राज ठाकरे ने RSS चीफ मोहन भागवत के भाषा आंदोलन को ‘बीमारी’ कहने पर तीखा प्रहार। कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे राज्यों का उदाहरण। हिंदी थोपने का आरोप। MNS चीफ: मराठी अस्मिता सर्वोपरि। महाराष्ट्र त्वेष से खड़ा होगा।
राज ठाकरे का मोहन भागवत पर तीखा प्रहार: भाषा प्रेम को ‘बीमारी’ न कहें
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने RSS सरसंघचालक मोहन भागवत के भाषा आंदोलन को ‘बीमारी’ बताने वाले बयान पर जोरदार हमला बोला। 8 फरवरी मुंबई कार्यक्रम में भागवत ने भाषाई आग्रह को रोग कहा था। राज ने X पर लंबा बयान जारी कर कहा – भाषा-प्रांत प्रेम अधिकांश राज्यों में है। कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, गुजरात के उदाहरण दिए। हिंदी थोपने का आरोप लगाते हुए बोले – पहले सरकार को सुधारो।
MNS चीफ ने RSS को अप्रत्यक्ष राजनीति का दोषी ठहराया। कहा – मराठी अस्मिता MNS का मूल है, ऐसी स्थिति में महाराष्ट्र त्वेष से उठेगा। आर्टिकल में पूरा विवाद – बयान, जवाब, पृष्ठभूमि। चलिए डिटेल समझते हैं।
मोहन भागवत का विवादित बयान: भाषा आंदोलन को बताया ‘आजार’
8 फरवरी RSS शताब्दी कार्यक्रम में भागवत ने कहा – भाषा पर अड़ा रहना, आंदोलन करना एक तरह का रोग है। इसे फैलने से रोकना चाहिए। स्थानीय प्रश्नों का जवाब देते हुए फेडरल स्ट्रक्चर पर जोर। लेकिन राज ठाकरे ने इसे अस्वीकार किया।
राज: “भाषा प्रेम बीमारी नहीं, अधिकांश राज्यों में मौजूद। ऐतिहासिक कारण – भाषाई आधार पर राज्य पुनर्गठन।”
राज ठाकरे का पलटवार: देशभर के उदाहरण, RSS पर सवाल
- क्षेत्रीय उदाहरण: कन्नड़, तमिल, बंगाली, पंजाबी, गुजराती अस्मिता।
- माइग्रेशन इश्यू: UP-बिहार से आने वाले हिंसा, वोट बैंक।
- गुजरात कांड: 2002 में माइग्रेंट्स भगाए गए।
- RSS सवाल: भाईय्याजी जोशी का मुंबई भाषा बयान।
राज: “महाराष्ट्र के कमजोर शासकों के कारण बोल रहे। मराठी सहनशील नहीं।”
हिंदी थोपने का आरोप: राष्ट्रीय भाषा नहीं
राज ने केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का इल्जाम लगाया। कहा – पहले सरकार को टोकें, फिर हमें उपदेश दें। RSS को राजनीतिक हस्तक्षेप बंद करने को कहा। संगठन का सम्मान लेकिन राजनीति से दूर रहें।
हिंदुत्व बहस में घसीटने पर चेतावनी
राज: MNS ने दंगे, लाउडस्पीकर, नोइज पॉल्यूशन पर सख्ती की – सभी धर्मों पर। हिंदुत्व के नाम कांवर यात्रा, गौहत्या निर्यात पर RSS चुप। व्यापारियों-सरकार को कब जवाबदेह बनाएंगे?
MNS का स्टैंड: मराठी अस्मिता सर्वोच्च
“भाषा-प्रांत अस्मिता देश में रहेगी। महाराष्ट्र में तो जरूर। ये हमारी पहचान। ऐसी स्थिति में महाराष्ट्र क्रोध से उठेगा।” MNS का वजूद इसी पर।
राजनीतिक पृष्ठभूमि: महाराष्ट्र में भाषा विवाद
मराठी vs हिंदी बहस पुरानी। RSS-BJP का एक राष्ट्र, एक भाषा। MNS का सोन-of-soil। BMC चुनाव, माइग्रेशन इश्यू।
| पक्ष | स्टैंड |
|---|---|
| RSS (भागवत) | भाषा आंदोलन रोग |
| MNS (राज) | अस्मिता हक, हिंदी थोप निषेध |
| उदाहरण | कर्नाटक, तमिलनाडु आंदोलन |
भविष्य: भाषा बहस तेज होगी
2026 BMC चुनाव से पहले नैरेटिव। राज का चेतावनीपूर्ण संदेश। RSS जवाब दे सकता।
5 FAQs
Q1: भागवत ने क्या कहा?
A: भाषा आंदोलन ‘बीमारी’।
Q2: राज ने क्यों तीखा जवाब?
A: अस्मिता हक, सभी राज्यों में।
Q3: हिंदी का मुद्दा?
A: थोपना बंद करें।
Q4: MNS स्टैंड?
A: मराठी प्राथमिकता।
Q5: आगे क्या?
A: बहस तेज, चुनाव प्रभाव।
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