12 फरवरी 2026 को 10 ट्रेड यूनियनों का 24 घंटे भारत बंद केरल में पूरी तरह बंद बन गया। शशि थरूर ने इसे मिलिटेंट यूनियनिज़्म बताया, सत्येशान ने पूछा क्यों दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं होता।
क्या केरल में यूनियनिज़्म ने उद्योग भगाए? थरूर का तीखा तंज और सत्येशान का सवाल
12 फरवरी 2026 को भारत बंद: केरल में क्यों पड़ा सबसे ज़्यादा असर?
कल रात 12 बजे से शुरू हुआ 24 घंटे का भारत बंद आज रात 12 बजे तक चलेगा। ये 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों का संयुक्त आह्वान था – AITUC, CITU, INTUC, HMS, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC। लेकिन पूरे देश में इसका असर एक समान नहीं दिखा। खासकर केरल में ये पूरी तरह “कुल बंद” बन गया – दुकानें, बाज़ार, सरकारी दफ्तर, बैंक, ट्रांसपोर्ट सब ठप।
KSRTC बसें, ऑटो-टैक्सी, लॉरी वाले सड़कों पर नहीं निकले। रेलवे और एयरपोर्ट कर्मचारी भी शामिल हुए। स्कूल-कॉलेज बंद, IT और प्लांटेशन यूनिट्स भी शटर डाउन। दूसरे राज्यों में – जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक या दिल्ली – ज़िंदगी लगभग सामान्य चली।
शशि थरूर का तंज: मिलिटेंट यूनियनिज़्म ने केरल को बंधक बना लिया
थिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने X (पूर्व ट्विटर) पर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने लिखा, “ये भारत बंद नहीं, महज़ एक और केरल बंद है। बाकी भारत ऐसे ज़बरदस्ती के बंद से आगे निकल चुका है, लेकिन केरल अल्पसंख्यक यूनियनों की संगठित तानाशाही का बंधक बना हुआ है।”
थरूर ने कहा कि हड़ताल का अधिकार है, लेकिन दूसरे लोगों पर बंदी थोपने का नहीं। “हमने मिलिटेंट यूनियनिज़्म से उद्योग भगा दिए, अब ये पुरानी मसल पावर से लोगों को घरों में कैदी बना रहे हैं, दुकानदारों को शटर गिराने पर मजबूर कर रहे।” उन्होंने केरल की छवि खराब होने की बात कही – “मॉडर्न इनवेस्टर-फ्रेंडली जगह बनने का सपना पुराने तरीकों से कैसे पूरा होगा?”
वी डी सत्येशान का सवाल: दूसरे राज्यों में क्यों नहीं होता ऐसा?
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सत्येशान ने कोझिकोड में UDF की यात्रा के दौरान मीडिया से कहा, “राष्ट्रीय हड़ताल के नाम पर केरल में ही क्यों कुल बंद? तमिलनाडु में तो पता ही नहीं चलता, कर्नाटक-महाराष्ट्र में ज़िंदगी चलती रहती है।” उन्होंने यूनियनों की मांगों का समर्थन किया, लेकिन तरीके को पुराना बताया।
सत्येशान ने सार्वजनिक बहस की मांग की – “ये आउटडेटेड तरीका बंद होना चाहिए।” ये बयान LDF सरकार पर तंज था, जो यूनियनों से करीब मानी जाती है।
राहुल गांधी का समर्थन, लेकिन पार्टी में मतभेद?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बंद का समर्थन किया। लेकिन थरूर-सत्येशान जैसे स्थानीय नेता असहमत दिखे। ये कांग्रेस के अंदर की खींचतान दिखाता है – नेशनल लेवल पर यूनियनों के साथ खड़े हों, लेकिन लोकल लेवल पर केरल की अर्थव्यवस्था की चिंता।
राहुल ने X पर लिखा कि यूनियनों की मांगें जायज़ हैं – लेबर कोड्स वापस लो, PSU प्राइवेटाइज़ेशन रोकें। लेकिन थरूर ने लोकल इश्यूज़ पर फोकस किया।
यूनियनों की 17 मांगें: बंद का क्या था मकसद?
10 यूनियनों ने 17-सूत्री चार्टर जारी किया था। मुख्य मांगें – चार लेबर कोड्स वापस लो, PSU-बैंक प्राइवेटाइज़ेशन रोकें, MGNREGA को 200 दिन तक बढ़ाओ, न्यूनतम वेतन 26 हज़ार करो, कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम बंद करो। इसके अलावा हेल्थ-एजुकेशन में ज़्यादा खर्च, फ्री राशन-पेंशन बढ़ाओ।
यूनियन लीडर्स का दावा – 25 करोड़ वर्कर्स शामिल होंगे। लेकिन केरल में LDF सपोर्ट से ये सबसे तीव्र दिखा।
केरल में बंद का पूरा असर: कौन-कौन सी सर्विसेज़ ठप?
केरल में सुबह से ही दुकानें बंद, बाज़ार सूने। KSRTC बसें 90% बंद, प्राइवेट बसें भी कम चलीं। ऑटो-टैक्सी यूनियन ने फुल पार्टिसिपेशन किया। सरकारी दफ्तर आधे खाली, PSB बैंक ब्रांचेज़ बंद। स्कूल-कॉलेज छुट्टी, IT पार्क्स में भी हड़ताल।
पोर्ट्स, रेलवे, डिफेंस में पार्शल इफेक्ट। हॉस्पिटल्स, इमरजेंसी सर्विसेज़ चलीं। स्ट्रीट वेंडर्स, गिग वर्कर्स, हेडलोड वर्कर्स ने भी हिस्सा लिया।
दूसरे राज्यों में कैसा रहा?
तमिलनाडु में मामूली असर – बसें चलीं, स्कूल खुले। कर्नाटक में IT सिटी होने से ज़्यादा इफेक्ट नहीं। दिल्ली-NCR में प्रोटेस्ट हुए लेकिन ज़िंदगी सामान्य। ओडिशा-असम में मीडियम इंपैक्ट। कुल मिलाकर “फ्लॉप शो” जैसा दिखा, सिवाय केरल के।
मिलिटेंट यूनियनिज़्म: केरल की पुरानी बीमारी?
थरूर ने इसे “एंटीडिलुवियन मसल पावर” कहा – यानी पुराने ज़माने की ताकत का इस्तेमाल। केरल में यूनियनों का इतिहास मज़बूत है, लेकिन आलोचक कहते हैं इससे निवेश भागता है। उद्योगपति केरल से तमिलनाडु-कर्नाटक शिफ्ट हो जाते हैं क्योंकि हड़तालें ज़्यादा।
सत्येशान ने कहा, “ये तरीका बदलो, पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन चलाओ।” BJP के राजीव चंद्रशेखर जैसे नेता भी LDF पर हमला करते रहे।
क्या बदलेगा आगे? बहस की ज़रूरत
थरूर-सत्येशान की आलोचना से केरल में बंद-हड़ताल पर नई बहस छिड़ गई। यूनियन लीडर्स कहते हैं – ये लोकतांत्रिक हक है। लेकिन क्रिटिक्स पूछते हैं – दूसरे राज्यों के कामगारों का हक क्या? केरल युवाओं को नौकरियाँ चाहिए, निवेश चाहिए, पुराने बंद से क्या मिलेगा?
कांग्रेस के ये बयान LDF को कठघरे में ला रहे। आने वाले चुनावों में ये इश्यू बड़ा हो सकता। कुल मिलाकर भारत बंद ने केरल को आईना दिखाया – प्रोटेस्ट ज़रूरी, लेकिन बिना दूसरों को बंधक बनाए।
FAQs (Hindi)
12 फरवरी 2026 को भारत बंद: केरल में क्यों पड़ा सबसे ज़्यादा असर?
कल रात 12 बजे से शुरू हुआ 24 घंटे का भारत बंद आज रात 12 बजे तक चलेगा। ये 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों का संयुक्त आह्वान था – AITUC, CITU, INTUC, HMS, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC। लेकिन पूरे देश में इसका असर एक समान नहीं दिखा। खासकर केरल में ये पूरी तरह “कुल बंद” बन गया – दुकानें, बाज़ार, सरकारी दफ्तर, बैंक, ट्रांसपोर्ट सब ठप।
KSRTC बसें, ऑटो-टैक्सी, लॉरी वाले सड़कों पर नहीं निकले। रेलवे और एयरपोर्ट कर्मचारी भी शामिल हुए। स्कूल-कॉलेज बंद, IT और प्लांटेशन यूनिट्स भी शटर डाउन। दूसरे राज्यों में – जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक या दिल्ली – ज़िंदगी लगभग सामान्य चली।
शशि थरूर का तंज: मिलिटेंट यूनियनिज़्म ने केरल को बंधक बना लिया
थिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने X (पूर्व ट्विटर) पर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने लिखा, “ये भारत बंद नहीं, महज़ एक और केरल बंद है। बाकी भारत ऐसे ज़बरदस्ती के बंद से आगे निकल चुका है, लेकिन केरल अल्पसंख्यक यूनियनों की संगठित तानाशाही का बंधक बना हुआ है।”
थरूर ने कहा कि हड़ताल का अधिकार है, लेकिन दूसरे लोगों पर बंदी थोपने का नहीं। “हमने मिलिटेंट यूनियनिज़्म से उद्योग भगा दिए, अब ये पुरानी मसल पावर से लोगों को घरों में कैदी बना रहे हैं, दुकानदारों को शटर गिराने पर मजबूर कर रहे।” उन्होंने केरल की छवि खराब होने की बात कही – “मॉडर्न इनवेस्टर-फ्रेंडली जगह बनने का सपना पुराने तरीकों से कैसे पूरा होगा?”
वी डी सत्येशान का सवाल: दूसरे राज्यों में क्यों नहीं होता ऐसा?
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सत्येशान ने कोझिकोड में UDF की यात्रा के दौरान मीडिया से कहा, “राष्ट्रीय हड़ताल के नाम पर केरल में ही क्यों कुल बंद? तमिलनाडु में तो पता ही नहीं चलता, कर्नाटक-महाराष्ट्र में ज़िंदगी चलती रहती है।” उन्होंने यूनियनों की मांगों का समर्थन किया, लेकिन तरीके को पुराना बताया।
सत्येशान ने सार्वजनिक बहस की मांग की – “ये आउटडेटेड तरीका बंद होना चाहिए।” ये बयान LDF सरकार पर तंज था, जो यूनियनों से करीब मानी जाती है।
राहुल गांधी का समर्थन, लेकिन पार्टी में मतभेद?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बंद का समर्थन किया। लेकिन थरूर-सत्येशान जैसे स्थानीय नेता असहमत दिखे। ये कांग्रेस के अंदर की खींचतान दिखाता है – नेशनल लेवल पर यूनियनों के साथ खड़े हों, लेकिन लोकल लेवल पर केरल की अर्थव्यवस्था की चिंता।
राहुल ने X पर लिखा कि यूनियनों की मांगें जायज़ हैं – लेबर कोड्स वापस लो, PSU प्राइवेटाइज़ेशन रोकें। लेकिन थरूर ने लोकल इश्यूज़ पर फोकस किया।
यूनियनों की 17 मांगें: बंद का क्या था मकसद?
10 यूनियनों ने 17-सूत्री चार्टर जारी किया था। मुख्य मांगें – चार लेबर कोड्स वापस लो, PSU-बैंक प्राइवेटाइज़ेशन रोकें, MGNREGA को 200 दिन तक बढ़ाओ, न्यूनतम वेतन 26 हज़ार करो, कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम बंद करो। इसके अलावा हेल्थ-एजुकेशन में ज़्यादा खर्च, फ्री राशन-पेंशन बढ़ाओ।
यूनियन लीडर्स का दावा – 25 करोड़ वर्कर्स शामिल होंगे। लेकिन केरल में LDF सपोर्ट से ये सबसे तीव्र दिखा।
केरल में बंद का पूरा असर: कौन-कौन सी सर्विसेज़ ठप?
केरल में सुबह से ही दुकानें बंद, बाज़ार सूने। KSRTC बसें 90% बंद, प्राइवेट बसें भी कम चलीं। ऑटो-टैक्सी यूनियन ने फुल पार्टिसिपेशन किया। सरकारी दफ्तर आधे खाली, PSB बैंक ब्रांचेज़ बंद। स्कूल-कॉलेज छुट्टी, IT पार्क्स में भी हड़ताल।
पोर्ट्स, रेलवे, डिफेंस में पार्शल इफेक्ट। हॉस्पिटल्स, इमरजेंसी सर्विसेज़ चलीं। स्ट्रीट वेंडर्स, गिग वर्कर्स, हेडलोड वर्कर्स ने भी हिस्सा लिया।
दूसरे राज्यों में कैसा रहा?
तमिलनाडु में मामूली असर – बसें चलीं, स्कूल खुले। कर्नाटक में IT सिटी होने से ज़्यादा इफेक्ट नहीं। दिल्ली-NCR में प्रोटेस्ट हुए लेकिन ज़िंदगी सामान्य। ओडिशा-असम में मीडियम इंपैक्ट। कुल मिलाकर “फ्लॉप शो” जैसा दिखा, सिवाय केरल के।
मिलिटेंट यूनियनिज़्म: केरल की पुरानी बीमारी?
थरूर ने इसे “एंटीडिलुवियन मसल पावर” कहा – यानी पुराने ज़माने की ताकत का इस्तेमाल। केरल में यूनियनों का इतिहास मज़बूत है, लेकिन आलोचक कहते हैं इससे निवेश भागता है। उद्योगपति केरल से तमिलनाडु-कर्नाटक शिफ्ट हो जाते हैं क्योंकि हड़तालें ज़्यादा।
सत्येशान ने कहा, “ये तरीका बदलो, पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन चलाओ।” BJP के राजीव चंद्रशेखर जैसे नेता भी LDF पर हमला करते रहे।
क्या बदलेगा आगे? बहस की ज़रूरत
थरूर-सत्येशान की आलोचना से केरल में बंद-हड़ताल पर नई बहस छिड़ गई। यूनियन लीडर्स कहते हैं – ये लोकतांत्रिक हक है। लेकिन क्रिटिक्स पूछते हैं – दूसरे राज्यों के कामगारों का हक क्या? केरल युवाओं को नौकरियाँ चाहिए, निवेश चाहिए, पुराने बंद से क्या मिलेगा?
कांग्रेस के ये बयान LDF को कठघरे में ला रहे। आने वाले चुनावों में ये इश्यू बड़ा हो सकता। कुल मिलाकर भारत बंद ने केरल को आईना दिखाया – प्रोटेस्ट ज़रूरी, लेकिन बिना दूसरों को बंधक बनाए।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: भारत बंद कब और किसने बुलाया?
उत्तर: 12 फरवरी 2026 को 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने 24 घंटे का बंद बुलाया, मंगलवार रात 12 से बुधवार रात 12 तक। - प्रश्न: शशि थरूर ने क्या कहा केरल बंद पर?
उत्तर: इसे मिलिटेंट यूनियनिज़्म बताया, कहा केरल अल्पसंख्यक यूनियनों का बंधक है, उद्योग भागे और अब लोग घर कैदी। - प्रश्न: केरल में बंद से क्या-क्या बंद रहा?
उत्तर: दुकानें, बैंक, सरकारी दफ्तर, KSRTC बसें, ऑटो-टैक्सी, स्कूल, IT यूनिट्स – लगभग सब कुछ ठप। - प्रश्न: वी डी सत्येशान ने क्या सवाल उठाया?
उत्तर: पूछा कि राष्ट्रीय हड़ताल के नाम पर केरल में ही क्यों कुल बंद? दूसरे राज्यों जैसे TN, Karnataka में ऐसा क्यों नहीं। - प्रश्न: यूनियनों की मुख्य मांगें क्या हैं?
उत्तर: लेबर कोड्स वापस लो, PSU प्राइवेटाइज़ेशन रोकें, MGNREGA 200 दिन, न्यूनतम वेतन बढ़ाओ, कॉन्ट्रैक्ट बंद करो।
- 10 central trade unions strike
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