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ईरान-US तनाव बढ़ा: भारत ‘तेहरान वॉच’ पर, MEA बोला—भारतीयों से लगातार संपर्क में सरकार

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Randhir Jaiswal statement Indians in Iran
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ईरान-US तनाव बढ़ने पर भारत ने तेहरान की स्थिति पर कड़ी नजर रखने की बात कही है। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार सरकार तेहरान में रह रहे भारतीयों के साथ लगातार संपर्क में है और घटनाक्रमों को सक्रिय रूप से ट्रैक कर रही है।

जिनेवा वार्ता बेनतीजा, युद्ध की आशंका? MEA का बयान—“तेहरान में भारतीय समुदाय के साथ लगातार टच”

ईरान-US तनाव के बीच भारत ‘तेहरान वॉच’ पर: MEA बोला—भारतीयों से लगातार संपर्क में सरकार

ईरान और अमेरिका के बीच तेजी से बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कहा है कि वह तेहरान में विकसित हो रही स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि सरकार ईरान की राजधानी में रह रहे भारतीय नागरिकों और भारतीय समुदाय के साथ “लगातार संपर्क” में है और हर नए घटनाक्रम को सक्रिय रूप से ट्रैक कर रही है।

नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सवालों के जवाब में कहा, “हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क में हैं।” यह बयान ऐसे समय आया है जब तेहरान-वॉशिंगटन के बीच टकराव की आशंका बढ़ रही है और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए सावधानी की सलाहें जारी करनी शुरू कर दी हैं।

क्यों बढ़ा तनाव: कूटनीति अटकी, सैन्य विकल्पों की चर्चा तेज

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के परमाणु कार्यक्रम (nuclear programme) को लेकर बातचीत में कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। जिनेवा में हुई वार्ता में बातचीत तो हुई, लेकिन “ब्रेकथ्रू” नहीं आया। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि कुछ प्रगति तो हुई है, लेकिन दोनों पक्ष कई अहम मुद्दों पर अब भी “काफी दूर” हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लिए बेहतर होगा कि वह ट्रंप प्रशासन के साथ समझौते तक पहुंचे।

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से संभावित सैन्य विकल्पों के संकेत भी चर्चा में हैं। खबर में यह भी बताया गया है कि अगर कूटनीति विफल रहती है तो ट्रंप ने सैन्य विकल्पों का संकेत दिया है, जिसमें हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी बेस डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) के इस्तेमाल का जिक्र भी शामिल है।

मिडिल ईस्ट में US की सैन्य गतिविधियां: वॉरशिप, एयरक्राफ्ट की री-पोजिशनिंग

तनाव बढ़ने के साथ अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने वॉरशिप, एयरक्राफ्ट और अतिरिक्त फोर्सेज को क्षेत्र के करीब री-पोजिशन किया है। इस सैन्य बिल्डअप को परमाणु वार्ता के ठहराव के बाद उठाया गया कदम बताया गया है, जो सुरक्षा परिदृश्य को और संवेदनशील बनाता है।

दूसरी तरफ ईरान ने भी अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। खबर के अनुसार, ईरान ने रूस के साथ नेवल ड्रिल्स की हैं और रणनीतिक शिपिंग रूट्स के पास लाइव-फायर एक्सरसाइज भी की हैं। जवाब में अमेरिका ने एक एयरक्राफ्ट कैरियर और अतिरिक्त कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की तैनाती की बात सामने आई है।

दुनिया की चिंता: पोलैंड ने नागरिकों से ईरान छोड़ने को कहा

बढ़ते जोखिम को देखते हुए पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने पोलिश नागरिकों को ईरान “तुरंत छोड़ने” की सलाह दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है और निकासी (evacuation) के विकल्प अचानक सीमित हो सकते हैं। यह संकेत करता है कि कई देश हालात को सामान्य कूटनीतिक खींचतान से आगे बढ़ता हुआ मान रहे हैं।

भारत की रणनीति: ‘मॉनिटरिंग + कम्युनिटी कॉन्टैक्ट’ पर फोकस

भारत के लिए ईरान रणनीतिक और मानवीय—दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे हालात में MEA का यह कहना कि वह “तेहरान वॉच” पर है, यह दिखाता है कि सरकार स्थिति को केवल खबरों के आधार पर नहीं, बल्कि नियमित आकलन के जरिए देख रही है। MEA ने इस वक्त किसी व्यापक यात्रा/निकासी एडवाइजरी की घोषणा नहीं की, लेकिन यह स्पष्ट किया कि भारतीयों के साथ संचार चैनल खुले हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

आम तौर पर ऐसे संकटों में सरकारें तीन स्तर पर काम करती हैं—(1) इंटेलिजेंस/डिप्लोमैटिक इनपुट से रियल-टाइम आकलन, (2) दूतावास व कम्युनिटी नेटवर्क से संपर्क, (3) जरूरत पड़ने पर निकासी/सहायता योजना। इस खबर में भारत का फोकस फिलहाल पहले दो स्तरों पर स्पष्ट रूप से दिखता है।

क्या यह भारत के लिए बड़ा जोखिम है? ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा सवाल

ईरान-US तनाव बढ़ने का असर सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव ऊर्जा बाजारों, शिपिंग रूट्स और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है। खासकर रणनीतिक समुद्री मार्गों के पास सैन्य गतिविधियां बढ़ें तो व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर अनिश्चितता आ सकती है। यही कारण है कि भारत जैसे देश के लिए “तेहरान वॉच” सिर्फ नागरिक सुरक्षा नहीं, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक स्थिरता की भी चिंता है।

हालांकि फिलहाल खबर का केंद्र MEA का बयान और सैन्य-कूटनीतिक गतिविधियों का ताजा अपडेट है। आगे की दिशा इस पर निर्भर करेगी कि जिनेवा जैसी वार्ताओं में कोई नया फॉर्मूला निकलता है या सैन्य विकल्पों की तरफ कदम बढ़ते हैं।

तालिका: क्या हो रहा है और भारत क्या कर रहा है?

विषयताजा स्थितिभारत का रुख
कूटनीतिजिनेवा वार्ता में बातचीत, लेकिन ब्रेकथ्रू नहींघटनाक्रमों की लगातार मॉनिटरिंग
सैन्य तनावUS ने फोर्सेज/वॉरशिप/एयरक्राफ्ट री-पोजिशन किए, ईरान ने रूस के साथ ड्रिल्स/लाइव फायरतेहरान में भारतीय समुदाय से संपर्क बनाए रखना
नागरिक सुरक्षापोलैंड ने नागरिकों से ईरान छोड़ने को कहाMEA: भारतीयों के साथ constant touch
नेतृत्व संकेतट्रंप ने संभावित सैन्य विकल्पों की बात कहीस्थिति पर नजर, अपडेटेड आकलन

FAQs (5)

  1. भारत ने ईरान के हालात पर क्या कहा है?
    भारत ने कहा है कि वह तेहरान में विकसित हो रही स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है और ईरान में रह रहे भारतीयों के साथ लगातार संपर्क में है।
  2. यह बयान किसने दिया?
    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यह बात कही।
  3. ईरान-US तनाव क्यों बढ़ रहा है?
    खबर के मुताबिक, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता में कोई ठोस सफलता नहीं मिली, जबकि US ने सैन्य तैनाती बढ़ाई है और ट्रंप ने संभावित सैन्य विकल्पों के संकेत दिए हैं।
  4. पोलैंड ने क्या सलाह दी है?
    पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने पोलिश नागरिकों को ईरान तुरंत छोड़ने की सलाह दी है, क्योंकि सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है।
  5. आगे भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या होगा?
    सबसे अहम होगा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार संपर्क और रियल-टाइम आकलन, साथ ही क्षेत्रीय घटनाक्रमों के अनुसार आवश्यक कदमों की तैयारी।

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