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चेन्नामनेनी रमेश का पेंशन घोटाला? गैर-भारतीय घोषित फिर भी सरकारी पैसे ले रहे, विधानसभा पर दबाव बढ़ा

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BRS Ex-MLA Ramesh Challenged as Foreign Citizen Yet Receives Govt Perks
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तेलंगाना हाईकोर्ट ने पूर्व BRS विधायक चेन्नामनेनी रमेश को जर्मन नागरिक घोषित कर 30 लाख जुर्माना लगाया, फिर भी उन्हें 60 हजार मासिक पेंशन मिल रही। कांग्रेस MLA आदि श्रीनिवास ने पेंशन रोकने की मांग की, रिकवरी की मांग।

HC ने जर्मन नागरिक ठहराया, फिर भी पूर्व BRS MLA को पेंशन: कांग्रेस MLA का हाईकोर्ट जाने का ऐलान

चेन्नामनेनी रमेश पेंशन विवाद: जर्मन नागरिक घोषित पूर्व BRS विधायक को सरकारी पैसे, कांग्रेस ने दी चेतावनी

तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले के एक साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी पूर्व बीआरएस विधायक चेन्नामनेनी रमेश को विधायक पेंशन मिल रही है। कोर्ट ने उन्हें भारतीय नागरिक न बताते हुए जर्मन नागरिक घोषित किया था और चुनाव लड़ने के समय नागरिकता छिपाने के लिए 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। फिर भी वे हर महीने लगभग 60 हजार रुपये की पेंशन ले रहे हैं। कांग्रेस विधायक आदि श्रीनिवास ने विधानसभा सचिव को पत्र लिखकर पेंशन तुरंत रोकने और पहले मिले वेतन, भत्तों की वसूली की मांग की है।

रमेश ने वेमुलावाड़ा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके हैं। दिसंबर 2023 से वे 50 हजार रुपये से ज्यादा की मासिक पेंशन ले रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने 30 लाख का जुर्माना भर दिया, लेकिन पेंशन पर कोई असर नहीं पड़ा। श्रीनिवास ने कहा कि पिछली मांग पर कोई कार्रवाई न होने से वे फिर पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट में फिर जाएंगे।

कोर्ट का फैसला और पृष्ठभूमि

2018 के विधानसभा चुनाव में श्रीनिवास ने रमेश की जर्मन नागरिकता को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि रमेश ने जर्मन पासपोर्ट छिपाया था। कोर्ट ने उन्हें भारतीय विधायक के तौर पर अयोग्य ठहराया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) खारिज हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनावी अवधि समाप्त हो चुकी है, इसे दोबारा नहीं उठाया जा सकता। कोर्ट ने वेतन या पेंशन वसूली का मुद्दा नहीं छुआ।

पूर्व एडवोकेट जनरल के. रामकृष्ण रेड्डी ने कहा कि विधानसभा सचिव के पास पेंशन पर फैसला लेने की शक्ति नहीं। स्पीकर को कोर्ट केस के निपटारे के बाद निर्णय लेना होगा। श्रीनिवास कोर्ट जा सकते हैं। रमेश के करीबी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन मुद्दा नहीं उठाया।

तेलंगाना विधानसभा नियम: पूर्व विधायकों को क्या मिलता है?

तेलंगाना विधानसभा के नियमों के तहत पूर्व विधायकों को पेंशन, मेडिकल रीइंबर्समेंट और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। चार टर्म वाले विधायक को अधिक पेंशन। रमेश को प्रति माह 50-60 हजार रुपये। लेकिन गैर-भारतीय होने पर ये सुविधाएं रुक सकती हैं या नहीं, इस पर अस्पष्टता। असेंबली सचिव ने पहले बताया कि हाईकोर्ट ने वेतन वसूली का आदेश नहीं दिया और नियमों में प्रावधान नहीं।

सुविधाराशि (मासिक)चार टर्म विधायक को
पेंशन50,000+ रुपयेअधिक योग्यता
मेडिकल रीइंबर्समेंटअसीमित (कुछ सीमा)परिवार सहित
अन्य भत्तेयात्रा, आवासविधायकी काल के बाद भी

कांग्रेस का राजनीतिक हमला

कांग्रेस विधायक आदि श्रीनिवास ने इसे सरकारी खजाने का दुरुपयोग बताया। उन्होंने कहा कि गैर-नागरिक को सरकारी पैसे देना गलत। वेमुलावाड़ा में स्थानीय मुद्दा बन सकता। बीआरएस पर भ्रष्टाचार का आरोप। बीआरएस ने बचाव किया कि कोर्ट ने केवल जुर्माना लगाया, पेंशन पर कुछ नहीं कहा।

कानूनी जटिलताएं

पूर्व एजी रेड्डी के मुताबिक, पेंशन वसूली विधानसभा स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में। लेकिन कोर्ट केस खत्म होने के बाद। सुप्रीम कोर्ट SLP में वेतन रिकवरी नहीं उठी। नागरिकता कानून के तहत विदेशी नागरिक सरकारी लाभों के हकदार नहीं। लेकिन पूर्व विधायकों के पेंशन पर स्पष्ट नियम नहीं।

रमेश की पृष्ठभूमि

चेन्नामनेनी रमेश वेमुलावाड़ा से चार बार बीआरएस (पूर्व टीआरएस) विधायक रहे। जर्मन नागरिकता का मामला 2018 से चला। कोर्ट ने पाया कि उन्होंने जर्मन पासपोर्ट छिपाया। जुर्माना भरा लेकिन पेंशन जारी। अब विवाद फिर गरमाया।

संभावित परिणाम

अगर पेंशन रुकी तो लाखों रुपये रिकवर। वरना कोर्ट लड़ाई लंबी। राजनीतिक रूप से बीआरएस पर दबाव। तेलंगाना में विधायकों की पेंशन नीति पर बहस छिड़ सकती। अन्य मामलों में उदाहरण बनेगा।

5 FAQs

  1. चेन्नामनेनी रमेश को क्या सजा मिली?
    तेलंगाना हाईकोर्ट ने जर्मन नागरिक घोषित कर 30 लाख जुर्माना लगाया, चुनाव लड़ने में नागरिकता छिपाने पर।
  2. फिर भी उन्हें पेंशन क्यों मिल रही?
    विधानसभा नियमों के तहत पूर्व विधायकों को पेंशन। कोर्ट ने वसूली का आदेश नहीं दिया।
  3. कांग्रेस की मांग क्या?
    पेंशन तुरंत रोकें, पहले मिले वेतन-भत्ते वसूलें। हाईकोर्ट जाने की चेतावनी।
  4. विधानसभा सचिव ने क्या कहा?
    कोर्ट ने रिकवरी नहीं मांगी, नियमों में प्रावधान नहीं।
  5. अब क्या होगा?
    स्पीकर फैसला लेंगे या कोर्ट जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट SLP खारिज हो चुकी।

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