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नई दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन: क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से मजबूत होगी देश की कानूनी शिक्षा

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National Conference in New Delhi: Country's legal education to be strengthened through regional languages.
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नई दिल्ली: देश की न्याय प्रणाली को आम जनता के और करीब लाने और कानूनी शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने के उद्देश्य से शनिवार को राजधानी नई दिल्ली में एक बड़े राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय (विधि कार्य विभाग) ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के सहयोग से “क्षेत्रीय भाषाओं के एकीकरण के माध्यम से विधिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाना” विषय पर इस सम्मेलन का आयोजन BCI परिसर में किया।

प्रमुख दिग्गजों की रही उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देश के कई शीर्ष विधिक और प्रशासनिक चेहरे शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से:

  • न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन: अध्यक्ष, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण एवं सह-अध्यक्ष, BCI विधिक शिक्षा संबंधी स्थायी समिति।
  • मनन कुमार मिश्रा: सांसद (राज्यसभा) और अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ इंडिया।
  • डॉ. राजीव मणि: सचिव, विधि कार्य विभाग।
  • इनके अलावा केंद्र सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि, प्रमुख लॉ यूनिवर्सिटीज के कुलपति, बार एसोसिएशन के सदस्य, न्यायपालिका के प्रतिनिधि और प्रख्यात विधिक शिक्षाविद मौजूद रहे।

क्या है इस पहल का मुख्य उद्देश्य?

सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में विधिक शिक्षा (Legal Education) को बढ़ावा देना है, ताकि न्याय व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सके।

द्विभाषी और बहुभाषी मॉडल: इस सुधार का लक्ष्य एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जहां अंग्रेजी को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में बनाए रखते हुए, भारतीय भाषाओं को भी कानूनी शिक्षा में प्रमुखता से जोड़ा जाए।

इससे होने वाले मुख्य लाभ:

  1. बेहतर समझ: छात्रों और वकीलों में कानूनी प्रावधानों की समझ बढ़ेगी।
  2. न्याय तक आसान पहुंच: आम नागरिकों के लिए न्याय पाना और अदालती कार्यवाही को समझना आसान होगा।
  3. निचली अदालतों में मजबूती: भविष्य के कानूनी पेशेवर जिला और अधीनस्थ न्यायालयों (District Courts) में स्थानीय भाषा में अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे।

तकनीक और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की भूमिका

सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कानूनी व्यवस्था में भारतीय भाषाओं को शामिल करने की इस रफ्तार को प्रौद्योगिकी (Technology) के जरिए तेज किया जाएगा।

  • AI ट्रांसलेशन टूल्स: कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुवाद उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।
  • डिजिटल कानूनी संग्रह: भारतीय भाषाओं में डिजिटल लीगल डेटाबेस तैयार होंगे।
  • विशेषज्ञों द्वारा सत्यापन: कानूनी सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इन सभी तकनीकी और भाषाई टूल्स का विशेषज्ञों द्वारा कड़ाई से सत्यापन (Verification) किया जाएगा।

भविष्य का रोडमैप: 10 वर्षीय योजना और राष्ट्रीय संचालन समिति

सम्मेलन के दौरान विधिक शिक्षा में भारतीय भाषाओं को लागू करने के लिए कई बड़े और ठोस संकल्प लिए गए:

  • राष्ट्रीय घोषणा: विधिक शिक्षा में भारतीय भाषाओं पर एक ‘राष्ट्रीय घोषणा’ की दिशा में काम किया जाएगा।
  • 10-वर्षीय कार्य योजना: इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए एक व्यापक 10 साल का रोडमैप तैयार किया गया है।
  • राष्ट्रीय संचालन समिति: इस पूरे सुधार और कार्ययोजना की निगरानी और मार्गदर्शन के लिए विधि कार्य विभाग और BCI संयुक्त रूप से एक ‘राष्ट्रीय संचालन समिति’ (National Steering Committee) का गठन करेंगे।

‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य में योगदान

इस सम्मेलन ने भारत सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सभी हितधारकों की उस साझा प्रतिबद्धता को दोहराया है, जिसके तहत देश में एक समावेशी, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली कानूनी शिक्षा प्रणाली का निर्माण करना है। यह कदम न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करके वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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Written by
Yudhishthir Mahato

युधिष्ठिर महतो | पत्रकार एवं लेखक युधिष्ठिर महतो वर्ष 2017 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार, लेखक, गीतकार और जनसंपर्क पेशेवर हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रिपोर्टर के रूप में की और समाचार पत्रों, न्यूज़ पोर्टलों तथा टीवी चैनलों में काम करते हुए मीडिया के विभिन्न प्रारूपों में अनुभव हासिल किया। वे झारखंड क्रांति खबर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे पत्रकारिता के साथ जनसंपर्क एवं संचार कार्य से जुड़े हैं और धनबाद तथा झारखंड से संबंधित सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक एवं जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार लिखते हैं। Aaryaa News पर उनके नाम से प्रकाशित खबरों में स्थानीय घटनाक्रम से लेकर राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एम.ए. किया है। पत्रकारिता के साथ उन्हें साहित्य और रचनात्मक लेखन में भी विशेष रुचि है। वे हिंदी और खोरठा में गीत एवं कविताएं लिखते हैं और उनके लिखे कई गीत विभिन्न ऑडियो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। पत्रकारिता, जनसंपर्क और रचनात्मक लेखन—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रियता युधिष्ठिर महतो की पेशेवर पहचान को अलग आयाम देती है।

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