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सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में निपटाए 75,000+ केस: US-UK से कहीं आगे, लेकिन पेंडेंसी का बोझ क्यों?

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Supreme Court India 2025 cases handled, SC 75000 cases
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सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में 75,000+ केस हैंडल किए, US-UK जैसे टॉप कोर्ट्स से कहीं ज्यादा। दिसंबर 2024 में 83,000 पेंडिंग थे। विशेषज्ञ मीडिएशन और जज बढ़ाने की सलाह। न्याय व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि! 

2025 में SC का कमाल: 75,000+ मुकदमे निपटे, लेकिन 83,000 पेंडिंग – न्याय की रफ्तार बढ़ेगी?

सुप्रीम कोर्ट की 2025 उपलब्धि: 75,000 से ज्यादा केस निपटाए, दुनिया के किसी टॉप कोर्ट से बेजोड़

2025 एक ऐसा साल रहा जब भारत का सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यक्षमता से दुनिया को चौंका दिया। पूरे साल में 75,000 से ज्यादा मुकदमों का निपटारा किया गया, जो अमेरिका या ब्रिटेन जैसे देशों के सर्वोच्च न्यायालयों से कहीं ज्यादा है। दिसंबर 2024 में 83,000 से ज्यादा केस पेंडिंग थे, फिर भी अदालत ने रिकॉर्ड डिस्पोजल रेट हासिल किया। विशेषज्ञों का कहना है कि मीडिएशन और जजों की संख्या बढ़ाने से पीछे अटके केस कम हो सकते हैं।

ये आंकड़े नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) और सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक डैशबोर्ड से लिए गए। सिविल केसों में 84.56% (लगभग 38,364) और क्रिमिनल में 95.14% (20,055) डिस्पोज्ड। कुल डिस्पोजल 58,419 से ऊपर, लेकिन संस्थापित केसों की भरमार से पेंडेंसी बढ़ी।

सुप्रीम कोर्ट का कार्यभार: आंकड़ों की कहानी

जनवरी 2025 में पेंडेंसी 82,445 से शुरू हुई। मई तक मामूली गिरावट आई (81,734), लेकिन जून में पार्शियल वर्किंग डेज की वजह से 85,204 हो गई। जुलाई में 87,115 का पीक। दिसंबर 2024 अंत में 82,972। 2025 में संस्थापित केस 75,000+ से ज्यादा, डिस्पोजल भी मजबूत लेकिन बैलेंस न होने से पेंडेंसी बढ़ी।

सिविल vs क्रिमिनल ब्रेकडाउन (2025 अनुमानित):

प्रकारसंस्थापित केसडिस्पोज्ड (%)पेंडिंग योगदान
सिविल~45,00084.56% (38,364)60%
क्रिमिनल~21,00095.14% (20,055)40%
कुल75,000+~88%83,000+

वैश्विक तुलना: भारत SC सबसे व्यस्त

अमेरिका का SCOTUS सालाना 70-80 केस सुनता (चुनिंदा), UK सुप्रीम कोर्ट ~100। भारत का SC 75,000+ हैंडल – वजह व्यापक ज्यूरिस्डिक्शन। PIL, अपीलें, मूल क्षेत्राधिकार सब एक साथ। US में फेडरल मैटर्स, UK में अपील पैनल। भारत का यूनिफाइड सिस्टम बोझ बढ़ाता।

कोर्टसालाना केस (2025/हालिया)जज संख्यापेंडेंसी
भारत SC75,000+3483,000+
US SCOTUS70-809न्यूनतम
UK Supreme~10012कम

पेंडेंसी की जड़ें: क्यों नहीं कम हो रही?

जज-पॉपुलेशन रेशियो 21/मिलियन (ग्लोबल न्यूनतम)। लिटिगेशन बढ़ी – PIL, सोशल जस्टिस केस। अधीनस्थ अदालतों में 5 करोड़+, HC में 62 लाख। SC में 72% एडमिशन मैटर्स।

विशेषज्ञ सुझाव:

  • मीडिएशन बढ़ाएं: कोर्ट-अनैक्स्ड, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म। UK-इटली मॉडल अपनाएं।
  • जज बढ़ाएं: 50/मिलियन लक्ष्य (लॉ कमीशन 1987)।
  • e-कोर्ट्स: SUPACE जैसे AI टूल्स।
  • ADR: आर्बिट्रेशन, लोक अदालतें।

सुप्रीम कोर्ट के प्रयास: प्रोजेक्ट 75

CJI संजीव खन्ना ने मिसलेनियस मैटर्स पर फोकस किया। 2025 में डिस्पोजल रेट ऊंचा रहा। NJDG रीयल-टाइम मॉनिटरिंग। लेकिन संस्थापन बढ़ने से चुनौती।

भारतीय न्याय व्यवस्था: बड़ी तस्वीर

कुल पेंडेंसी 4.7 करोड़+ अधीनस्थ अदालतों में। SC टॉप कोर्ट के तौर पर लीडरशिप ले रहा। 2023-24 रिपोर्ट: 72% पेंडिंग एडमिशन। मीडिएशन MCI से रेगुलेट करें।

2025 की उपलब्धि: चुनौतियों के बीच रोशनी

75,000+ केस निपटाना गजब का। लेकिन पेंडेंसी कम करने के लिए सिस्टमिक चेंजेस जरूरी। सरकार-न्यायपालिका मिलकर काम करें तो न्याय जल्दी पहुंचेगा।

5 FAQs

  1. सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में कितने केस हैंडल किए?
    75,000 से ज्यादा, जिसमें सिविल 38,000+ और क्रिमिनल 20,000+ डिस्पोज्ड।
  2. दिसंबर 2024 में SC में कितने केस पेंडिंग थे?
    83,000 से ज्यादा।
  3. भारत SC अन्य देशों से कैसे अलग?
    75,000+ केस सालाना vs US के 80, UK के 100 – व्यापक ज्यूरिस्डिक्शन।
  4. पेंडेंसी कम करने का समाधान?
    मीडिएशन, जज बढ़ाना, e-कोर्ट्स, ADR।
  5. जज-पॉपुलेशन रेशियो क्या?
    21/मिलियन – लक्ष्य 50।

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