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RSS सरसंघचालक बोले- योग, नदी-वृक्ष पूजा सबके लिए, धर्म एक ही!

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Hindu Dharma is Human Dharma – Welcome Muslims Worshipping Nature!
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RSS सरसंघचालक दत्तात्रेय होसबले ने Gorakhpur में कहा- प्रकृति पूजा सभी के लिए, मुस्लिम नदी-वृक्ष पूजें तो ठीक। हिंदू समाज पर्यावरण रक्षक बने, संस्कृति एक, धर्म मानव कल्याण का। योग सबका!

प्रकृति संरक्षण से राष्ट्र उत्थान: RSS का संदेश- हिंदू समाज पर्यावरण रक्षक बने, सभी धर्म साथ!

आरएसएस सरसंघचालक दत्तात्रेय होसबले का Gorakhpur संदेश: प्रकृति पूजा सबके लिए, कोई नुकसान नहीं

17 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश के Gorakhpur में खोराबाड़ मैदान पर हुए हिंदू सम्मेलन में आरएसएस के सरसंघचालक दत्तात्रेय होसबले ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति पूजा भारत की सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है और ये किसी व्यक्ति या समुदाय को नुकसान नहीं पहुंचाती, चाहे कोई भी धर्म हो। भारत की सभ्यता प्रथाएं हमेशा प्रकृति संरक्षण और सामूहिक कल्याण पर टिकी रहीं। आरएसएस किसी समुदाय को दुश्मन नहीं मानता, राष्ट्र प्रगति के लिए समावेशिता जरूरी है।

होसबले ने कहा, “अगर मुस्लिम भी नदियां और वृक्ष पूजते हैं, तो इसमें कोई गलती नहीं। ये परंपराएं प्रकृति संरक्षण और सामूहिक भलाई से जुड़ी हैं।” योग जैसी प्रथाओं को धार्मिक चश्मे से न देखें। हिंदू समाज को धर्म का रक्षक बनना चाहिए और पर्यावरण क्षरण, जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना चाहिए। अनुशासित समाज राष्ट्र को सर्वोच्च गौरव की ओर ले जाएगा।

भारतीय संस्कृति की एकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “भारतीय सांस्कृतिक जड़ें एक हैं। पूजा के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन धर्म एक है – सनातन। धर्म जीवन जीने की कला है।” सनातन धर्म के अनुयायी मानवता के कल्याण के लिए सार्वभौमिक मूल्यों को बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएं। “हमारे पूर्वजों ने हिंदू धर्म को मानव धर्म कहा। कोई भी देश का व्यक्ति इसे अपना सकता है।”

बच्चों को आध्यात्मिकता, साहित्य, संस्कृति और धर्म से जोड़ना जरूरी। आरएसएस सामाजिक समरसता, नागरिक जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने पर काम कर रहा। ये बयान धर्म, संस्कृति और पहचान पर चल रही बहसों के बीच आए, जहां आरएसएस सांस्कृतिक समावेशिता और पर्यावरण जागरूकता पर जोर दे रहा।

आरएसएस के प्रकृति संरक्षण दृष्टिकोण: ऐतिहासिक जड़ें

भारतीय परंपराओं में प्रकृति पूजा गहरी जड़ें रखती। वेदों से लेकर पुराणों तक नदियां (गंगा, यमुना) मां मानी जातीं। वृक्ष पूजा (पीपल, बरगद) पर्यावरण संतुलन का प्रतीक। आयुर्वेद में जड़ी-बूटियां प्रकृति से। योग और प्राणायाम प्रकृति तत्वों से प्रेरित। होसबले का संदेश आधुनिक पर्यावरण संकट (जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई) से जुड़ता। ICMR रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में 70% जल संकट प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से। आरएसएस शाखाओं में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान चलते।

समावेशिता का संदेश: सभी धर्मों के लिए

होसबले ने मुस्लिमों को नदी-वृक्ष पूजा में शामिल होने का स्वागत किया। भारत में सूफी संतों ने प्रकृति भक्ति की। हजरत निजामुद्दीन औलिया ने यमुना पूजा की परंपरा शुरू की। इस्लाम में भी जल संरक्षण (वुजू) महत्वपूर्ण। हिंदू-मुस्लिम एकता के उदाहरण: बकरीद पर वृक्ष दान, गंगा में मुहर्रम जुलूस। आरएसएस का ‘सबका साथ’ BJP के स्लोगन से मेल खाता।

हिंदू समाज की भूमिका: चुनौतियों का सामना

  • पर्यावरण क्षरण: ग्लोबल वार्मिंग से भारत में 2025 में बाढ़-सूखा बढ़ा (NDMA डेटा)।
  • जल संकट: 600 मिलियन लोग पानी की कमी झेल रहे (NITI आयोग)।
  • सांस्कृतिक एकता: विविधता में एकता, सनातन मूल्य।

होसबले ने हिंदू समाज को लीडर बनाने को कहा। आरएसएस की 6 मिलियन शाखाएं अनुशासन सिखातीं।

आरएसएस vs आलोचना: बहस का केंद्र

कुछ आलोचक आरएसएस को हिंदुत्व पर फोकस मानते, लेकिन होसबले ने इसे ‘मानव धर्म’ बताया। योग को UN ने इंटरनेशनल डे बनाया, सभी धर्म अपनाते। पर्यावरण पर RSS के कार्यक्रम: गंगा सफाई, वन संरक्षण। राजनीतिक बहस में ये बयान शांति संदेश।

5 FAQs

  1. दत्तात्रेय होसबले ने गोर्कपुर में क्या कहा?
    प्रकृति पूजा किसी को नुकसान नहीं, मुस्लिम भी करें तो ठीक।
  2. आरएसएस प्रकृति पूजा को कैसे देखता?
    भारतीय परंपरा का हिस्सा, संरक्षण और कल्याण के लिए।
  3. होसबले ने हिंदू समाज की भूमिका क्या बताई?
    धर्म रक्षक बने, पर्यावरण-जल संकट से लड़े।
  4. सनातन धर्म को उन्होंने क्या कहा?
    मानव धर्म, सभी अपना सकते।
  5. योग पर उनका नजरिया?
    धार्मिक चश्मे से न देखें, सभी के लिए
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