्यूशन 41 प्रतिशत रखा। हॉरिजॉंटल में GDP कंट्रीब्यूशन का वेट बढ़ाया। परफॉर्मेंस बेस्ड ट्रांसफर पर शिफ्ट। फिस्कल डिसिप्लिन अनिवार्य। ऑफ-बजट बॉरोइंग खत्म। सब्सिडी स्टैंडर्डाइजेशन। CAG से एनुअल डिस्क्लोजर। राज्यों को रेवेन्यू ब्वॉयेंसी से लिंक ग्रांट्स। फ्लोर गारंटी रखी। साउदर्न और गरीब राज्यों के लिए चिंता। लेकिन ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी।

कुल खर्च और इकोनॉमी का नजरिया

बजट में ओवरऑल स्पेंडिंग 53.47 लाख करोड़। टैक्स से ज्यादा खर्च। कैपेक्स GDP का 3.1 प्रतिशत। इंफ्रा पर जोर। लेबर इंटेंसिव सेक्टर्स। जॉब्स जेनरेशन। स्टेट्स को कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए लोन। 50 साल वाली स्कीम। केंद्र सहयोग रेडी। इंडस्ट्री लेंडिंग में कोई शॉर्टेज नहीं। ये सब विकसित भारत की राह पर कदम। राज्यों को भी पार्टनर बनना होगा।​

फिस्कल फेडरलिज्म को मजबूत करने के उपाय

फाइनेंस कमीशन ने एलास्टिसिटी लिंक्ड ट्रांसफर सुझाए। टैक्स सिस्टम सुधारने वाले राज्यों को रिवॉर्ड। ग्रेजुअल शिफ्ट। फ्लोर गारंटी से कोई राज्य का शेयर न गिरे। GIS बेस्ड प्रॉपर्टी टैक्स। RLB और ULB को ग्रांट्स। अर्बन मर्जर इनसेंटिव। डेफिसिट कैप। सब्सिडी रिव्यू। ये उपाय राज्यों को सेल्फ-रिलायंट बनाएंगे। केंद्र-राज्य कोऑपरेशन बढ़ेगा।

आम नागरिक के लिए क्या मतलब?

ये ट्रांसफर से राज्य स्तर पर डेवलपमेंट तेज होगा। स्कूल, हॉस्पिटल, रोड बेहतर बनेंगे। लेकिन राज्यों को खर्च सही जगह करना होगा। टैक्सपेयर को भरोसा कि पैसा पारदर्शी तरीके से जा रहा। CAG चेक से अकाउंटेबिलिटी। जॉब्स और ग्रोथ बढ़ेगी। मेडिकल हब्स से टूरिज्म। MSME से लोकल बिजनेस। सबका फायदा। सरकार का मैसेज क्लियर – डिसिप्लिन से विकास।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: 2026-27 में राज्यों को कुल कितना ट्रांसफर होगा?
    उत्तर: 25.44 लाख करोड़ रुपये, जिसमें टैक्स डिवोल्यूशन और CSS रिलीज शामिल; पिछले RE से 2.7 लाख करोड़ ज्यादा।
  2. प्रश्न: टैक्स डिवोल्यूशन का प्रतिशत क्या है?
    उत्तर: 41 प्रतिशत डिविजिबल पूल का, जैसा 16वीं फाइनेंस कमीशन ने सिफारिश की; कोई राज्य का शेयर कम नहीं।
  3. प्रश्न: 16वीं फाइनेंस कमीशन ने क्या पाया?
    उत्तर: 2018-23 तक केंद्र ने हर साल सिफारिशें पूरी कीं; CAG डेटा से कन्फर्म।
  4. प्रश्न: कैपिटल एक्सपेंडिचर कितना है?
    उत्तर: 12.22 लाख करोड़ (GDP 3.1%), 11.5% बढ़ोतरी; राज्यों को स्पेशल लोन 2 लाख करोड़।
  5. प्रश्न: विपक्ष के आरोपों पर वित्त मंत्री ने क्या कहा?
    उत्तर: 41% पूरा दिया गया, कमीशन ने क्लियर किया; कोई कटौती नहीं, आंकड़े झूठे नहीं बोलते।

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