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PoJK वापस लेना ही पाकिस्तान से एकमात्र लंबित मुद्दा: डॉ. जितेंद्र सिंह | कारगिल विजय दिवस

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Partition was the biggest blunder in history; talks with Pakistan will now focus solely on reclaiming PoJK: Dr. Jitendra Singh.
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विभाजन इतिहास की सबसे बड़ी भूल, अब पाकिस्तान से सिर्फ PoJK वापस लेने पर होगी बात: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली : केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के विभाजन को “इतिहास की सबसे बड़ी भूल” करार देते हुए कहा है कि अब पाकिस्तान के साथ बातचीत का एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) को वापस लेना है। वे नई दिल्ली स्थित कश्मीरी सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित 27वें कारगिल विजय दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

इस कार्यक्रम का आयोजन ‘जम्मू-कश्मीर पीपल्स फोरम’ और ‘पीओजेके यूथ फोरम’ (मीरपुर बलिदान भवन समिति) द्वारा 1999 के कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया था। समारोह में सांसद बांसुरी स्वराज मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं, जबकि अध्यक्षता कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक कर्नल के.के. शर्मा ने की।

राष्ट्रीय सुरक्षा में आया निर्णायक बदलाव

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश का सुरक्षा परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। भारत अब केवल बाहरी हमलों का इंतजार करके प्रतिक्रिया देने वाली पुरानी नीति से बाहर निकलकर “सक्रिय और निर्णायक जवाबी कार्रवाई” वाले दृष्टिकोण पर काम कर रहा है। सरकार की आतंकवाद के प्रति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति ने राष्ट्रीय आत्मविश्वास और क्षेत्रीय अखंडता को अभूतपूर्व मजबूती दी है।

1994 का संसदीय प्रस्ताव दोहराया

1994 के सर्वसम्मत संसदीय प्रस्ताव का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि PoJK भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हुआ अभूतपूर्व विकास—जैसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज, नए एम्स संस्थान और कश्मीर घाटी तक रेल नेटवर्क—अब PoJK के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

विभाजन से लेकर कारगिल तक एक ही कड़ी

कारगिल युद्ध के ऐतिहासिक संदर्भ पर बात करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि 1999 की घटनाओं को अलग करके नहीं देखा जा सकता। यह विभाजन के समय से शुरू हुई समस्याओं की ही एक कड़ी है, जिसने लाखों लोगों को बेघर किया और 1947, 1965, 1971 के युद्धों के साथ-साथ लगातार सीमा-पार आतंकवाद की नींव रखी। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को आजाद भारत की सबसे गंभीर मानवीय त्रासदियों में से एक बताया।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत

केंद्रीय मंत्री ने रक्षा उत्पादन में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल स्वदेशी रक्षा तकनीकों का विकास ही नहीं कर रहा, बल्कि रक्षा उपकरणों के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी उभर रहा है।

समारोह के अंत में उन्होंने युवा पीढ़ी से कारगिल के शहीदों के साहस और देशभक्ति से प्रेरणा लेकर एक मजबूत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

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Written by
Yudhishthir Mahato

Yudhishthir Mahato is a journalist. He has been doing journalism for the past several years. He started journalism as a reporter in the year 2017. He also worked for newspapers, news portals and TV channels. Currently, along with journalism, he also does public relations work. He has done M.A in Mass Communication from Binod Bihari Mahato Koyalanchal University. He has been honored by many organizations. Apart from this, he also writes songs and poems.

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