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क्या Christmas Tree में छिपा है सोना? फिनलैंड के जंगलों से नई खोज जो दंग कर देगी

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पेड़ों पर सोना उगना असंभव लगता है न? फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने नॉर्वे स्प्रूस की सुइयों में सोने के नैनोपार्टिकल्स खोजे, Christmas Treeबैक्टीरिया की मदद से! जानिए यह चमत्कार कैसे काम करता है, खनन में नया क्रांति और पर्यावरण फायदे।

पेड़ों पर सोना उगना: विज्ञान की यह अनोखी खोज क्या बदल देगी दुनिया?

सोना तो जमीन के अंदर मिलता है, माइंस खोदकर निकालते हैं – ये बात तो हम सब जानते हैं। लेकिन क्या हो अगर पेड़ों की पत्तियों में ही सोने के छोटे-छोटे कण छिपे हों? फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने अभी हाल ही में कुछ ऐसा ही खोजा है। नॉर्वे स्प्रूस नाम के पेड़ की सुइयों (नीडल्स) के अंदर सोने के नैनोपार्टिकल्स मिले हैं, और वो भी बैक्टीरिया की मदद से बने हुए। ये खोज Kittilä गोल्ड माइन के पास के जंगलों में हुई, जो यूरोप की सबसे बड़ी सोना उत्पादक माइन है।

यह कोई जादू नहीं, बल्कि प्रकृति का एक चमत्कारी प्रोसेस है जिसे बायोमिनरलाइजेशन कहते हैं। मिट्टी में घुला हुआ सोना पेड़ की जड़ों से ऊपर चढ़ता है, और पेड़ के अंदर रहने वाले सूक्ष्मजीव इसे ठोस पार्टिकल्स में बदल देते हैं। अध्ययन के मुताबिक, 23 पेड़ों की 138 सुइयों की जांच में 4 पेड़ों में ये सोने के कण पाए गए। ये खोज Environmental Microbiome जर्नल में 28 अगस्त 2025 को पब्लिश हुई।

यह खोज कहां हुई? फिनलैंड के जंगलों का रहस्य

फिनलैंड का उत्तरी इलाका, खासकर Kittilä गोल्ड माइन के आसपास के जंगल। यहां Norway spruce (Picea abies) नाम के पेड़ उगते हैं, जो क्रिसमस ट्री के रूप में भी मशहूर हैं। वैज्ञानिकों ने Tiira Au-deposit नामक जगह से सैंपल लिए, जहां सोने की मिट्टी है। जड़ों से पानी सोखते हुए सोने के आयन (घुले हुए कण) पेड़ में चले जाते हैं।

ओउलू यूनिवर्सिटी और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ फिनलैंड के रिसर्चर्स ने FE-SEM माइक्रोस्कोपी से ये नैनोपार्टिकल्स देखे। आकार? सिर्फ एक मिलियनवां मिलीमीटर जितना छोटा! टेबल से देखिए, कितने पेड़ों में कितना सोना मिला:

पेड़ नंबरसोने की मात्रा (µg/kg)नैनोपार्टिकल्स मिले?लोकेशन
T650.7 (हाई)हां50m गहराई
T66<0.2 (लो)हां50m गहराई
T930.2 (लो)हांबैकग्राउंड
T95<0.2 (लो)हां100-150m गहराई
बाकी0.2-2.8नहींविविध

ध्यान दें, हाई सोना वाली सुइयों में बैक्टीरिया की विविधता कम थी।

बैक्टीरिया का जादू: कैसे बनता है पेड़ों में सोना?

पेड़ खुद सोना नहीं बनाते। अंदर रहने वाले एंडोफाइटिक बैक्टीरिया (endophytic bacteria) कमाल करते हैं। मिट्टी का घुला सोना पेड़ की नीडल्स तक पहुंचता है। वहां बैक्टीरिया बायोफिल्म बनाते हैं – ये एक चिपचिपी लेयर होती है प्रोटीन और शुगर से।

इस बायोफिल्म में pH और ऑक्सीजन लेवल बदलता है, जिससे सोने के आयन ठोस नैनोपार्टिकल्स बन जाते हैं। मुख्य बैक्टीरिया:

  • P3OB-42 (Myxococcales ऑर्डर)
  • Cutibacterium
  • Corynebacterium
  • Methylobacterium (कुछ स्टडीज में)

ये बैक्टीरिया मेटल-टॉलरेंट होते हैं, जैसे Corynebacterium आर्सेनिक और Pd सोख सकता है। मशीन लर्निंग एनालिसिस (Random Forest) ने भी इन्हें सोना वाली नीडल्स से लिंक किया।

पुरानी स्टडीज में Cupriavidus metallidurans बैक्टीरिया ने सोना बायोमिनरलाइज किया। ये प्रोसेस धीमा है, लेकिन नेचुरल।

वैज्ञानिक बैकग्राउंड: बायोमिनरलाइजेशन क्या है?

बायोमिनरलाइजेशन में जीव सोने जैसे मिनरल्स को क्रिस्टलाइज करते हैं। पेड़ों में ये टॉक्सिसिटी से बचाव के लिए होता है। सोना प्लांट्स के लिए जहरीला, लेकिन नैनो रूप में कम हानिकारक।

फिनलैंड स्टडी में DNA सीक्वेंसिंग से 998 बैक्टीरिया जेनेरा मिले। मुख्य: Pseudomonadota (61%), Bacillota (12%), Actinomycetota (12%)। कोर बैक्टीरिया: Cutibacterium (96% फ्रीक्वेंसी)।

भारत में भी सोने की माइंस हैं (झारखंड, कर्नाटक)। क्या यहां पेड़ों से सोना ढूंढा जा सकता है?

पर्यावरण और खनन पर असर: ग्रीन माइनिंग का भविष्य

ट्रेडिशनल माइनिंग से प्रदूषण, ड्रिलिंग। ये खोज बायोप्रोस्पेक्टिंग लाती है – पेड़ों की पत्तियां मिनरल डिटेक्टर! सस्ता, कम इनवेसिव।

बायोमाइनिंग में बैक्टीरिया सोना निकालते हैं, CO2 3 गुना कम। फिनलैंड स्टडी से मॉस और दूसरे प्लांट्स में भी हो सकता है।

भारत के लिए: हिमालयी पाइन या नीम में ट्रायल? ICMR जैसी बॉडीज रिसर्च कर सकतीं।

इंडिया कनेक्शन: क्या हमारे पेड़ों में सोना छिपा है?

भारत में कोलार गोल्ड फील्ड्स, हट्टीगोल्ड। पाइन हिमाचल-पंजाब में उगते हैं। स्टडीज से पता चलेगा अगर बैक्टीरिया यहां भी काम करते।

आयुर्वेद में पेड़ों का मिनरल यूज (जैसे सोना भस्म), लेकिन साइंस अब कन्फर्म कर रहा। पारंपरिक ज्ञान + मॉडर्न साइंस।

प्रैक्टिकल एप्लीकेशन्स: खनन कैसे बदलेगा?

  • बायोप्रोस्पेक्टिंग: पत्तियां टेस्ट करो, माइन ढूंढो।
  • बायोलीचिंग: बैक्टीरिया से लो-ग्रेड ओर निकालो।
  • रिमेडिएशन: माइन वेस्ट से मेटल्स साफ करो।

स्टेप्स फॉर एक्सप्लोरेशन:

  • मिट्टी सैंपल लो।
  • ऊपर पेड़ों की नीडल्स चेक करो Au के लिए।
  • बैक्टीरिया DNA एनालिसिस।
  • नैनोपार्टिकल्स FE-SEM से कन्फर्म।

चुनौतियां: नैनो पार्टिकल्स बहुत छोटे, हमेशा नहीं मिलते।

वैकल्पिक तरीके और फ्यूचर रिसर्च

बायोमाइनिंग में fungi, plants भी यूज। ई-वेस्ट से गोल्ड रिकवर। फिनलैंड रिसर्चर्स आगे XAS/XRF यूज करेंगे।

भारत: GSI (Geological Survey of India) ट्रायल शुरू करे।

स्वास्थ्य और सेफ्टी: सोना प्लांट्स में सेफ है?

सोना नैनो रूप में कम टॉक्सिक। लेकिन हाई अमाउंट से प्लांट स्ट्रेस। बैक्टीरिया हेल्प करते डिटॉक्स में।

अन्य मेटल्स में भी यही प्रोसेस?

हां, Ag, As, REEs भी मिले। Eucalyptus में गोल्ड पहले मिला।

निष्कर्ष: प्रकृति का खजाना

ये खोज दिखाती है प्रकृति कितनी स्मार्ट है। बैक्टीरिया-पेड़ पार्टनरशिप से खनन ग्रीन बनेगा। रिसर्च जारी रहे!

FAQs

  1. पेड़ों में सोना कैसे पहुंचता है?
  2. कौन से बैक्टीरिया सोना बनाते हैं?
  3. यह खोज खनन को कैसे बदलेगी?
  4. भारत में यह लागू हो सकता है?
  5. क्या पेड़ों का सोना निकाला जा सकता है?

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