वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हाल के व्यापार समझौतों के बाद भारत को लगभग 70% वैश्विक GDP और दुनिया के दो-तिहाई व्यापार वाले बाजारों में प्रेफरेंशियल एक्सेस मिला है। Export Promotion Mission के तहत 7 नई पहलें MSMEs, किसानों, मछुआरों व निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा, फाइनेंस और प्रक्रियाएं आसान करने पर केंद्रित हैं।
भारत के लिए नए बाजारों के दरवाजे: 9 FTAs से 38 विकसित अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच, अब MSMEs पर फोकस
भारत के लिए बड़े बाजार “ओपन”: पीयूष गोयल का दावा—70% ग्लोबल GDP और दुनिया के 2/3 ट्रेड तक प्रेफरेंशियल एक्सेस
केंद्र सरकार ने एक्सपोर्ट और ग्लोबल मार्केट एक्सेस को लेकर एक बड़ा दावा किया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 20 फरवरी को कहा कि हाल के वर्षों में किए गए कई व्यापार समझौतों के बाद भारत को ऐसे बाजारों में प्रेफरेंशियल (वरीयता आधारित) पहुंच मिल चुकी है, जो लगभग 70% वैश्विक GDP और दुनिया के दो-तिहाई व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। गोयल ने यह बात Export Promotion Mission (EPM) के तहत 7 नई पहलों की लॉन्चिंग के मौके पर कही।
गोयल के मुताबिक, भारत ने 9 Free Trade Agreements (FTAs) के जरिए 38 विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मार्केट एक्सेस सुरक्षित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इन समझौतों में अमेरिका के साथ Bilateral Trade Agreement का “पहला ट्रांश” भी शामिल है। मंत्री के अनुसार, ये ट्रेड एंगेजमेंट भारत के ग्लोबल इंटीग्रेशन में “टर्निंग पॉइंट” हैं और सरकार का फोकस निर्यातकों के साथ-साथ किसानों, मछुआरों और MSMEs (सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों) को उन्नत बाजारों में ज्यादा अवसर दिलाने पर है।
Export Promotion Mission (EPM) क्या है और क्यों चर्चा में है?
Export Promotion Mission एक सरकारी पहल है, जिसे Department of Commerce लीड कर रहा है। इसका मकसद केवल बड़े निर्यातकों की मदद करना नहीं, बल्कि छोटे कारोबारों और नए उद्यमियों तक ट्रेड के फायदे पहुंचाना है। गोयल ने कहा कि EPM की नई व्यवस्थाएं उन “स्ट्रक्चरल चुनौतियों” को सॉल्व करने के लिए हैं, जिनकी वजह से MSMEs ग्लोबली स्केल नहीं कर पाते—जैसे फाइनेंस की दिक्कत, गुणवत्ता मानक, जटिल प्रक्रियाएं, और अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटरी नॉर्म्स को पूरा करने की चुनौती।
सरकार का तर्क यह है कि अगर भारत को निर्यात में स्थायी और व्यापक वृद्धि करनी है, तो देश की सप्लाई साइड—यानी उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और कंप्लायंस—को मजबूत बनाना होगा। इसी दिशा में EPM के तहत नए कदम घोषित किए गए हैं, ताकि “इंक्लूसिव” और “ब्रॉड-बेस्ड” एक्सपोर्ट ग्रोथ हो सके।
“संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित, जहां ताकत वहां विस्तार”—गोयल की ट्रेड स्ट्रैटेजी
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत विकसित देशों के साथ बातचीत “कॉन्फिडेंस” के साथ कर रहा है। उनका कहना था कि सरकार एक तरफ संवेदनशील क्षेत्रों (sensitive sectors) को प्रोटेक्ट कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उन सेक्टर्स में बाजार खोलने पर जोर है जहां भारत के पास प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त (competitive advantage) है।
उन्होंने यह भी बताया कि 2022 के बाद भारत ने ट्रेड नेगोशिएशन को तेज किया, गुड्स, सर्विसेज और इन्वेस्टमेंट के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया, कंप्लायंस आवश्यकताओं को कम करने की कोशिश की और ease of doing business को बेहतर करने के लिए कानूनी सुधार किए। ये सब कदम मिलकर निर्यातकों के लिए रास्ता आसान बनाने की नीति का हिस्सा हैं।
EPM के तहत 7 नई पहलें: असल उद्देश्य क्या है?
गोयल ने जिन 7 नई “इंटरवेंशंस” का जिक्र किया, उनका फोकस कुछ बड़े लक्ष्यों पर बताया गया—MSMEs को ग्लोबली स्केल करने में मदद, प्रतिस्पर्धा (competitiveness) बढ़ाना, प्रक्रियाएं सरल करना और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप होने में सहयोग। मंत्री ने कहा कि मिशन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ट्रेड के लाभ छोटे व्यवसायों और उद्यमियों तक पहुंचे, नए प्रोडक्ट्स और नए मार्केट्स को बढ़ावा मिले, और एक्सपोर्ट इकोसिस्टम ज्यादा मजबूत बने।
सरकार के बताए फोकस एरिया में शामिल हैं:
- MSMEs के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण (streamlining).
- फाइनेंस तक बेहतर पहुंच (access to finance).
- क्वालिटी स्टैंडर्ड्स और टेस्टिंग/सर्टिफिकेशन क्षमता बढ़ाना.
- अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटरी नॉर्म्स को पूरा करने में सपोर्ट.
निर्यात के लिए ओवरसीज वेयरहाउसिंग: ‘भारत मार्ट’ जैसी पहलें क्यों अहम हैं?
गोयल ने बताया कि सरकार ओवरसीज वेयरहाउसिंग का दायरा बढ़ाने पर भी काम कर रही है। खबर के मुताबिक, ‘Bharat Mart in Dubai’ जैसी पहलें भारतीय कंपनियों को GCC, अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और यूरोप जैसे क्षेत्रों में बेहतर बाजार पहुंच देने के लिए बनाई जा रही हैं। इसका फायदा यह होता है कि भारतीय उत्पाद स्थानीय मांग के करीब स्टॉक किए जा सकते हैं, डिलीवरी समय घटता है और छोटे एक्सपोर्टर्स को भी विदेशी खरीदारों तक पहुंच आसान होती है।
इस तरह की वेयरहाउसिंग और “मार्केट-लिंक” पहलें खास तौर पर उन MSMEs के लिए उपयोगी मानी जाती हैं, जिनके पास विदेश में खुद का वितरण नेटवर्क बनाने के संसाधन नहीं होते। इसलिए सरकार इसे “इन्फ्रास्ट्रक्चर-बेस्ड एक्सपोर्ट प्रमोशन” की दिशा में कदम के रूप में पेश कर रही है।
G20 और ‘ग्लोबल शोकेस’ वाला तर्क
मंत्री ने भारत की हालिया G20 होस्टिंग का भी जिक्र किया और कहा कि इससे दुनिया के सामने भारत की आर्थिक ताकत और विविधता का प्रदर्शन हुआ। सरकार की नजर में यह “ग्लोबल ब्रांडिंग” भारत के लिए एक सकारात्मक बिंदु है, जो निवेश और व्यापार साझेदारी को आसान कर सकता है।
हालांकि, बाजार-खुलने के दावे का असली परीक्षण तब होगा जब निर्यातक, खासकर छोटे उद्यम, नए बाजारों में टिकाऊ रूप से प्रवेश कर पाएंगे। EPM की सफलता काफी हद तक इसी पर निर्भर करेगी कि स्थानीय स्तर पर प्रक्रियाएं कितनी सरल होती हैं और फाइनेंस/क्वालिटी सपोर्ट कितनी तेजी से जमीन पर पहुंचता है।
डबल-डिजिट एक्सपोर्ट ग्रोथ का दावा: संकेत क्या देता है?
गोयल ने कहा कि फरवरी के पहले आधे हिस्से में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स में “डबल-डिजिट” वृद्धि दर्ज की गई है, जो मजबूत मांग और उद्योग की भागीदारी का संकेत देता है। हालांकि इस तरह की अवधि-आधारित वृद्धि में बेस इफेक्ट और वैश्विक मांग के उतार-चढ़ाव जैसे पहलू भी भूमिका निभाते हैं, इसलिए इसे व्यापक ट्रेंड के संदर्भ में देखना जरूरी होगा।
फिर भी, सरकार इस संकेत को पॉजिटिव मानकर आगे के लिए एक्सपोर्ट पुश बढ़ा रही है और यही EPM के नए पैकेज की रणनीतिक पृष्ठभूमि है।
आम निर्यातकों और MSMEs के लिए “takeaway” क्या है?
अगर सरकार का दावा और मिशन सही दिशा में आगे बढ़ता है, तो MSMEs के लिए तीन बड़े फायदे सामने आ सकते हैं:
- ज्यादा देशों में प्रेफरेंशियल टैरिफ/मार्केट एक्सेस का लाभ, जिससे प्राइसिंग मजबूत हो सकती है।
- रेगुलेटरी नॉर्म्स और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करने में संस्थागत सपोर्ट।
- ओवरसीज वेयरहाउसिंग और नए मार्केट्स तक पहुंच से स्केल बढ़ाने का मौका।
लेकिन वास्तविक फायदा तभी मिलेगा जब छोटे निर्यातकों को “एंड-टू-एंड” सपोर्ट मिले—जैसे डॉक्यूमेंटेशन, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन, लॉजिस्टिक्स, भुगतान सुरक्षा और फाइनेंसिंग के इकोसिस्टम में सुधार। EPM की दिशा इसी तरफ दिख रही है।
FAQs (5)
- पीयूष गोयल ने 70% ग्लोबल GDP और दो-तिहाई ग्लोबल ट्रेड वाली बात किस संदर्भ में कही?
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए व्यापार समझौतों के कारण भारत को ऐसे बाजारों में प्रेफरेंशियल एक्सेस मिला है जो लगभग 70% वैश्विक GDP और दुनिया के दो-तिहाई व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। - भारत ने कितने FTAs के जरिए 38 विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पहुंच बनाई, मंत्री के अनुसार?
गोयल के मुताबिक भारत ने 9 Free Trade Agreements (FTAs) के जरिए 38 विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मार्केट एक्सेस सुरक्षित किया है। - Export Promotion Mission (EPM) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
EPM का उद्देश्य निर्यातकों—खासकर MSMEs—की संरचनात्मक चुनौतियों को दूर करना, प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि व्यापार के फायदे छोटे व्यवसायों व उद्यमियों तक पहुंचें। - EPM के तहत किन मुद्दों पर काम करने की बात कही गई है?
मिशन का फोकस MSMEs के लिए प्रक्रियाएं सरल करने, फाइनेंस तक पहुंच बढ़ाने, गुणवत्ता मानक सुधारने और अंतरराष्ट्रीय रेगुलेटरी नॉर्म्स को पूरा करने में मदद करने पर बताया गया है। - ‘Bharat Mart in Dubai’ जैसी पहल का लक्ष्य क्या है?
इसका लक्ष्य ओवरसीज वेयरहाउसिंग और मार्केट एक्सेस बढ़ाकर भारतीय कंपनियों को GCC, अफ्रीका, सेंट्रल एशिया और यूरोप जैसे क्षेत्रों में बेहतर पहुंच दिलाना है।
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