उपायुक्त का सख्त निर्देश -‘एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे’
धनबाद: जिले में स्कूल से बाहर (ड्रॉप आउट) हो चुके बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। उपायुक्त सह अध्यक्ष (झारखंड शिक्षा परियोजना) आदित्य रंजन के निर्देश पर जिले में एक विशेष नामांकन अभियान “SETENG” (Special Enrolment and Tracking for Engagement of Out of School Children) की शुरुआत की गई है। यह महाभियान 7 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक पूरे दो महीने तक संचालित होगा।
इन जगहों पर होगी बच्चों की खोज (निगरानी दल करेगा रेस्क्यू)
अभियान के तहत जिला प्रशासन की टीमें उन सभी संभावित जगहों पर जाकर बच्चों की पहचान करेंगी जहाँ बाल श्रम या ड्रॉप आउट की संभावना सबसे ज़्यादा होती है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- होटल, ढाबा, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन
- यातायात सिग्नल, ईंट-भट्ठे और निर्माण स्थल
- स्थानीय दुकानें, ऑटो मरम्मत केंद्र और लघु उद्योग
- प्रवासी श्रमिक शिविर, झुग्गी-झोपड़ियाँ और कूड़ा डंपिंग साइट्स
अंतर-विभागीय निगरानी दल (Task Force) का गठन
इस अभियान को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने और बेहतर समन्वय के लिए एक उच्च स्तरीय निगरानी दल का गठन किया गया है। इस टीम में कई महत्वपूर्ण विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है:
शामिल विभाग: रेल मंडल, जिला खनन, जिला कल्याण, श्रम विभाग, समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, उद्योग विभाग एवं प्रखंड प्रशासन।
बैठक में उपायुक्त ने दिए कड़े निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त आदित्य रंजन ने अधिकारियों को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए:
- तत्काल नामांकन: किसी भी स्थल से बच्चे का रेस्क्यू किए जाने पर उसे तुरंत बाल संरक्षण पदाधिकारी को सौंपा जाए और स्कूल में उसका नामांकन सुनिश्चित कराया जाए।
- ड्रॉप आउट स्कूलों की पहचान: जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) को निर्देश दिया गया है कि वे जिले के उन स्कूलों की सूची और रिपोर्ट सौंपे, जहाँ से सबसे ज़्यादा बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं।
- क्लास अपग्रेडेशन पर नजर: प्राइमरी से मिडिल स्कूल और मिडिल से हाई स्कूल में जाने वाले बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन पर विशेष नजर रखी जाए ताकि उच्च शिक्षा के स्तर पर ड्रॉप आउट रोका जा सके।
मिशन मोड में काम करने की अपील
जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को इस अभियान को ‘मिशन मोड’ में चलाने का आह्वान किया है। बैठक में जिला खनन पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, सहायक श्रम आयुक्त, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, रेलवे के अधिकारी और टुंडी के बीडीओ समेत कई आला अधिकारी मौजूद थे।
इस अभियान का सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धनबाद जिले का कोई भी बच्चा सामाजिक या आर्थिक कारणों से शिक्षा के अधिकार से वंचित न रह जाए।
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