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Krishna Kurma Dwadashi 2026:कछुए अवतार का रहस्य,Vrat से मिलेगी Dhan-समृद्धि?

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Krishna Kurma Dwadashi 2026
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Krishna Kurma Dwadashi 2026: 15 जनवरी को तिथि, पारण समय (16 जनवरी सुबह 7:15-9:21), पूजा विधि, समुद्र मंथन कथा और लाभ। विष्णु कूर्म अवतार व्रत से शांति, धन, पाप नाश।

Krishna Kurma Dwadashi 2026: तिथि, समय, पूजा विधि, महत्व और लाभ

भाइयों-बहनों, हिंदू धर्म में व्रत-उपवास का खास महत्व है, और कृष्ण कूर्म द्वादशी ऐसा ही एक पावन दिन है। 15 जनवरी 2026 को माघ कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा होती है। यह व्रत स्थिरता, शांति और समृद्धि लाता है। Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, पारण समय 16 जनवरी सुबह 7:15 से 9:21 तक है। समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा यह दिन पापों का नाश करता है। आइए, पूरी डिटेल में समझें।

कृष्ण कूर्म द्वादशी क्या है? पंचांग मुहूर्त
माघ महीने के कृष्ण पक्ष में द्वादशी – 15 जनवरी 2026। तिथि प्रारंभ: 14 जनवरी शाम, समाप्त 15 जनवरी रात। शुभ मुहूर्त: सुबह 6-10 बजे पूजा। पारण: अगले दिन 7:15-9:21 AM। यह तिथि विष्णु पूजा के लिए सर्वोत्तम। पुराणों में कहा गया – कूर्म अवतार ने मंदराचल को टिका कर अमृत मिलवाया। भारत में लाखों भक्त इस व्रत रखते हैं।

समुद्र मंथन की कथा: कूर्म अवतार का चमत्कार
देवता-असुर मिलकर क्षीर सागर मंथन कर रहे थे। मंदराचल डूबने लगा तो भगवान विष्णु कछुए रूप धरकर पीठ पर उठा लिया। वासुकि नाग रस्सी, अमृत निकला। पद्म पुराण कहता है – इस अवतार से स्थिरता का संदेश। कछुआ धीमा लेकिन अटल – जीवन का सबक। व्रत रखने से वैसा ही बल मिलता।

कृष्ण कूर्म द्वादशी का महत्व और लाभ

  • आध्यात्मिक: मन शांत, कर्म बंधन टूटे।
  • भौतिक: धन-धान्य, व्यापार स्थिर।
  • स्वास्थ्य: पाचन मजबूत, दीर्घायु।
  • परिवार: सुख-शांति।

स्क्रिप्चर्स के अनुसार, राजा-संतों ने कष्ट दूर किए। आज कल के तनाव में यह रीसेट बटन। ICMR जैसी स्टडीज नहीं, लेकिन योगा रिसर्च में फास्टिंग से मेंटल क्लैरिटी 30% बढ़ती।

पूजा विधि: स्टेप बाय स्टेप घर पर करें
सुबह उठकर स्नान।

  1. कलश स्थापना: जल भरें, कछुआ मूर्ति रखें।
  2. गणेश-लक्ष्मी पूजन: चंदन-फूल।
  3. कूर्म अवतार ध्यान: विष्णु सहस्रनाम पाठ।
  4. हवन: तिल-गुड़।
  5. दान: काला तिल, कछुआ आकृति भोजन।
    फलाहार: दूध-फल। शाम आरती।

मंत्र: ॐ कूर्मावताराय नमः। 108 बार।

व्रत नियम और पारण विधि
सूर्योदय से पारण तक फलाहार। ब्राह्मण को दान। पारण में सात्विक भोजन – खीर, हलवा। गर्भवती/बीमार फल लें।

नीचे पूजा सामग्री तालिका:

सामग्रीमात्रा/उपयोगमहत्व
कछुआ मूर्ति1अवतार प्रतीक
चंदन-कुमकुमथोड़ाशुभता
तिल-गुड़108 ग्रामहवन
दूध-फलफलाहारव्रत ऊर्जा
काला कपड़ादानपितर तृप्ति

आयुर्वेदिक नजरिया: व्रत के स्वास्थ्य लाभ
आयुर्वेद में कूर्म मुद्रा योगा – स्थिरता। व्रत से डिटॉक्स। पित्त दोष संतुलन। NIH स्टडीज: फास्टिंग से ऑटोफैगी बढ़ती, सेल रिपेयर।

घरेलू उपाय और टोटके

  • कछुआ शंख फूंकें।
  • पीपल को जल दें।
  • काले तिल दान।

आधुनिक जीवन में कूर्म द्वादशी
ऑफिस स्ट्रेस में यह व्रत ग्राउंडिंग देता। ट्रंप इकोनॉमी चेंजेस में स्थिरता चाहिए।

विशेष टिप्स महिलाओं/बच्चों के लिए
महिलाएं: सौभाग्य। बच्चे: पढ़ाई फोकस।

FAQs

  1. कृष्ण कूर्म द्वादशी 2026 कब है?
    15 जनवरी, पारण 16 जनवरी सुबह 7:15-9:21।
  2. व्रत कैसे तोड़ें?
    सात्विक भोजन, दान के बाद।
  3. कूर्म अवतार क्यों महत्वपूर्ण?
    समुद्र मंथन स्थिरता के लिए।
  4. कौन न रखें व्रत?
    बीमार, गर्भवती – फलाहार।
  5. मुख्य लाभ क्या?
    शांति, धन, स्वास्थ्य।
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