हिमाचल सरकार 1 अप्रैल से नई टोल पॉलिसी 2026-27 लागू कर रही है। दूसरे राज्यों की कार/जीप/वैन का शुल्क ₹70 से बढ़कर ₹170 होगा, 55 एंट्री टोल बैरियर पर FASTag अनिवार्य रहेगा। बढ़ी दरें पर्यटन और फ्रेट रेट पर असर डाल सकती हैं, जबकि HP रजिस्टर्ड वाहन टोल से मुक्त रहेंगे।
हिमाचल की नई टोल पॉलिसी 2026-27: 55 बैरियर, FASTag अनिवार्य, प्राइवेट वाहनों का टोल 2.4 गुना
हिमाचल में 1 अप्रैल से टोल महंगा: नई टोल पॉलिसी 2026-27 लागू, दूसरे राज्यों की कारों पर बड़ा असर
हिमाचल प्रदेश में 1 अप्रैल से राज्य के एंट्री पॉइंट्स पर टोल टैक्स बढ़ने जा रहा है। नई टोल पॉलिसी 2026-27 के लागू होते ही दूसरे राज्यों से आने वाले निजी वाहनों (खासकर कार, जीप और वैन) को अब पहले से काफी ज्यादा शुल्क देना होगा। सरकार के मुताबिक, यह बढ़ोतरी वाहन की श्रेणी के हिसाब से ₹30 से ₹180 तक है। हालांकि, हिमाचल में रजिस्टर्ड वाहनों को टोल टैक्स से छूट दी जाएगी।
यह फैसला सीधे तौर पर पर्यटकों और मालवाहक ट्रांसपोर्ट—दोनों पर असर डाल सकता है, क्योंकि हिमाचल में एंट्री पर 55 टोल बैरियर हैं। नई नीति में यह भी साफ किया गया है कि टोल बैरियर पर FASTag अनिवार्य होगा और शुल्क बैरियर पर ही कलेक्ट किया जाएगा।
नई टोल दरें क्या हैं: किस वाहन को कितना देना होगा?
नई नीति के मुताबिक, लाइट मोटर व्हीकल (LMV) यानी कार, जीप और वैन के लिए टोल सबसे ज्यादा चर्चा में है। अभी तक इन वाहनों से ₹70 लिया जाता था, जो 1 अप्रैल से बढ़कर ₹170 हो जाएगा। यानी एक बार हिमाचल में एंट्री लेते ही बाहर के राज्यों की कारों पर ₹100 का सीधा अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
दूसरी तरफ, बसों और 2-एक्सल तक के ट्रक का टोल ₹570 ही रहेगा, यानी इस श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन लाइट कमर्शियल व्हीकल, मिनी बस, 3-एक्सल कमर्शियल वाहन, हैवी कंस्ट्रक्शन मशीनरी और ओवरसाइज़ (7 या अधिक एक्सल) वाहनों के लिए प्रतिदिन शुल्क तय कर दिए गए हैं।
तालिका: हिमाचल टोल पॉलिसी 2026-27 (प्रमुख नई दरें)
| वाहन श्रेणी | नई दर (प्रति दिन/एंट्री) | पहले की दर (जहां बताई गई) |
|---|---|---|
| कार/जीप/वैन (LMV) | ₹170 | ₹70 |
| बस/ट्रक (2-एक्सल तक) | ₹570 | ₹570 (कोई बदलाव नहीं) |
| लाइट कमर्शियल वाहन/मिनी बस | ₹320 | — |
| 3-एक्सल कमर्शियल वाहन | ₹600 | — |
| हैवी कंस्ट्रक्शन मशीनरी | ₹800 | — |
| ओवरसाइज़ वाहन (7+ एक्सल) | ₹900 | — |
नोट: बढ़ोतरी का दायरा ₹30–₹180 बताया गया है और हिमाचल-रजिस्टर्ड वाहन टोल टैक्स से मुक्त रहेंगे।
55 टोल बैरियर, FASTag जरूरी: पर्यटकों और फ्रेट पर क्या असर?
हिमाचल प्रदेश में कुल 55 टोल बैरियर हैं और नई दरें लागू होने के बाद बाहरी वाहनों के लिए कुल यात्रा लागत बढ़ सकती है। इसका असर दो तरह से दिख सकता है—पहला, टूरिस्ट ट्रैवल (कार/टैक्सी/टूर ऑपरेटर) महंगा हो सकता है; दूसरा, फ्रेट और सप्लाई चेन की लागत बढ़ने से कुछ वस्तुओं/सेवाओं के दाम भी ऊपर जा सकते हैं।
सरकार का तर्क यह है कि FASTag को अनिवार्य करने और टोल ऑपरेशंस को बेहतर मॉनिटरिंग के जरिए प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तेज बनेगी। नीति में टोल बैरियर की नीलामी ऑनलाइन करने की बात कही गई है, और जिला स्तर पर एक कमेटी बनाने का भी प्रावधान है, जिसकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट करेंगे, ताकि संचालन पर निगरानी रखी जा सके।
ट्रैफिक कम करने के लिए MLFF टोल बैरियर का प्लान
नीति में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोल बैरियर स्थापित करने की बात भी कही गई है। इसके लिए जिन स्थानों का जिक्र हुआ है, वे हैं—परवाणू (मेन) और टिपरा बायपास (सोलन जिला) तथा गरमौरा (बिलासपुर जिला)। आम तौर पर MLFF सिस्टम का लक्ष्य यह होता है कि वाहनों को बैरियर पर रुकना कम पड़े और लाइनें छोटी हों।
हालांकि, ग्राउंड लेवल पर यह तभी सफल होगा जब FASTag कम्प्लायंस, लेन मैनेजमेंट और सिस्टम की तकनीकी स्थिरता बनी रहे। यदि इन इलाकों में पर्यटन सीजन के दौरान ट्रैफिक पीक रहता है, तो MLFF अप्रोच जाम कम करने में उपयोगी साबित हो सकती है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों का विरोध: “निजी परिवहन पर हमला”
इस फैसले पर हिमाचल प्रदेश प्राइवेट बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन और बस एंड कार ऑपरेटर्स कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडिया की राज्य इकाई ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इसे निजी परिवहन क्षेत्र पर “हमला” बताया और तुरंत रोलबैक की मांग की है।
उनका कहना है कि कुछ रूट्स जैसे ऊना-जसूर (तलवाड़ा होकर), जसूर-धांगू (पठानकोट होकर) और ऊना-नैना देवी (नांगल होकर) आंतरिक परिवहन का हिस्सा हैं, इसलिए इन पर एंट्री टोल लगाना व्यावहारिक नहीं है। ऑपरेटर्स का तर्क है कि अगर ऐसे रूट्स पर बढ़ा हुआ टोल लागू हुआ, तो किराए और ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ेगी और इसका बोझ अंततः यात्रियों पर आएगा।
आम यात्रियों के लिए व्यावहारिक सुझाव (टोल बढ़ने के बाद)
अगर हिमाचल ट्रिप प्लान हो, तो कुछ बातें पहले से ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा:
- FASTag एक्टिव रखें और उसमें पर्याप्त बैलेंस हो, ताकि टोल पर रुकना न पड़े।
- बजट बनाते समय एंट्री टोल को ट्रिप कॉस्ट में शामिल करें, खासकर अगर निजी कार से जा रहे हों।
- कैब/टैक्सी बुक करते समय ड्राइवर से पूछें कि टोल चार्जेस फाइनल किराए में कैसे जोड़े जाएंगे।
FAQs (5)
- हिमाचल में टोल शुल्क कब से बढ़ रहा है?
नई टोल पॉलिसी 2026-27 के तहत 1 अप्रैल से हिमाचल के एंट्री पॉइंट्स पर टोल शुल्क बढ़ेगा। - बाहरी राज्यों की कारों के लिए नई टोल दर क्या होगी?
कार/जीप/वैन (LMV) के लिए शुल्क ₹70 से बढ़कर ₹170 कर दिया गया है। - क्या हिमाचल में रजिस्टर्ड वाहनों को भी टोल देना होगा?
नहीं, नीति के अनुसार हिमाचल में रजिस्टर्ड वाहन टोल टैक्स से मुक्त रहेंगे। - FASTag को लेकर क्या नियम है?
नई नीति में टोल बैरियर पर FASTag अनिवार्य किया गया है और शुल्क बैरियर पर ही कलेक्ट होगा। - ट्रांसपोर्ट संगठनों ने विरोध क्यों किया है?
बस और कार ऑपरेटर संगठनों ने कहा है कि बढ़ा हुआ टोल निजी परिवहन पर बोझ है और कुछ रूट्स आंतरिक परिवहन के हैं, इसलिए वहां एंट्री टोल लगाना व्यावहारिक नहीं; उन्होंने निर्णय वापस लेने की मांग की है।
Leave a comment