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“इम्पोर्ट लिबरलाइजेशन नहीं होगा” – जयराम रमेश की मांग, ट्रंप टैरिफ रद्द होने के बाद India-US अंतरिम समझौते पर सवाल

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Jairam Ramesh import liberalisation clarification
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US Supreme Court द्वारा ट्रंप की ग्लोबल टैरिफ नीति रद्द किए जाने के बाद कांग्रेस ने PM मोदी से India-US अंतरिम ट्रेड डील ‘होल्ड’ करने और शर्तें फिर से तय करने की मांग की। जयराम रमेश बोले—जब तक अमेरिकी पक्ष से स्पष्ट जवाब न मिले, इम्पोर्ट लिबरलाइजेशन न हो और किसानों के हित सुरक्षित रहें।

“मोदी की जल्दबाजी क्यों?”: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने India-US ट्रेड डील पर फिर बातचीत की मांग उठाई

US Supreme Court के फैसले के बाद India-US ट्रेड डील पर राजनीति तेज: कांग्रेस बोली—“होल्ड करें, फिर से बातचीत करें”

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “ग्लोबल टैरिफ” नीति को असंवैधानिक/अवैध बताते हुए रद्द किए जाने के बाद भारत में India-US अंतरिम ट्रेड डील पर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को फिलहाल “होल्ड” किया जाए और उसकी शर्तों पर दोबारा बातचीत की जाए।

कांग्रेस के मुताबिक, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ गिरा दिए हैं, तो भारत को किसी भी तरह की “इम्पोर्ट लिबरलाइजेशन” (आयात उदारीकरण) की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पार्टी का दावा है कि मौजूदा शर्तें खासकर किसानों के हितों पर असर डाल सकती हैं, इसलिए अमेरिकी पक्ष से स्पष्ट स्पष्टीकरण आने तक सरकार को कदम रोकने चाहिए।

कांग्रेस की मांग क्या है: “इम्पोर्ट लिबरलाइजेशन पर ब्रेक”

कांग्रेस महासचिव (कम्युनिकेशन) जयराम रमेश ने दिल्ली में मीडिया से कहा कि सरकार को साफ-साफ घोषणा करनी चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब तक अमेरिकी पक्ष से स्पष्ट जवाब नहीं मिल जाता, तब तक आयात उदारीकरण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि किसी भी ट्रेड कमिटमेंट से भारतीय किसानों के हित प्रभावित न हों।

जयराम रमेश ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री ट्रंप के उस बयान से सहमत हैं जिसमें ट्रंप ने कोर्ट के फैसले के बावजूद कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील में “कुछ नहीं बदलता।” कांग्रेस ने कहा कि भारत-अमेरिका अंतरिम समझौते के फ्रेमवर्क में बदलाव की गुंजाइश का प्रावधान है, इसलिए शर्तों पर फिर से बातचीत होनी चाहिए।

ट्रंप के टैरिफ रद्द होने का मामला क्या है?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में ट्रंप के व्यापक ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया और कहा कि राष्ट्रपति ने अपनी कानूनी सीमा से ज्यादा अधिकार इस्तेमाल किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखा गया और इसमें यह कहा गया कि IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं मिलता।

यह फैसला ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की प्रमुख आर्थिक नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और इसके ग्लोबल ट्रेड व सप्लाई चेन पर भी असर की चर्चा है। इसी फैसले को आधार बनाकर कांग्रेस भारत में “डील रोकने” का तर्क रख रही है।

कांग्रेस ने “मोदी की जल्दबाजी” पर सवाल क्यों उठाया?

जयराम रमेश ने कहा कि दिसंबर से यह चर्चा थी कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कभी भी आ सकता है और कई लोगों को उम्मीद थी कि ट्रंप के टैरिफ गिर सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस का सवाल है कि सरकार ने जल्दबाजी में अंतरिम डील क्यों की।

उन्होंने यह भी दावा किया कि 2 फरवरी को ट्रंप ने डील की घोषणा करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री के अनुरोध पर यह “effective immediately” है। कांग्रेस ने पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री को इतनी जल्दी घोषणा कराने की जरूरत क्यों पड़ी।

India-US अंतरिम ट्रेड डील में किन टैरिफ नंबरों की चर्चा है?

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत और अमेरिका ने अंतरिम समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क पर सहमति जताई, जिसमें अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए जाने वाले “रिसिप्रोकल टैरिफ” को 25% से घटाकर 18% करने की बात कही गई है।

साथ ही, ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए भारत पर रूस से तेल खरीद को लेकर लगाए गए 25% “पेनल्टी टैरिफ” को हटाने का भी जिक्र किया है। अमेरिकी पक्ष ने इसे इस शर्त से जोड़ा कि भारत रूसी ऊर्जा का प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष आयात रोकने की प्रतिबद्धता दिखाए और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदे।

ट्रंप का “Nothing changes” बयान और भारत की स्थिति

कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ डील में “Nothing changes” और भारत टैरिफ देगा जबकि अमेरिका नहीं देगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने उनके अनुरोध पर रूस से तेल लेने में “pull way back” किया।

यही वह बिंदु है जिस पर कांग्रेस सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रही है—क्या भारत सरकार ट्रंप के दावों को स्वीकार करती है या नहीं, और क्या कोर्ट के फैसले के बाद डील की कानूनी/नीतिगत स्थिति बदलती है।

राहुल गांधी का आरोप: “मोदी compromised”

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर राजनीतिक हमला बोला और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री “compromised” हैं। राहुल ने कहा कि India-US अंतरिम ट्रेड डील में प्रधानमंत्री का “betrayal” (विश्वासघात) अब उजागर हो गया है। कांग्रेस ने इस डील को देश के लिए “ordeal” यानी एक कठिन परीक्षा/संकट जैसी स्थिति बताया।

कांग्रेस का नैरेटिव यह है कि सरकार ने दबाव या जल्दबाजी में ऐसी प्रतिबद्धताएं कर दीं जो आगे चलकर किसानों, घरेलू उद्योग और आयात नीति पर असर डाल सकती हैं।

इस मुद्दे का असर: नीति, राजनीति और किसानों की चिंता

ट्रेड डील जैसे मामलों में असली चिंता यह रहती है कि किन सेक्टर्स में मार्केट एक्सेस दिया जा रहा है, और उसके बदले भारत को क्या फायदा या नुकसान हो सकता है। कांग्रेस ने “किसान हित” को केंद्र में रखकर यह मांग की है कि जब तक अमेरिकी पक्ष से स्पष्ट और लिखित स्पष्टीकरण न आए, तब तक कोई नई उदारीकरण नीति लागू न हो।

सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह एक तरफ अमेरिका के साथ संबंधों और व्यापारिक हितों को बनाए रखे, दूसरी तरफ घरेलू राजनीति में उठ रहे सवालों—खासतौर पर कृषि और आयात पर—का ठोस जवाब दे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब भारत में इस समझौते की टाइमिंग और शर्तें दोनों पर बहस तेज होने की संभावना है।

FAQs (5)

  1. कांग्रेस ने India-US ट्रेड डील को लेकर क्या मांग की है?
    कांग्रेस ने मांग की है कि भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील को फिलहाल होल्ड किया जाए और उसकी शर्तों पर दोबारा बातचीत करके उन्हें री-नेगोशिएट किया जाए।
  2. कांग्रेस “इम्पोर्ट लिबरलाइजेशन” रोकने की बात क्यों कर रही है?
    जयराम रमेश ने कहा कि जब तक अमेरिकी पक्ष से स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं आता और किसानों के हित सुरक्षित नहीं होते, तब तक किसी भी तरह का आयात उदारीकरण नहीं होना चाहिए।
  3. US Supreme Court ने ट्रंप के टैरिफ पर क्या फैसला दिया?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में ट्रंप के व्यापक ग्लोबल टैरिफ को अवैध बताया और कहा कि राष्ट्रपति ने IEEPA के तहत अपनी कानूनी सीमा से ज्यादा अधिकार इस्तेमाल किए।
  4. India-US अंतरिम समझौते में किन टैरिफ नंबरों का जिक्र है?
    रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी “रिसिप्रोकल टैरिफ” भारत पर 25% से घटाकर 18% किए जाने की बात है, और रूस से तेल खरीद पर भारत पर लगाए गए 25% पेनल्टी टैरिफ को हटाने का भी जिक्र है।
  5. ट्रंप ने कोर्ट के फैसले के बाद India-US डील पर क्या कहा?
    ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ डील में “Nothing changes” और भारत टैरिफ देगा; इसी पर कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री ट्रंप के दावे से सहमत हैं।

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