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वंतारा में विदेशी जानवरों की एंट्री पर बवाल खत्म? सुप्रीम कोर्ट ने जांच याचिका क्यों खारिज की

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Supreme Court Vantara order
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सुप्रीम कोर्ट ने वंतारा के विदेशी पशु इम्पोर्ट पर CITES उल्लंघन के आरोपों वाली याचिका खारिज की, SIT और CITES सचिवालय की क्लीन चिट बरकरार रखी और कहा कि वैध अनुमति से हुए आयातों को बाद में आपत्तियों के आधार पर अवैध नहीं कहा जा सकता।

“वैध इजाज़त के बाद इम्पोर्ट को अवैध नहीं कह सकते” – वाइल्डलाइफ इम्पोर्ट केस में वंतारा को क्लीन चिट बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने वंतारा वाइल्डलाइफ इम्पोर्ट जांच की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात स्थित वंतारा एनिमल वेलफेयर इनिशिएटिव में विदेशी जानवरों के आयात को लेकर दायर एक नई याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में आरोप था कि कई वाइल्डलाइफ ट्रांसफर अंतरराष्ट्रीय संधि CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) के नियमों के खिलाफ हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने 9 मार्च के आदेश में साफ कहा कि उन्हें याचिका में “कोई मेरिट” नहीं दिखा और पहले से दी गई क्लीन चिट को ही बरकरार रखा जाता है।

SIT और CITES दोनों ने दी थी क्लीन चिट

कोर्ट ने याद दिलाया कि वंतारा के वाइल्डलाइफ इम्पोर्ट पर पहले ही एक कोर्ट–अप्रॉइंटेड स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) जांच कर चुकी है और उसने किसी भी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का सबूत नहीं पाया। SIT की रिपोर्ट को पहले एक समन्वय (coordinate) बेंच भी स्वीकार कर चुका है। इसके अलावा CITES सचिवालय ने भी स्वतंत्र स्तर पर डॉक्युमेंट्स और परमिट्स की जांच कर कोई अनियमितता नहीं पाई। मौजूदा बेंच ने कहा कि जब दोनों जांच और पहले के कोर्ट आदेश साफ हैं, तो उसी मुद्दे पर दोबारा जांच कराने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।

“वैध इम्पोर्ट बाद में अवैध नहीं हो सकता”: कोर्ट की साफ टिप्पणी

बेंच ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन किया कि अगर कोई आयात वैध अनुमति के तहत किया गया है, तो बाद में सिर्फ़ इस आधार पर कि किसी ने आपत्ति उठा दी, उसे “प्रतिबंधित” या अवैध नहीं घोषित किया जा सकता। कोर्ट ने लिखा, “…once an import has been effected under valid permission, the same cannot subsequently be treated as prohibited… merely because the objections were raised thereafter.” यानी कानून के मुताबिक जो ट्रांज़ैक्शन सही प्रक्रिया से हो चुका है, उसे पीछे मुड़कर दोषपूर्ण नहीं कहा जा सकता, जब तक कोई ठोस गैरकानूनी तथ्य सामने न आए।

जानवरों को फिर से हटाना खुद क्रूरता हो सकता है

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर इन जानवरों को अब उनके मौजूदा वातावरण और कस्टडी से दोबारा निकालकर कहीं और भेजने की कोशिश की जाती है, तो वह खुद पशु–क्रूरता का रूप ले सकती है। ऑर्डर में कहा गया कि “disturbing the settled environment, custody and air of living animals, including rescued animals after lawful import, may itself result in cruelty.” अदालत ने संकेत दिया कि जब जानवर एक बार रिहैबिलिटेशन या सेटल्ड वातावरण में आ चुके हों, तो बिना मजबूत कारण के उन्हें दोबारा शिफ्ट करना उनके हित में नहीं होगा।

याचिकाकर्ता की मांगें: डॉक्युमेंट्स, ओवरसाइट कमेटी, एक्शन

पिटीशन फाइल करने वाले फाउंडेशन ने कोर्ट से मांग की थी कि वंतारा से जुड़े सभी इम्पोर्ट लाइसेंस, परमिट और अप्रूवल डॉक्युमेंट्स सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही एक स्वतंत्र ओवरसाइट कमेटी गठित करने, और Wild Life (Protection) Act, 1972 के तहत वंतारा व अन्य संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी मांगों को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि जिन मुद्दों को उठाया गया है, वे पहले ही पूर्व कार्यवाहियों में जांचे–परखे जा चुके हैं और SIT व CITES दोनों ने क्लीन चिट दे दी है।

“पहले ही निपट चुकी बातों को फिर नहीं खोल सकते”

बेंच ने अपने निष्कर्ष में कहा कि इस writ petition में उठाए गए प्रश्न ऐसे हैं जो पहले से ही अदालत की निगरानी में बनी SIT और अंतरराष्ट्रीय प्राधिकरणों द्वारा जांचे जा चुके हैं। इसलिए इन्हीं फैक्ट्स के आधार पर दोबारा नई जांच का आदेश देना न्यायिक सिद्धांतों के खिलाफ होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में कोई नया तथ्य या ठोस सबूत सामने आए तो कानून के अनुसार अलग से कार्यवाही की जा सकती है, लेकिन अभी की याचिका “बिना मेरिट” मानी जाती है। इस तरह वंतारा के वाइल्डलाइफ इम्पोर्ट पर लगे सभी तत्कालीन आरोप न्यायिक स्तर पर निरस्त हो गए।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट ने किस याचिका को खारिज किया?
    उत्तर: कोर्ट ने वंतारा वाइल्डलाइफ इनिशिएटिव के विदेशी पशु इम्पोर्ट की जांच, दस्तावेज़ों के खुलासे और ओवरसाइट कमेटी गठित करने की मांग वाली याचिका को खारिज किया।
  2. प्रश्न: SIT और CITES की क्या भूमिका रही?
    उत्तर: कोर्ट–नियुक्त SIT और CITES सचिवालय दोनों ने स्वतंत्र जांच कर पाया कि वंतारा के इम्पोर्ट डॉक्युमेंट्स और प्रैक्टिस में कोई घरेलू या अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं है; इन्हीं रिपोर्टों को कोर्ट ने मान लिया।
  3. प्रश्न: कोर्ट ने वैध इम्पोर्ट के बारे में क्या कहा?
    उत्तर: जजों ने कहा कि एक बार जब कोई इम्पोर्ट वैध अनुमति के तहत हो चुका हो, तो बाद में केवल आपत्तियों के आधार पर उसे “prohibited” या अवैध नहीं कहा जा सकता।
  4. प्रश्न: जानवरों को दोबारा शिफ्ट करने पर कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
    उत्तर: कोर्ट ने कहा कि कानूनन इम्पोर्ट के बाद जानवरों के सेटल्ड वातावरण और कस्टडी को फिर से बदलना खुद एक तरह की क्रूरता हो सकती है, खासकर रेस्क्यू किए गए जानवरों के मामले में।
  5. प्रश्न: याचिकाकर्ता ने किन–किन कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की थी?
    उत्तर: याचिका में Wild Life (Protection) Act, 1972 के तहत कार्रवाई, डॉक्युमेंट्स के डिस्क्लोज़र और एक स्वतंत्र ओवरसाइट कमेटी की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि ये मुद्दे पहले ही जांचे और निपटाए जा चुके हैं।

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