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झारखण्ड रेरा ने किया एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।

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Jharkhand RERA organized a one day workshop.
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रेरा में रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में नवेश सुरक्षित।

500 वर्ग मीटर से बड़ा व 8 से ज्यादा यूनिट वाले प्रोजेक्ट का रेरा में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य।

अब केंद्र सरकार भी करेगी रेरा की निगरानी।

धनबाद । बिल्डर, जमीन मालिक, क्रेता, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, बैंकर्स, एजेंट्स एवं झारखण्ड राज्य के सभी स्थानीय निकाय के पदाधिकारी के बीच समन्वय स्थापित करते हुए भू- संपदा प्रक्षेत्र में पारदर्शिता एवं जागरूकता लाने के उद्देश्य से रविवार को झारखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (झारखंड रेरा) ने धनबाद क्लब में कार्यशाला का आयोजन किया।

इस अवसर पर झारखंड रेरा के अध्यक्ष बिरेंद्र भूषण ने कहा कि किसी भी प्रोजेक्ट में निवेशकों को रेरा का रजिस्ट्रेशन नंबर देखकर ही निवेश करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि बिना रेरा में रजिस्टर्ड संपत्ति की खरीदी नहीं करें।

साथ ही बताया कि झारखंड रेरा के पोर्टल पर सभी रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स का विवरण उपलब्ध है। पोर्टल पर प्रोजेक्ट के संबंधित सारा विवरण देख सकते हैं। अध्यक्ष ने कहा कि 500 वर्ग मीटर से बड़ा क्षेत्र एवं 8 से ज्यादा यूनिट वाले प्रोजेक्ट को झारखंड रेरा में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि अब केंद्र सरकार भी रेरा की निगरानी करेगी।

उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि यदि झारखंड रेरा में बिना रजिस्ट्रेशन कोई प्रोजेक्ट शुरू होता है तो शिकायत करें। संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रोजेक्ट पर रोक लगाई जाएगी।

कार्यशाला में रेरा के पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान में कानूनी सलाहकार रंजीत कुमार चौधरी ने कहा कि झारखंड रेरा में बिल्डर, जमीन मालिक, क्रेता, बैंकर्स इत्यादि के हित को ध्यान में रखकर नियम बनाए गए हैं। रेरा में रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स को समय पर क्रेता को यूनिट हैंड ओवर करने की बाध्यता है। इसमें बिल्डर व जमीन मालिक, दोनों के लिए नियम लागू है। शिकायत दर्ज होने पर जिसकी गलती होती है उसके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाती है। बिल्डर द्वारा विवरणिका (ब्रोशर) में दर्शाई गई सभी सुविधा एग्रीमेंट में लिखनी है और क्रेता को देनी है।

कार्यशाला में त्रैमासिक विवरण अपलोड करने, बिल्डिंग बाय लॉज का पालन करने, यू.डी.आई.एन. नंबर सही भरने, स्क्रो अकाउंट, फाइल ट्रैकिंग सिस्टम, रेरा में रजिस्ट्रेशन करने की प्रक्रिया, एक ही बिल्डर के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के लिए अलग-अलग बुक्स ऑफ अकाउंट्स रखने सहित अन्य विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में नगर निकाय, बिल्डर, आर्किटेक्ट, जमीन मालिक, क्रेता सहित अन्य हित धारकों के विचार सुन गए एवं उसका निराकरण किया गया।

कार्यशाला में झारखंड रेरा के अध्यक्ष बिरेंद्र भूषण, कानूनी सलाहकार रंजीत कुमार चौधरी, विशेष कार्य पदाधिकारी नीरज कुमार श्रीवास्तव, प्रशासनिक पदाधिकारी सुरजीत मुखर्जी, कंसलटेंट ट्रेनर सुमित मित्तल, सहायक नगर आयुक्त प्रकाश कुमार, क्रेडाई के अध्यक्ष अमरेश सिंह, गिरिडीह एवं देवघर के टाउन प्लानर, मनोज मोदी, अनिल मुकीम, प्रमोद अग्रवाल, अनीश डोकानिया, अमित सुल्तानिया, सुमन सिंह, हितेश ठक्कर के अलावा स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक व अन्य बैंक के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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