स्पाइसजेट को कथित तौर पर बकाया एयर नेविगेशन/ओवरफ्लाइट शुल्क न चुकाने पर बांग्लादेशी एयरस्पेस इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। कोलकाता होकर नॉर्थ-ईस्ट जाने वाली कुछ उड़ानों को डिटूर लेना पड़ेगा, जिससे करीब 30 मिनट उड़ान समय और ईंधन लागत बढ़ सकती है। कंपनी का कहना है कि ऑपरेशन प्रभावित नहीं हैं और बातचीत चल रही है।
300 डॉलर प्रति फ्लाइट का चार्ज और बकाया: बांग्लादेश एयरस्पेस बैन से स्पाइसजेट की लागत बढ़ेगी
बांग्लादेशी एयरस्पेस पर स्पाइसजेट को रोक: बकाया शुल्क विवाद से उड़ानों को डिटूर, समय और लागत बढ़ने की आशंका
भारत की लो-कॉस्ट एयरलाइन स्पाइसजेट को बांग्लादेशी एयरस्पेस का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्रवाई कथित तौर पर एयर नेविगेशन/ओवरफ्लाइट चार्जेस के बकाया भुगतान न करने के चलते की गई। इस रोक के बाद नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के लिए खासकर कोलकाता रूट के जरिए चलने वाली कुछ उड़ानों को अब लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है, जिससे फ्लाइंग टाइम करीब 30 मिनट तक बढ़ सकता है।
यह कदम बांग्लादेश सरकार की तरफ से उठाया गया बताया गया है और इससे स्पाइसजेट की ईंधन लागत बढ़ने की आशंका है, क्योंकि डिटूर का सीधा मतलब ज्यादा उड़ान समय और ज्यादा फ्यूल बर्न होता है। एयरलाइन पहले से ही वित्तीय दबाव झेल रही है, ऐसे में यह घटनाक्रम उसके लिए एक और कॉस्ट-शॉक की तरह देखा जा रहा है।
ओवरफ्लाइट फीस क्या होती है और विवाद क्यों हुआ?
जब कोई विमान किसी देश के एयरस्पेस से होकर गुजरता है—चाहे वह वहां उतरे या सिर्फ ट्रांजिट करे—तो उसे उस देश को ओवरफ्लाइट/एयर नेविगेशन शुल्क देना पड़ता है। ये शुल्क आम तौर पर विमान के वजन और उड़ान की अवधि/समय जैसी चीजों पर निर्भर करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्पाइसजेट के बेड़े में शामिल बोइंग 737 जैसे विमान के लिए यह फीस करीब 300 डॉलर प्रति फ्लाइट के आसपास आंकी गई है।
सूत्रों के मुताबिक स्पाइसजेट ने छह महीने से ज्यादा समय तक भुगतान में डिफॉल्ट किया, जिसके बाद बांग्लादेश के Civil Aviation Authority (CAA) ने ओवरफ्लाइट परमिशन सस्पेंड कर दिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बांग्लादेशी रेगुलेटर देरी से भुगतान पर ब्याज (interest) की भी मांग कर रहा है।
डिटूर का असर: नॉर्थ-ईस्ट रूट पर 30 मिनट तक अतिरिक्त समय
बांग्लादेशी एयरस्पेस न मिलने से खास तौर पर वे फ्लाइट्स प्रभावित बताई गईं जो नॉर्थ-ईस्ट इंडिया की तरफ जाती हैं और जिनका ट्रैक कोलकाता के जरिए होकर गुजरता है। अब इन उड़ानों को रीरूट/डिटूर लेना होगा, जिससे उड़ान समय लगभग 30 मिनट तक बढ़ सकता है।
उड़ान समय बढ़ने का एक सीधा असर ईंधन खर्च और ऑपरेशनल कॉस्ट पर पड़ता है। साथ ही, कुछ मामलों में एयरलाइन को क्रू ड्यूटी टाइमिंग, टर्नअराउंड और शेड्यूलिंग में भी अतिरिक्त योजना बनानी पड़ती है। हालांकि स्पाइसजेट ने दावा किया है कि शेड्यूल्ड सर्विसेज “रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स” के अनुसार चल रही हैं।
स्पाइसजेट का बयान: “रूटीन इंडस्ट्री इश्यू, समाधान पर काम”
स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने कहा कि एयरलाइन बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रही है। कंपनी के मुताबिक, “ये रूटीन इंडस्ट्री इश्यू हैं, हम जल्दी समाधान के लिए कंस्ट्रक्टिव तरीके से काम कर रहे हैं।”
एयरलाइन ने यह भी कहा कि उसके फ्लाइट ऑपरेशंस अप्रभावित हैं और वह अपने शेड्यूल्ड ऑपरेशंस जारी रखे हुए है। दूसरी तरफ बांग्लादेश के Civil Aviation Authority के प्रवक्ता ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।
स्पाइसजेट की फाइनेंशियल स्थिति: फंड जुटाया, फिर भी आधा बेड़ा आउट ऑफ सर्विस
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब स्पाइसजेट की वित्तीय स्थिति लगातार चर्चा में रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्पाइसजेट ने 2024 में 3,000 करोड़ रुपये जुटाए थे और इस पूंजी का एक उद्देश्य ग्राउंडेड एयरक्राफ्ट को फिर से ऑपरेशन में लाना था। फिर भी, कंपनी के बेड़े का आधे से ज्यादा हिस्सा अभी भी आउट ऑफ सर्विस बताया गया है।
दिसंबर के अंत तक एयरलाइन लगभग 33 विमान ऑपरेट कर रही थी, जिसमें 16 विमान शॉर्ट-टर्म वेट लीज (wet lease) पर शामिल किए गए थे। इसी के चलते कंपनी ने दिसंबर में अपना मार्केट शेयर अक्टूबर के 2.6% से बढ़ाकर 4.3% तक किया।
कंपनी ने यह भी बताया कि नई पूंजी का एक बड़ा हिस्सा GST और TDS जैसी स्टैच्यूटरी देनदारियां चुकाने में इस्तेमाल हुआ। आगे के विस्तार के लिए स्पाइसजेट वेट लीज के जरिए और विमान जोड़ने की योजना पर काम कर रही है, जिसमें मई तक चार Boeing 737 MAX विमानों के जुड़ने की उम्मीद बताई गई है। लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक फ्लीट को 60 विमानों तक बढ़ाया जाए।
तिमाही नतीजे और चेयरमैन का बयान
रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर तिमाही में स्पाइसजेट को 261.7 करोड़ रुपये का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में 20.2 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज हुआ था।
चेयरमैन अजय सिंह ने लागत दबाव को स्वीकार करते हुए कहा कि ज्यादा विमान सर्विस में आने, नेटवर्क फोकस और बैलेंस शीट सुधार के जरिए एयरलाइन “स्टेप बाय स्टेप” एक अधिक रेज़िलिएंट कंपनी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
यात्रियों के लिए क्या बदल सकता है?
इस तरह की एयरस्पेस पाबंदी का असर यात्रियों के लिए आम तौर पर दो तरीके से दिख सकता है—कुछ उड़ानों के समय में वृद्धि और कुछ मामलों में कनेक्टिंग फ्लाइट्स/शेड्यूल में बदलाव। हालांकि इस रिपोर्ट में एयरलाइन ने कहा है कि उसके ऑपरेशंस प्रभावित नहीं हैं, लेकिन डिटूर से समय बढ़ने की बात भी सामने आई है, इसलिए यात्रियों के लिए फ्लाइट स्टेटस चेक करना व्यावहारिक रहेगा।
अगर यह विवाद जल्दी सुलझ जाता है, तो रूट सामान्य हो सकते हैं। लेकिन अगर बकाया और ब्याज को लेकर बातचीत लंबी चली, तो कॉस्ट बढ़ने का असर एयरलाइन की वित्तीय रिकवरी पर भी पड़ सकता है।
FAQs (5)
- स्पाइसजेट को बांग्लादेशी एयरस्पेस से क्यों रोका गया?
रिपोर्ट के मुताबिक स्पाइसजेट पर बकाया एयर नेविगेशन/ओवरफ्लाइट शुल्क न चुकाने का आरोप है, जिसके बाद बांग्लादेश ने ओवरफ्लाइट परमिशन सस्पेंड किए। - इसका असर किन रूट्स पर पड़ेगा?
खासकर नॉर्थ-ईस्ट इंडिया की ओर कोलकाता के जरिए जाने वाली कुछ उड़ानों को डिटूर लेना पड़ रहा है, जिससे फ्लाइंग टाइम करीब 30 मिनट तक बढ़ सकता है। - ओवरफ्लाइट फीस क्या होती है?
जब कोई विमान किसी देश के एयरस्पेस से होकर गुजरता है तो उस देश को एयर नेविगेशन/ओवरफ्लाइट शुल्क देना पड़ता है; यह विमान के वजन और उड़ान अवधि जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है। - स्पाइसजेट ने इस पर क्या कहा?
स्पाइसजेट ने कहा कि वह बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है, यह रूटीन इंडस्ट्री इश्यू है और ऑपरेशंस अप्रभावित हैं। - स्पाइसजेट की मौजूदा फ्लीट और विस्तार योजना क्या है?
दिसंबर के अंत तक एयरलाइन लगभग 33 विमान ऑपरेट कर रही थी (जिसमें 16 वेट-लीज पर थे) और लक्ष्य दिसंबर 2026 तक फ्लीट को 60 विमानों तक बढ़ाने का है; चार Boeing 737 MAX मई तक आने की उम्मीद बताई गई है।
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