कानपुर VIP रोड पर 10 करोड़ की लैम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को चोट पहुँचाई। ड्राइवर मोहन का दावा- शिवम को दौरा पड़ा था, लेकिन पुलिस CCTV से शिवम को ही ड्राइवर बता रही।
कानपुर क्रैश: टोबैको किंग के बेटे को दौरा पड़ा या स्पीडिंग से हादसा? मोहन ने क्यों लिया जिम्मा?
कानपुर VIP रोड पर लैम्बोर्गिनी का खौफनाक हादसा
8 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 3:15 बजे कानपुर के ग्वालटोली इलाके में VIP रोड पर एक लैम्बोर्गिनी रेवुएल्टो ने तहलका मचा दिया। ये 10 करोड़ रुपये की इतालवी लग्ज़री कार तेज़ रफ्तार से आई और पहले एक ई-रिक्शा को ठोक दिया। फिर वो रॉयल एनफील्ड बाइक पर चढ़ गई, जिसका पहिया घसीटते हुए ले गई और आखिरकार बिजली के खंभे से टकराकर रुकी। इस हादसे में कम से कम 6 लोग घायल हो गए, जिनमें पैदल राहगीर तौफीक और बाइक सवार विशाल त्रिपाठी शामिल थे। पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज की, लेकिन शुरू में ड्राइवर अज्ञात बताया। बाद में सबूतों से शिवम मिश्रा का नाम जोड़ा गया। ये कार दिल्ली नंबर की थी और टोबैको बिज़नेसमैन के.के. मिश्रा के बेटे शिवम की बताई जा रही।
हादसे के तुरंत बाद का ड्रामा
हादसे के बाद का सीन CCTV फुटेज में कैद है। कार रुकी तो भीड़ जमा हो गई। वीडियो में दिखा कि कार के बाउंसर या सिक्योरिटी वाले बाहर निकले और किसी को ड्राइवर सीट से खींचकर ले गए। लोग चिल्ला रहे थे कि “वीडियो बनाते रहो”। शिवम को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन पुलिस को खबर नहीं हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए, जिससे दबाव बढ़ा। कंट्रोल रूम ने तुरंत कार जब्त करने के आदेश दिए। कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि सबूतों से साफ है कि शिवम ही ड्राइवर था।
मोहन का सरेंडर और दौरा का दावा
अचानक एक नया ट्विस्ट आया जब मोहन नाम का शख्स कोर्ट में सरेंडर करने पहुँचा। उसने दावा किया कि हादसे के वक्त वो ही कार चला रहा था। मोहन ने कहा कि कार धीरे चल रही थी जब शिवम को अचानक दौरा पड़ गया। वो शिवम पर गिर पड़े, मोहन डर गया और एक हाथ से उन्हें पकड़ते हुए कार संभालने की कोशिश की। कार ने रिक्शा को मारा, डिवाइडर पर चढ़ी और रुकी। मोहन ने बताया कि कार का लॉक सिस्टम था, इसलिए वो बाहर नहीं निकल पाया। फिर उसने शिवम को ड्राइवर सीट पर शिफ्ट किया और नीचे से बाहर आया। परिवार ने भी कहा कि शिवम को एपिलेप्सी है।
पुलिस ने मोहन के दावे को सिरे से खारिज किया
कानपुर पुलिस ने मोहन की बात मानने से इनकार कर दिया। CP रघुबीर लाल ने कहा कि CCTV, गवाह बयान और वीडियो सब शिवम को ड्राइवर सीट पर दिखाते हैं। हादसे के बाद लोग उसे ही ड्राइवर सीट से खींच रहे थे। मोहन पर कोई केस नहीं है, इसलिए सरेंडर याचिका खारिज हो गई। पुलिस ने कार फोरेंसिक जांच के लिए भेज दी। ब्लैक बॉक्स चेक होगा, मेडिकल टेस्ट भी होंगे। ओवरस्पीडिंग या शराब का अल्कोहल टेस्ट भी होगा।
शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी और बेल
शिवम को 11 फरवरी को दिल्ली के अस्पताल से गिरफ्तार किया गया। चार दिन तक वो फरार था। कोर्ट ने कुछ घंटों में ही बेल दे दी, 20 हज़ार के बॉन्ड पर। वकील अनंत शर्मा ने कहा कि प्रोसीजर में पुलिस की लापरवाही थी। लेकिन पुलिस बोली कि जांच जारी है, बेल से कुछ नहीं बदलेगा। शिवम के पिता के.के. मिश्रा टोबैको के बड़े व्यापारी हैं। परिवार ने हमेशा कहा कि शिवम पैसेंजर था, ड्राइवर मोहन। एपिलेप्सी के टेस्ट कराए जाएँगे।
कानपुर पुलिस पर सवाल और SHO का तबादला
हादसे के बाद इलाके के SHO संतोष गौर को हटा दिया गया। कोर्ट ने पुलिस पर प्रोसीडरल लैप्स का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पर गुस्सा भड़का कि अमीरों को बचाया जा रहा। वायरल वीडियो में बाउंसर भागते दिखे। पुलिस ने पिता को भी पूछताछ के लिए बुलाया। चार्जशीट जल्द दाखिल होगी। ये केस अमीरों की लापरवाही पर सवाल उठा रहा।
लैम्बोर्गिनी रेवुएल्टो: कीमत और स्पीड का राज
ये कार दुनिया की सबसे महँगी लग्ज़री कारों में शुमार है। भारत में 10 करोड़ से ज़्यादा कीमत। 6.5 लीटर V12 इंजन, 1000 हॉर्सपावर। 0 से 100 किमी 2.5 सेकंड में। टॉप स्पीड 350 किमी/घंटा। कानपुर जैसे शहर में ये स्पीड घातक साबित हुई। कार का ब्लैक बॉक्स स्पीड, ब्रेक सब बताएगा। ऐसे हादसे अमीरों की शौकत पर सवाल उठाते हैं। आम लोग सड़क पर असुरक्षित महसूस करते।
कानपुर VIP रोड: हादसों का हॉटस्पॉट क्यों?
VIP रोड ग्वालटोली हाई ट्रैफिक वाली सड़क है। दुकानें, पैदल यात्री, रिक्शा-बाइक सड़क पर। CCTV हैं लेकिन स्पीड ब्रेकर कम। हादसे में पैदल राहगीर सबसे ज़्यादा प्रभावित। तौफीक जैसे लोग चोटिल हुए। विशाल त्रिपाठी की बाइक घसीटी गई। पुलिस ने अब ट्रैफिक चेक बढ़ाए। लेकिन अमीरों की लग्ज़री कारें शहरों में खतरा बन रही।
परिवार का पक्ष और मेडिकल क्लेम
के.के. मिश्रा और वकील कहते हैं कि शिवम निर्दोष है। दौरा पड़ने से हादसा हुआ। मोहन ड्राइवर था। शिवम दिल्ली में भर्ती है। लेकिन पुलिस सबूत दिखा रही। एपिलेप्सी टेस्ट होगा। अगर सच तो केस दुर्घटना माना जा सकता। लेकिन रैश ड्राइविंग चार्ज बरकरार। परिवार ने ओवरस्पीडिंग नकारा।
कानून का राज या अमीरों की मनमानी?
ये केस दिखाता है कि पैसे वाले कैसे बचने की कोशिश करते। मोहन का स्टेटमेंट, बाउंसर भागना, देरी से गिरफ्तारी। लेकिन CCTV ने पोल खोल दी। जनता गुस्से में। सोशल मीडिया पर #JusticeForVictims ट्रेंड। पुलिस को जल्द चार्जशीट दाखिल करनी होगी। अगर शिवम दोषी तो सख्त सजा मिलनी चाहिए।
अमीरों की लग्ज़री कारें शहरों में खतरा
भारत के शहरों में लैम्बो, फरारी जैसी कारें बढ़ रही। लेकिन सड़कें तैयार नहीं। स्पीड लिमिट, ट्रेनिंग ज़रूरी। ऐसे हादसे निर्दोषों की जान लेते। कानपुर के बाद दिल्ली, मुंबई में भी अलर्ट। सरकार को सुपरकार रूल्स सख्त करने चाहिए। टैक्सपेयर सड़क सुरक्षा माँग रहा।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: कानपुर लैम्बो क्रैश कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: 8 फरवरी 2026 को दोपहर 3:15 बजे ग्वालटोली VIP रोड पर। कार ने ई-रिक्शा, बाइक ठोकी और खंभे से टकराई। 6 लोग घायल। - प्रश्न: मोहन ने क्या दावा किया?
उत्तर: मोहन बोला कि वो ड्राइविंग कर रहा था, शिवम को दौरा पड़ा, वो गिरे तो कार बेकाबू हो गई। फिर शिवम को ड्राइवर सीट पर शिफ्ट किया। - प्रश्न: पुलिस का क्या कहना है?
उत्तर: CCTV, गवाह और वीडियो से शिवम ही ड्राइवर था। मोहन का सरेंडर खारिज, कार फोरेंसिक में। - प्रश्न: शिवम को कब गिरफ्तार किया गया?
उत्तर: 11 फरवरी को दिल्ली अस्पताल से। कुछ घंटों में बेल मिल गई। परिवार का एपिलेप्सी क्लेम। - प्रश्न: कार की कीमत और स्पेसिफिकेशन क्या?
उत्तर: लैम्बोर्गिनी रेवुएल्टो, 10 करोड़+, 1000 HP, टॉप स्पीड 350 kmph। ब्लैक बॉक्स जांच होगी।
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