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सुनेत्रा पवार पहली महिला डिप्टी CM बनीं, पुणे-बीड गार्जियन मंत्री – पावर हैंडओवर का राज़?

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Sunetra Pawar guardian minister Pune Beed
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अजित पवार की मौत के 6 दिन बाद 3 फरवरी 2026 को सुनेत्रा पवार को पुणे-बीड का गार्जियन मंत्री बनाया गया। एक्साइज़, स्पोर्ट्स, माइनॉरिटी वेलफेयर विभाग भी। राजनीतिक पृष्ठभूमि, महायुति समीकरण, NCP मर्जर, शरद पवार गुट का असर और आगे क्या – पूरा विश्लेषण।

अजित पवार की विरासत सुनेत्रा संभालेंगी? NCP के भविष्य पर पुणे-बीड की कमान का असर!

सुनेत्रा पवार को पुणे और बीड का गार्जियन मंत्री बनाया गया – अजित पवार की विरासत संभाली

महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार की अचानक मौत ने सबको हिला दिया। लेकिन महायुति सरकार ने तेज़ी से कदम उठाते हुए उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को न सिर्फ़ डिप्टी सीएम बनाया, बल्कि 3 फरवरी 2026 को पुणे और बीड जिलों का गार्जियन मंत्री भी नियुक्त किया। ये वो ही ज़िले थे जिनकी कमान अजित संभाल रहे थे।

सुनेत्रा को पहले ही एक्साइज़, स्पोर्ट्स और माइनॉरिटी वेलफेयर विभाग मिल चुके थे। फाइनेंस पोर्टफोलियो सीएम देवेंद्र फडणवीस के पास रहेगा। ये नियुक्ति GR के ज़रिए जारी हुई।

अजित की 28 जनवरी को प्लेन क्रैश में मौत के सिर्फ़ 6 दिन बाद ये कदम उठाया गया। क्या ये फैमिली को पावर हैंडओवर है या महायुति की स्ट्रेटेजी? आइए स्टेप बाय स्टेप समझते हैं।

सुनेत्रा पवार का राजनीतिक सफर: शुरुआत से अब तक

सुनेत्रा पवार 1963 में पैदा हुईं। सोशल वर्कर रही हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में बारामती से शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ़ लड़ीं, लेकिन 1.58 लाख वोट से हारीं। फिर जून 2024 में राजyasabha MP बनीं।

अजित की मौत के बाद NCP (अजित गुट) ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। सुनेत्रा को विधानसभा दल नेता चुना। 31 जनवरी को डिप्टी सीएम पद की शपथ ली – महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम।

NCP लीडर्स जैसे सुनील तटकरे, छगन भुजबल, प्रफुल पटेल ने कहा – ये पार्टी की एकमत इच्छा थी। अजित की विरासत बचाने के लिए।

गार्जियन मंत्री का क्या रोल? पुणे-बीड क्यों खास?

महाराष्ट्र में हर ज़िले का एक गार्जियन मंत्री होता है। रोल:

  • ज़िले के डेवलपमेंट मॉनिटरिंग।
  • क्राइसिस मैनेजमेंट (बाढ़, सूखा)।
  • CM के नाम से प्रोजेक्ट्स की समीक्षा।
  • चुनावी मोर्चेबंदी।

पुणे: आर्थिक हब। IT, मैन्युफैक्चरिंग, एजुकेशन। बारामती अजित का गढ़। बीड: NCP का स्ट्रॉन्गहोल्ड। धनंजय मुंडे का इलाका, लेकिन अजित को मिला था।

सुनेत्रा को ये ज़िले देकर अजित की पॉलिटिकल लेगेसी को कंटिन्यू रखने की कोशिश।

महाराष्ट्र कैबिनेट रीशफल का बैकग्राउंड

अजित की मौत के तुरंत बाद:

  • 30 जनवरी: NCP विधायक दल ने सुनेत्रा को नेता चुना।
  • 31 जनवरी: शपथ ग्रहण। एक्साइज़, स्पोर्ट्स, माइनॉरिटी मिले। फाइनेंस फडणवीस को।​
  • 3 फरवरी: पुणे-बीड GR।

फाइनेंस पर BJP ने ज़ोर दिया – सुनेत्रा के पास एक्सपीरियंस कम। बजट आने वाला था।

महायुति समीकरण: BJP, शिंदे शिवसेना, NCP (अजित)

अजित के साथ आने से NCP को पावर मिली। मौत से वैकेंसी। सुनेत्रा को ऊपर उठाकर BJP ने NCP को स्टेबलाइज़ किया। नासिक-रायगढ़ पर शिवसेना दबाव।

NCP के अंदर: मर्जर की चर्चा। शरद पवार गुट से डर – अगर मर्जर हुआ तो BJP छोड़ना पड़ेगा, केस दोबारा खुल सकते। सुनेत्रा को ऊपर रखकर कंट्रोल बनाए रखा।

शरद पवार का रिएक्शन: चुप्पी। सुप्रिया सुले ने शोक जताया, लेकिन राजनीतिक कमेंट नहीं। फैमिली रिफ्ट और गहरा।

सुनेत्रा पवार के चैलेंजेस: आगे क्या?

  1. राजनीतिक अनुभव कम। पहली बार मंत्री।
  2. बारामती बाय-इलेक्शन लड़ना पड़ेगा।
  3. NCP में भुजबल, पटेल जैसे दिग्गजों को हैंडल।
  4. शरद पवार गुट से मुकाबला।
  5. महायुति में BJP-शिवसेना बैलेंस।

फायदे: अजित की विरासत, बारामती गढ़, सोशल वर्कर इमेज।

महाराष्ट्र पॉलिटिक्स पर असर

  • NCP (अजित) स्टेबल। रोहित पवार या दूसरा चेहरा उभर सकता।
  • महायुति सरकार मज़बूत दिखेगी।
  • विपक्ष MVA को अटैक का मौका।
  • लोकसभा बाय-इलेक्शन में टेस्ट।

बारामती से लेकर पुणे तक अजित की विरासत अब सुनेत्रा संभालेंगी। लेकिन क्या वो उतनी ही मज़बूत साबित होंगी? वक़्त बताएगा।

5 FAQs

प्रश्न 1: सुनेत्रा पावर को कब पुणे-बीड का गार्जियन मंत्री बनाया गया?
उत्तर: 3 फरवरी 2026 को GR जारी। अजित पवार के निधन के 6 दिन बाद। पहले एक्साइज़, स्पोर्ट्स, माइनॉरिटी मिले।

प्रश्न 2: गार्जियन मंत्री का रोल क्या होता है?
उत्तर: ज़िले के डेवलपमेंट मॉनिटर, क्राइसिस हैंडल, CM प्रोजेक्ट्स रिव्यू, चुनावी स्ट्रेटेजी। पुणे इकोनॉमिक हब, बीड NCP स्ट्रॉन्गहोल्ड।

प्रश्न 3: सुनेत्रा पावर डिप्टी सीएम कब बनीं?
उत्तर: 31 जनवरी 2026 को शपथ। महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम। NCP विधायक दल ने चुना।

प्रश्न 4: फाइनेंस पोर्टफोलियो किसके पास?
उत्तर: CM देवेंद्र फडणवीस के पास। सुनेत्रा को नहीं दिया, बजट आने वाले होने से।

प्रश्न 5: NCP मर्जर पर क्या असर?
उत्तर: सुनेत्रा को ऊपर रखकर अजित गुट ने कंट्रोल बनाए रखा। शरद पवार गुट से डर – BJP छोड़ना पड़ेगा।

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