अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-US ट्रेड डील को हिस्टोरिक बताया, कहा इससे कोयला निर्यात ड्रामेटिकली बढ़ेगा। भारत का एनर्जी पॉलिसी नेशनल इंटरेस्ट पर, MEA ने कहा डाइवर्सिफिकेशन जरूरी।
ट्रंप की ‘चैंपियन ऑफ कोल’ स्पीच: भारत-US FTA से US एनर्जी एक्सपोर्ट क्यों उछलेगा?
ट्रंप ने भारत-US ट्रेड डील को क्यों बताया हिस्टोरिक?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चैंपियन ऑफ कोल इवेंट में भारत के साथ हुए ट्रेड डील को हिस्टोरिक करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया का नंबर वन एनर्जी प्रोड्यूसर बन चुका है और अब मासिव एनर्जी एक्सपोर्टर की ओर बढ़ रहा है। जापान, कोरिया और भारत जैसे देशों के साथ हाल के डील्स से US कोल एक्सपोर्ट्स ड्रामेटिकली बढ़े हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कोयला दुनिया का सबसे बेहतरीन क्वालिटी वाला है। ये डील दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करेगी।
ये ट्रेड डील कब और कैसे हुई?
फरवरी 2026 के शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच ये इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट हुआ, जो फुल FTA की नींव रखेगा। US ने भारत से आने वाले सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया। बदले में भारत US एनर्जी, एयरक्राफ्ट और टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स ज्यादा खरीदेगा। बाइलेटरल ट्रेड अभी 200 बिलियन डॉलर से ऊपर है और ये डील इसे और बढ़ाएगी। इकोनॉमिस्ट्स कहते हैं कि इससे भारत का US के साथ ट्रेड सरप्लस कम हो सकता है। ये दोनों दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी के बीच स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को मजबूत करेगा।
ट्रंप का कोल एक्सपोर्ट पर फोकस क्यों?
ट्रंप ने स्पीच में जोर दिया कि अमेरिका अब एनर्जी सुपरपावर है और भारत जैसे एनर्जी-डेफिशिएंट देशों को कोयला सप्लाई बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में ये डील्स US कोल इंडस्ट्री को रिवाइव कर रही हैं। अमेरिकी कोयला न सिर्फ सस्ता बल्कि हाई क्वालिटी का है, जो भारत की बढ़ती एनर्जी डिमांड पूरी कर सकता है। ये अमेरिकी माइनिंग कम्युनिटीज़ के लिए जॉब्स लाएगा। ट्रंप इसे अपनी इकोनॉमिक स्ट्रेंथ का प्रूफ बता रहे हैं। भारत के लिए ये डाइवर्सिफिकेशन का मौका है।
भारत की एनर्जी पॉलिसी पर MEA का स्टैंड क्या?
फॉरेन सेक्रेटरी विक्रम मिस्री ने 9 फरवरी को कहा कि भारत की एनर्जी सोर्सिंग नेशनल इंटरेस्ट से गाइड होगी। उन्होंने साफ किया कि ऑयल कंपनियाँ मार्केट कंडीशंस, उपलब्धता, रिस्क, कॉस्ट और लॉजिस्टिक्स देखकर फैसला लेती हैं। भारत नेट इंपोर्टर है, इसलिए एडेक्वेट सप्लाई, फेयर प्राइसिंग और रिलायबिलिटी पर फोकस। रूस से ऑयल कटबैक की रिपोर्ट्स पर मिस्री ने कहा कि डाइवर्सिफिकेशन जरूरी है लेकिन किसी एक सोर्स पर डिपेंडेंसी नहीं। ग्लोबल अनिश्चितताओं में भारत एनर्जी मार्केट को स्टेबलाइज करता है। ये पॉलिसी कंज्यूमर्स के हित में है।
US कोल इंपोर्ट्स भारत के लिए फायदेमंद क्यों?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला खपत करने वाला देश है, लेकिन घरेलू प्रोडक्शन की कमी से 20-25% इंपोर्ट करता है। US कोयला साफ और हाई कैलोरी वैल्यू वाला है, जो पावर प्लांट्स के लिए परफेक्ट। FTA से टैरिफ कम होने से कीमतें घटेंगी और सप्लाई चेन मजबूत होगी। इससे भारत की एनर्जी सिक्योरिटी बढ़ेगी और इन्फ्लेशन कंट्रोल रहेगा। US के साथ डिफेंस कोऑपरेशन भी बढ़ेगा। लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि ज्यादा इंपोर्ट से ट्रेड बैलेंस प्रभावित हो सकता है।
ट्रेड डील के ब्रॉडर इम्पैक्ट्स क्या?
ये डील सिर्फ कोयला तक सीमित नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, ICT और डिफेंस में भी एक्सपैंशन लाएगी। US का एक्जीक्यूटिव ऑर्डर कहता है कि भारत ने रूसी ऑयल डायरेक्ट/इनडायरेक्ट कम करने का कमिटमेंट किया। बदले में पेनल्टी टैरिफ हटाया गया। भारत ने डाइवर्सिफाई करने का वादा किया ताकि सप्लाई स्टेबल रहे। ये ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारत की भूमिका मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच ट्रस्ट बढ़ेगा। लॉन्ग टर्म में 500 बिलियन US प्रोडक्ट्स खरीद का लक्ष्य है।
भारत-US रिश्तों में नया अध्याय?
ट्रंप के रीइलेक्शन के बाद ये डील स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को नई ऊँचाई देगी। पहले ट्रेड टेंशन्स थे, अब रेसिप्रोकल टैरिफ कट्स से विं-विं सिचुएशन। भारत US को मार्केट एक्सेस देगा, US भारत को एनर्जी सप्लाई। ग्लोबल सप्लाई चेन मजबूत होगी। इकोनॉमिस्ट्स कहते हैं कि ये भारत के डेवलपिंग इकोनॉमी स्टेटस को सपोर्ट करेगा। लेकिन नेशनल इंटरेस्ट प्रायोरिटी रहेगा। आने वाले महीनों में फुल FTA की उम्मीद।
रूस ऑयल पर विवाद क्यों?
ट्रंप ने कहा था कि भारत ने रूसी क्रूड कम करने का वादा किया। मिस्री ने इसे नेशनल इंटरेस्ट से लिंक किया, बिना कन्फर्म किए। भारत रूस से सस्ता ऑयल लेता रहा, लेकिन US प्रेशर बढ़ा। अब डाइवर्सिफिकेशन पर जोर, मल्टीपल सोर्सेज से सिक्योरिटी। ये ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स का हिस्सा है। भारत न तो किसी पर डिपेंडेंट, न होगा। कंज्यूमर्स को सस्ता और रिलायबल एनर्जी मिले, यही लक्ष्य।
भारतीय उपभोक्ता को क्या फायदा?
एनर्जी प्राइस स्टेबल रहेंगी तो इन्फ्लेशन कंट्रोल में रहेगा। US कोयला सस्ता आएगा तो बिजली रेट्स पर असर पड़ेगा। डाइवर्सिफिकेशन से सप्लाई रिस्क कम। टेक्नोलॉजी इंपोर्ट्स से इंडस्ट्री बूस्ट। लेकिन ट्रेड डेफिसिट बढ़ने का खतरा। सरकार बैलेंस बनाएगी। लॉन्ग टर्म एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी।
क्या ये डील पूरी तरह अमल में आएगी?
इंटरिम एग्रीमेंट 2026 में फुल डील बनेगा। दोनों तरफ मॉनिटरिंग होगी। ट्रंप का फोकस US जॉब्स पर, भारत का एनर्जी सिक्योरिटी पर। अगर रूस ऑयल जारी रहा तो पेनल्टी का खतरा। लेकिन मिस्री ने साफ कहा – नेशनल इंटरेस्ट गाइड करेगा। ये डील दोनों के लिए विं है। ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन में अहम रोल।
FAQs (Hindi)
- प्रश्न: ट्रंप ने भारत-US ट्रेड डील को क्यों हिस्टोरिक कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि इससे US कोल एक्सपोर्ट्स ड्रामेटिकली बढ़ेंगे, अमेरिका नंबर वन एनर्जी प्रोड्यूसर और एक्सपोर्टर बनेगा। - प्रश्न: विक्रम मिस्री ने एनर्जी पॉलिसी पर क्या कहा?
उत्तर: नेशनल इंटरेस्ट गाइड करेगा, डाइवर्सिफिकेशन जरूरी – उपलब्धता, फेयर प्राइस, रिलायबिलिटी पर फोकस। - प्रश्न: US ने टैरिफ क्यों घटाए?
उत्तर: भारत से सामानों पर 50% से 18% किया, बदले में भारत US एनर्जी, टेक प्रोडक्ट्स ज्यादा खरीदेगा। - प्रश्न: भारत रूस ऑयल क्यों कम कर रहा?
उत्तर: MEA ने कन्फर्म नहीं किया, लेकिन डाइवर्सिफिकेशन और नेशनल इंटरेस्ट से सोर्सिंग होगी। - प्रश्न: ये डील भारत के लिए फायदेमंद कैसे?
उत्तर: सस्ता US कोयला, एनर्जी सिक्योरिटी बढ़ेगी, लेकिन ट्रेड बैलेंस का ध्यान रखना होगा।
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