डिंडोरी (मध्य प्रदेश) । मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले की जनपद पंचायत एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति पर बड़ा विवाद सामने आया है। सूचना के अधिकार में मिली जानकारी और ज़मीनी हकीकत में बड़ा विरोधाभास दिख रहा है। आरोप है कि बिना नियुक्ति दस्तावेज के वर्षों से एक कर्मचारी महत्वपूर्ण शाखाओं में कार्य कर रहा है और भुगतान भी हो रहा है।आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह पूरा मामला?
डिंडोरी जनपद पंचायत में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल की नियुक्ति को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। RTI के तहत मांगी गई जानकारी में प्रभारी सीईओ प्रमोद ओझा ने बताया कि जनपद पंचायत में किसी भी कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति नहीं की गई है। उनका कहना है कि पूर्व जनपद अध्यक्ष के मौखिक आदेश पर पुरुषोत्तम चंदेल को रखा गया है।
इस मामले में जब पूर्व जनपद अध्यक्षों से बात की गई तो उनका साफ तौर पर कहना है कि कंप्यूटर ऑपरेटर की न्युक्ति को लेकर उन्होंने न तो कोई लिखित आदेश दिया है और न मौखिक।
अब सवाल यह है कि जब नियुक्ति ही नहीं हुई, तो वर्ष 2012 से अब तक पुरुषोत्तम चंदेल महत्वपूर्ण शाखाओं का कार्य किस आधार पर कर रहे हैं?
विभागीय सूत्रों के अनुसार वर्ष 2018 से 31 मार्च 2021 तक
मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल
की विवाह सहायता योजना में गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। कहा जा रहा है कि पंचायतवार लाभार्थी सूची और स्वीकृत नोटशीट की जांच होने पर कई नाम सामने आ सकते हैं।
सूत्रों का दावा है कि मामले को दबाने के लिए एक खंड पंचायत अधिकारी को नियमों के विपरीत जनपद पंचायत डिंडोरी का प्रभारी सीईओ बनाया गया और पूर्व में की गई जांच में संबंधित कर्मचारी को दोषमुक्त घोषित कर दिया गया।
सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार कंप्यूटर ऑपरेटर को जनपद पंचायत की स्वयं की आय से मजदूरी के आधार पर भुगतान किया जाता है, लेकिन कथित तौर पर बिल-वाउचर उपलब्ध नहीं हैं।
यदि RTI में दी गई जानकारी सही है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल है और यदि जानकारी अधूरी या भ्रामक है, तो यह सूचना के अधिकार कानून की भावना के खिलाफ है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करती है।
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