Home झारखण्ड राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से 21 मामलों की सुनवाई की गई।
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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से 21 मामलों की सुनवाई की गई।

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21 cases were heard by the National Commission for Scheduled Tribes.
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Ranchi : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) नई दिल्ली की ओर से सर्कुलर रोड स्थित न्यू सर्किट हाउस में 21 मामलों की सुनवाई की गई।आयोग की ओर से हजारीबाग निवासी मालती देवी की शिकायत का समाधान पहली तिथि में ही किया गया। वहीं खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग से संबंधित मामले में विभागीय सचिव को आयोग की ओर से समन जारी करने का निर्देश दिया गया। JSSC से संबंधित मामले में आयोग की ओर से सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की गई। इसी प्रकार, रामगढ़ निवासी बेनी राम मांझी को भूदान में दी गई जमीन का लगन निर्धारण कर रसीद देने से संबंधित शिकायत का भी आयोग की ओर से समाधान किया गया। वहीं, CCL से संबंधित मामले में कालेश्वर गंझू की ओर से की गई शिकायत मामले में आयोग की ओर से मुआवजा भुगतान करने का निर्देश दिया गया। CCL के CMD ने भी शिकायतकर्ता को मुआवजे का भुगतान करने पर सहमति प्रदान की। साथ ही शिकायतकर्ता को नौकरी देने के मामले में आयोग के समक्ष कहा कि जांच के बाद शिकायतकर्ता को नौकरी देने पर विचार किया जाएगा।

JSSC मामला

  • आयोग को बताया गया कि रूपा कुमारी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के विज्ञापन संख्या 02/2023 के तहत खातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक (हिंदी) प्रतियोगिता परीक्षा में आवेदन किया था। परीक्षा दिनांक 09.03.2024 को आयोजित हुई तथा परिणाम घोषित होने के पश्चात उन्हें 16.03.2024 को दस्तावेज सत्यापन हेतु बुलाया गया, जहां उनके सभी दस्तावेज सही पाए गए।
    इसके बावजूद 14.06.2024 को प्रकाशित अंतिम मेरिट सूची से उनका नाम हटा दिया गया। अभ्यावेदक का आरोप है कि झारखंड सरकार के संकल्प संख्या 5555 दिनांक 28.06.2016 के अनुसार आदिम जनजातियों को दिए जाने वाले आरक्षण प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, जिससे पात्र अभ्यर्थी चयन से वंचित हो गया।
  • JSSC की ओर से बताया गया कि अनुसूचित जनजातियों हेतु 26% आरक्षण का प्रावधान है, जिसमें से न्यूनतम 2% पद आदिम जनजातियों के लिए क्षेतिज आरक्षण के रूप में सुरक्षित हैं। पीजीटी (हिंदी) के एक पद पर आदिम जनजाति हेतु आरक्षित रिक्ति में रूपा कुमारी (मेधा क्रमांक 2048) का चयन नहीं किया गया, क्योंकि मेधाक्रमांक 772 पर स्थित एक अन्य आदिम जनजाति अभ्यर्थी सामान्य मेधा सूची में ही चयनित हो गया था। नियमों के अनुसार यदि आदिम जनजाति का अभ्यर्थी सामान्य मेधा सूची में चयनित हो जाता है, तो अलग से आरक्षित पद पर चयन आवश्यक नहीं होता। यदि ऐसे पद रिक्त रह जाते हैं, तो उन्हें अन्य अनुसूचित जनजाति अभ्यर्थियों से भरा जा सकता है तथा इन पदों पर बैकलॉग लागू नहीं होता।
  • आरोप लगाया गया है कि कुल 163 पदों में से अनुसूचित जनजाति के लिए 43 पद होने चाहिए थे, जबकि केवल 37 पद दिए गए। साथ ही 2% आरक्षण के अनुसार आदिम जनजातियों को 3 पद मिलने चाहिए थे, जबकि केवल 1 पद ही दिया गया।
  • आरोप लगाया कि एक कार्यरत शिक्षक को सीधी भर्ती में चयनित किया गया, जो नियमों के विपरीत है तथा एक रिक्त पद पर रूपा कुमारी को नियुक्त किया जाना चाहिए।
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Written by
Yudhishthir Mahato

Yudhishthir Mahato is a journalist. He has been doing journalism for the past several years. He started journalism as a reporter in the year 2017. He also worked for newspapers, news portals and TV channels. Currently, along with journalism, he also does public relations work. He has done M.A in Mass Communication from Binod Bihari Mahato Koyalanchal University. He has been honored by many organizations. Apart from this, he also writes songs and poems.

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