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Bhishma Dwadashi 2026 की निर्वाण तिथि: 29 जनवरी को Vrat-दान क्यों जरूरी?

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Bhishma Dwadashi 2026
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Bhishma Dwadashi 2026: 29 जनवरी, द्वादशी तिथि दोपहर 1:55 से। पूजा विधि, विष्णु सहस्रनाम, व्रत-दान फायदे। भीष्म पितामह के मोक्ष दिवस का महत्व, पितर तर्पण। शास्त्रीय कथा और उपाय। 

Bhishma Dwadashi 2026: तिथि, समय, पूजा विधि, महत्व और फायदे – पितरों के उद्धार का दिवस

दोस्तों, महाभारत के ग्रैंडसायर भीष्म पितामह को कौन नहीं जानता? इच्छा मृत्यु वरदान पाने वाले इस महामानव ने उत्तरायण काल में ही मोक्ष चुना। माघ शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता भीष्म द्वादशी या गोविंद द्वादशी। 2026 में ये 29 जनवरी को है। द्वादशी तिथि 29 जनवरी दोपहर 1:55 बजे शुरू, 30 जनवरी सुबह 11:09 तक। इस दिन व्रत, पूजा, दान से पाप नाश, पितर शांति, संतान सुख। विष्णु सहस्रनाम पाठ का विशेष महत्व – भीष्म ने ही सुनाया था। इस आर्टिकल में पूरी डिटेल – शास्त्रीय कथा, पूजा स्टेप्स, फायदे, उपाय। मकर संक्रांति के 17-18 दिन बाद आता ये पर्व। आज से तैयारी शुरू करो!

भीष्म द्वादशी 2026 की तिथि और समय
उदय तिथि से व्रत – 29 जनवरी 2026।

इवेंटतारीख और समय
भीष्म द्वादशीगुरुवार, 29 जनवरी 2026
द्वादशी तिथि शुरू29 जनवरी, दोपहर 1:55 बजे
द्वादशी तिथि समाप्त30 जनवरी, सुबह 11:09 बजे
मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान। पंचांग से लोकल चेक।

भीष्म द्वादशी का महत्व: भीष्म पितामह की कथा
महाभारत युद्ध के बाद भीष्म बाण शैय्या पर लेटे। उत्तरायण शुरू होने पर इच्छा मृत्यु छोड़ मोक्ष ग्रहण। युधिष्ठिर ने पूछा धर्म-अर्थ। भीष्म ने विष्णु सहस्रनाम सुनाया – “न मोक्षः विना विष्णुं न विष्णुः विना मोक्षः”। शास्त्र: इस दिन पूजा से पितर प्रसन्न, मोक्ष मिलता। गोविंद द्वादशी भी कहते – विष्णु भक्ति। पाप नाश, संतान भक्ति, शांति। मकर के बाद 12वें दिन।

भीष्म पितामह कौन? इच्छा मृत्यु वरदान
राजा शांतनु पुत्र, गंगा संतान। भीष्म प्रतिज्ञा – सिंहासन त्याग। परशुराम से वरदान – मृत्यु काल खुद चुनें। कुरु वंश रक्षक। महाभारत में न्यूट्रल रहे। मोक्ष पर विष्णु भक्त बने।

भीष्म द्वादशी पूजा विधि: स्टेप बाय स्टेप

  1. प्रोढ उदय: सूर्योदय से पहले स्नान। सफेद वस्त्र धारण।
  2. संकल्प: विष्णु-भीष्म मूर्ति/फोटो के आगे व्रत संकल्प।
  3. पूजा सज्जा: पीला आसन, चंदन, पुष्प, तुलसी, फल, मिठाई।
  4. विष्णु सहस्रनाम पाठ: मुख्य। 108 बार “ओम नमो भगवते वासुदेवाय”।
  5. भीष्म पूजा: खीर-लापसी भोग।
  6. दान: ब्राह्मण को पीले वस्त्र, फल, दान।
  7. आरती-प्रसाद: परिवार संग। व्रत शाम तोड़ें।
    शाम को गंगा स्नान उत्तम।

व्रत के फायदे और शास्त्रीय महत्व

  • पितर दोष नाश, मोक्ष।
  • संतान सुख, धन-धान्य।
  • विष्णु कृपा।
    स्कंद पुराण: द्वादशी व्रत मोक्षदायी। भीष्म ने कहा – सहस्रनाम से सब सिद्धि।

भोजन और उपवास नियम
फलाहार। खीर, दूध, फल। तामसिक अवॉइड। ब्राह्मण भोजन।

दान क्या करें?

दान सामग्रीफायदा
पीले वस्त्रपितर शांति
खीर-फलसंतान सुख
तिल-गुड़पाप नाश
गाय-कमंडलुमोक्ष

आधुनिक संदर्भ: भीष्म से सीख
त्याग, धर्म पालन। आज स्ट्रेस में इच्छा मृत्यु जैसा कंट्रोल।

अन्य नाम और संबंध
गोविंद द्वादशी। मकर से 17 दिन बाद।

महिलाओं स्पेशल
संतान प्राप्ति व्रत।

वैज्ञानिक टच
व्रत से माइंडफुलनेस, दान से हैप्पीनेस हार्मोन।

सावधानियां
शुद्धता। पंचांग चेक।

5 FAQs
1. भीष्म द्वादशी कब है 2026 में?
29 जनवरी, गुरुवार।

2. पूजा का मुख्य भाग?
विष्णु सहस्रनाम पाठ।

3. व्रत के फायदे?
पितर मोक्ष, पाप नाश, संतान सुख।

4. दान क्या करें?
पीले वस्त्र, खीर, फल ब्राह्मण को।

5. महत्व क्यों?
भीष्म का मोक्ष दिवस, उत्तरायण में।

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