दिल्ली के भारत मंडपम में India AI Impact Summit के दौरान यूथ कांग्रेस के करीब 10 कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस प्रदर्शन कर मोदी और India‑US trade framework के खिलाफ नारे लगाए। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि यह “नेपाल के Gen Z प्रोटेस्ट” से प्रेरित “बड़ी साजिश” हो सकती है और फंडिंग/डिजिटल सबूत की जांच चल रही है; 4 लोग गिरफ्तार हुए।
“PM is compromised”, “India‑US trade deal”, “Epstein Files” वाली टी‑शर्ट्स—AI समिट प्रोटेस्ट पर पुलिस की सख्त लाइन, 4 गिरफ्तार
AI समिट में यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस का दावा—“नेपाल के Gen Z आंदोलन से प्रेरित, बड़ी साजिश की आशंका”
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit के दौरान यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि यह घटना “नेपाल के हिंसक Gen Z आंदोलन” से प्रेरित हो सकती है और इसके पीछे “बड़ी साजिश” की संभावना है। पुलिस का तर्क है कि आरोपियों को आपस में और डिजिटल सबूतों के साथ “कन्फ्रंट” करना जरूरी है, इसलिए कस्टडी की मांग की गई।
यह समिट दुनिया भर के टेक लीडर्स और प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण हाई-प्रोफाइल था, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां इस घटना को सिर्फ ‘नारेबाजी’ नहीं, बल्कि आयोजन की सुरक्षा और देश की छवि से जोड़कर भी देख रही हैं। इसी वजह से जांच का फोकस “प्लानिंग”, “कोऑर्डिनेशन” और “फंडिंग” तक पहुंच गया है।
क्या हुआ था भारत मंडपम में? – प्रदर्शन का पूरा घटनाक्रम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस की यूथ विंग (Indian Youth Congress) के करीब 10 कार्यकर्ता समिट स्थल के अंदर दाखिल हुए और उन्होंने शर्टलेस (टॉपलेस) प्रदर्शन किया। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रहे थे और उनका विरोध कथित India‑US trade agreement/framework को लेकर था। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और बाद में चार प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया।
इन प्रदर्शनकारियों ने सफेद टी‑शर्ट्स का इस्तेमाल किया जिन पर प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें थीं और कुछ स्लोगन लिखे थे। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि टी‑शर्ट्स पर “PM is compromised”, “India‑US trade deal” और “Epstein Files” जैसे संदेश छपे थे, जिनकी प्रिंटिंग/तैयारी के पैसों का स्रोत अब जांच का विषय है।
दिल्ली पुलिस का कोर्ट में दावा: “बड़ी साजिश”, “फंडिंग ट्रेल” और “डिजिटल सबूत”
दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि यह प्रदर्शन नेपाल के Gen‑Z आंदोलन के पैटर्न से प्रेरित है और इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को बदनाम करना भी हो सकता है। पुलिस ने कहा कि जांच में डिजिटल एविडेंस की भूमिका अहम है और आरोपियों के मोबाइल फोन रिकवर करके यह जांचना जरूरी है कि क्या उन्हें कहीं से फंडिंग या निर्देश मिले थे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कथित झड़प के दौरान कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए और मामले में “गंभीर धाराएं” लगाई जा सकती हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने QR कोड के जरिए प्रवेश लिया और हॉल के भीतर प्रदर्शन किया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में सेंध की आशंका भी उठी।
कोर्ट का रुख: 5 दिन की पुलिस कस्टडी
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पटियाला हाउस कोर्ट ने चार यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। पुलिस पक्ष ने इसे गंभीर मामला बताया और कहा कि पूछताछ जरूरी है, जबकि बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का अधिकार है और उन्हें राजनीतिक कारणों से टारगेट किया जा रहा है।
यानी इस केस में बहस दो बिंदुओं पर टिकती दिख रही है—एक तरफ “साजिश/सुरक्षा उल्लंघन” का एंगल, दूसरी तरफ “शांतिपूर्ण विरोध/अभिव्यक्ति की आज़ादी” का तर्क।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: BJP का हमला, कांग्रेस का बचाव
घटना के बाद BJP कार्यकर्ताओं ने कई राज्यों में कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने इस तरह का प्रदर्शन देश की छवि और प्रगति को नुकसान पहुंचाता है। BJP प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी गतिविधि ने भारत की प्रगति को चोट पहुंचाई है।
वहीं कांग्रेस पक्ष से तर्क यह रहा कि विरोध लोकतंत्र का अधिकार है और यूथ कांग्रेस मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रही थी। कुछ रिपोर्ट्स में कांग्रेस नेताओं ने इसे “ध्यान आकर्षित करने वाला” विरोध बताया और कहा कि उनका उद्देश्य हिंसा या सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना नहीं था।
Police vs Defence vs Politics: दावे एक नजर में (टेबल)
| पक्ष | मुख्य दावा/तर्क |
|---|---|
| दिल्ली पुलिस | नेपाल के Gen‑Z आंदोलन से प्रेरणा, “बड़ी साजिश”, डिजिटल सबूत व फंडिंग की जांच |
| बचाव पक्ष | लोकतांत्रिक/शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, राजनीतिक टारगेटिंग का आरोप |
| BJP | देश की छवि खराब करने का आरोप, कांग्रेस पर कड़ी कार्रवाई की मांग |
| कांग्रेस | विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार बताने का तर्क |
अब आगे क्या? जांच किन बिंदुओं पर टिक सकती है
आने वाले दिनों में जांच की दिशा मुख्य रूप से इन सवालों पर टिक सकती है:
- क्या प्रदर्शन “प्री‑प्लान्ड” था और किसने कोऑर्डिनेट किया?
- टी‑शर्ट प्रिंटिंग और अन्य लॉजिस्टिक्स की फंडिंग किसने की?
- आरोपियों के मोबाइल/डिजिटल सबूत क्या बताते हैं—किससे संपर्क था, क्या निर्देश मिले?
- प्रवेश प्रक्रिया में सुरक्षा चूक कैसे हुई (QR कोड/रजिस्ट्रेशन रूट)?
यह केस केवल राजनीतिक विवाद नहीं रहा—अब यह एक “इवेंट सिक्योरिटी” और “इंटेंट/साजिश” बनाम “प्रोटेस्ट राइट्स” की कानूनी बहस में बदलता दिख रहा है।
FAQs (5)
- AI समिट में यूथ कांग्रेस ने क्या किया था?
लगभग 10 यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता भारत मंडपम के AI समिट स्थल के अंदर पहुंचे और उन्होंने शर्टलेस प्रदर्शन कर PM मोदी और India‑US trade deal/framework के खिलाफ नारे लगाए; चार लोग गिरफ्तार हुए। - दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में क्या दावा किया?
दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह घटना नेपाल के Gen‑Z आंदोलन से प्रेरित “बड़ी साजिश” का हिस्सा हो सकती है और आरोपियों को डिजिटल सबूतों के साथ कन्फ्रंट करना जरूरी है। - पुलिस किन बातों की जांच कर रही है?
पुलिस फंडिंग स्रोतों की जांच कर रही है, खासकर यह कि टी‑शर्ट्स की प्रिंटिंग किसने फाइनेंस की, और डिजिटल एविडेंस/मोबाइल रिकवरी के जरिए कोऑर्डिनेशन की कड़ियां खोजी जा रही हैं। - कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने चार आरोपियों को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। - टी‑शर्ट्स पर क्या लिखा था?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, टी‑शर्ट्स पर “PM is compromised”, “India‑US trade deal” और “Epstein Files” जैसे संदेश थे और तस्वीरें भी थीं।
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