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कौन हैं ये 89 भारतीय? US की ‘सबसे ख़तरनाक अपराधी’ लिस्ट में 21 गुजरातियों के नाम क्यों?

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US DHS की ‘worst criminal aliens’ लिस्ट में 89 भारतीय, जिनमें 21 गुजराती शामिल। मनी लॉन्ड्रिंग, फ्रॉड, सेक्स अपराध, ड्रग्स और अवैध माइग्रेशन नेटवर्क का पूरा विश्लेषण सरल भाषा में।

US ने किन भारतीयों को बनाया ‘worst criminal aliens’? 21 गुजरातियों पर भारी आरोप

अमेरिका की ‘worst of the worst criminal aliens’ लिस्ट में 89 भारतीय: 21 गुजराती क्यों चर्चा में?

अमेरिका ने एक नई लिस्ट जारी की है, जिसमें दुनिया भर के उन विदेशी नागरिकों के नाम हैं जिन्हें वहां की एजेंसियां “worst of the worst criminal aliens” यानी सबसे ख़तरनाक आपराधिक विदेशी मान रही हैं। इस सूची में 89 भारतीयों के नाम शामिल हैं, और इनमें से 21 लोग गुजरात से हैं। यह लिस्ट 7 फरवरी को अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने जारी की, जो US Immigration and Customs Enforcement (ICE) की गिरफ्तारियों पर आधारित है।

भारतीयों के लिए यह खबर सिर्फ इमेज का सवाल नहीं बल्कि अवैध माइग्रेशन, फाइनेंशियल क्राइम और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल उठाती है। खास तौर पर गुजरात के 21 नामों ने यह दिखाया कि विदेश जाने की दौड़ में कुछ लोग किस हद तक अपराध के रास्ते पर उतर जाते हैं।

ये लिस्ट क्या है और क्यों बनी?

सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि यह लिस्ट किस संदर्भ में आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में “मास डिपोर्टेशन” यानी बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों को निकालने की नीति पर जोर दिया। इसी दिशा में होमलैंड सिक्योरिटी ने उन विदेशी नागरिकों की सूची जारी की, जिन्हें गंभीर अपराधों के कारण प्राथमिकता से देश से बाहर भेजने की सिफारिश की गई है।

इस सूची में अलग-अलग देशों के नागरिक हैं, लेकिन भारतीयों के 89 नामों पर अलग से ध्यान गया, क्योंकि भारत को आम तौर पर “स्किल्ड माइग्रेंट्स” के रूप में देखा जाता है, न कि “क्रिमिनल एलियंस” के रूप में। फिर जब पता चला कि इनमें से 21 नाम सिर्फ गुजरात से हैं, तो सवाल और गहरे हो गए कि आखिर यह पैटर्न क्यों बन रहा है।

21 गुजराती क्यों खास फोकस में आए?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जो 21 गुजराती इस लिस्ट में हैं, उनमें ज्यादातर उत्तर और मध्य गुजरात के जिलों से हैं। यानी यह कोई एक शहर या कस्बा नहीं, बल्कि पूरा एक बेल्ट है जहां से लोग अवैध रास्तों से अमेरिका पहुंचने और फिर वहां किसी न किसी तरह के अपराध में फंसने या शामिल होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

गुजरात पहले से ही “डंकी रूट” यानी अवैध तरीके से अमेरिका, कनाडा या यूरोप जाने के मामले में बदनाम रहा है। लेकिन यहां जो नाम सामने आए हैं, वे सिर्फ अवैध तरीके से पहुंचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने वहां पहुंचकर अलग-अलग गंभीर अपराधों में भी भागीदारी की है।

किस तरह के अपराधों में फंसे हैं ये भारतीय?

DHS की लिस्ट के मुताबिक, इन भारतीय नागरिकों पर जो मुख्य अपराध दर्ज हैं, वे इस तरह हैं:

  • मनी लॉन्ड्रिंग और फ्रॉड
  • आइडेंटिटी थेफ्ट और अन्य फाइनेंशियल क्राइम
  • माइनर्स से जुड़े सेक्सुअल ऑफेन्स, ऑनलाइन एक्सप्लॉइटेशन
  • ड्रग ट्रैफिकिंग और ड्रग पजेशन
  • डोमेस्टिक वायलेंस, रॉबरी
  • चोरी और स्टोलन प्रॉपर्टी का कारोबार

मनी लॉन्ड्रिंग और फ्रॉड के केस

रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीयों – जिनमें कुछ गुजराती भी शामिल हैं – पर आरोप है कि वे बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग और फ्रॉड स्कीम्स में शामिल थे। उदाहरण के लिए, Avi Patel, Brijeshkumar Patel और Sagarkumar Patel जैसे नाम ऐसे मामलों में सामने आए हैं। इन स्कीम्स में नकली कंपनियों, फर्जी बैंक अकाउंट्स और “म्यूल अकाउंट्स” का इस्तेमाल कर पैसे को घुमाया जाता है।

अमेरिकी इन्वेस्टिगेटर्स का मानना है कि इस तरह के क्राइम अकेले नहीं होते। इनके पीछे पूरे नेटवर्क होते हैं जो इमिग्रेशन के लूपहोल्स, फर्जी पहचान पत्र और इंटरनेशनल मनी चैनलों का फायदा उठाते हैं। कई केसों में भारत और अमेरिका दोनों तरफ दलालों और एजेंटों का रोल सामने आता है, जो अवैध तरीके से पहुंचे युवाओं को ऐसे रैकेट्स में धकेल देते हैं।

बुजुर्गों को टारगेट करने वाले फ्रॉड

कई मामलों में ये भारतीय अमेरिकी बुजुर्ग नागरिकों को निशाना बनाते हैं। फोन स्कैम, फर्जी IRS कॉल, सोशल सिक्योरिटी ब्लॉक होने की धमकी, लॉटरी या प्राइज स्कैम – ये सब पुराने लेकिन बेहद असरदार तरीके हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुसार, बुजुर्ग लोग इन स्कैम्स के लिए सबसे आसान टारगेट हैं, क्योंकि वे या तो अकेले रहते हैं या उन्हें डिजिटल फ्रॉड की बारीक समझ नहीं होती।

US ऑफिशियल्स का कहना है कि ये अपराध “opportunistic” यानी सिर्फ मौके का फायदा उठाने वाले नहीं होते, बल्कि इनमें अच्छी प्लानिंग, कोऑर्डिनेशन और बार‑बार टारगेट करने का पैटर्न होता है। यानी एक पूरी “फैक्टरी” की तरह ये स्कैम चलते हैं, जिनके पीछे कॉल सेंटर, स्क्रिप्ट, डेटा लिस्ट और पेमेंट चैनल तक सब व्यवस्थित होता है।

माइनर्स के साथ सेक्सुअल अपराध

लिस्ट में शामिल कुछ नाम ऐसे भी हैं जिन पर बच्चों के साथ यौन अपराध, ऑनलाइन एक्सप्लॉइटेशन और एंटाइसमेंट (फुसलाकर बुलाना) जैसे आरोप हैं। DHS की रिपोर्ट के अनुसार, Bhaveshkumar Shukla, Hardikkumar Patel, Mayurkumar Patel और Chintan Bhojak जैसे नाम इस कैटेगरी में आते हैं।

ये केस अमेरिका की नज़र में हाई‑प्रायोरिटी हैं, क्योंकि इनमें सार्वजनिक सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा सीधे दांव पर होती है। ऐसे केसों में अमेरिकी एजेंसियां न सिर्फ सख्त सज़ा दिलाने की कोशिश करती हैं, बल्कि बाद में डिपोर्टेशन को भी प्राथमिकता देती हैं ताकि अपराधी दोबारा US में न रह सकें।

ड्रग्स, चोरी और अन्य हिंसक अपराध

कुछ भारतीयों पर ड्रग ट्रैफिकिंग और ड्रग पजेशन के केस दर्ज हैं। ये लोग अलग‑अलग राज्यों में पकड़े गए, जहां वे या तो स्मगलिंग नेटवर्क का हिस्सा थे या लोकल ड्रग डीलिंग में शामिल पाए गए।

इसके अलावा, कई केसों में रॉबरी, घरेलू हिंसा, और चोरी के गुटों के साथ जुड़ाव जैसे आरोप हैं। स्टोलन प्रॉपर्टी खरीदना‑बेचना भी एक बड़ा रैकेट है, जिसमें चोरी की गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक्स या अन्य महंगी चीजों को नकद में बेचकर ब्लैक मार्केट से लिंक किया जाता है।

अवैध माइग्रेशन और ‘अमेरिकन ड्रीम’ की काली सच्चाई

इन केसों को समझते समय यह देखना जरूरी है कि इनमें से काफी लोग अमेरिका कानूनी रास्तों से नहीं पहुंचे। कई ने फर्जी डॉक्यूमेंट्स, स्मगलिंग रूट्स या ओवरस्टे वीज़ा का सहारा लिया। गुजरात और भारत के कुछ हिस्सों से “डंकी रूट” का ट्रेंड बढ़ा है, जहां एजेंट लाखों रुपये लेकर लोगों को मैक्सिको, कनाडा या दूसरे देशों के रास्ते अमेरिका में घुसाने की कोशिश करते हैं।

जब यह लोग वहां पहुंचते हैं तो उनके पास लीगल वर्क परमिट नहीं होता, स्थिर आय नहीं होती और पीछे एजेंट का कर्ज भी होता है। ऐसे में कुछ लोग जल्दी पैसे के लालच या मजबूरी में गलत रास्ते चुन लेते हैं – जैसे कॉल सेंटर स्कैम, नकली डॉक्यूमेंट्स, या ड्रग्स से जुड़े काम। धीरे‑धीरे ये छोटे अपराध बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं।

DHS और ICE की डिपोर्टेशन पॉलिसी

DHS की ‘worst of the worst criminal aliens’ लिस्ट का मतलब यह है कि इन लोगों पर पहले ही US में अपराध साबित हो चुके हैं या वे गंभीर मामलों में आरोपित हैं। ICE इन्हें हिरासत में लेकर कोर्ट के ज़रिए डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू करता है।

इस तरह की लिस्टें पब्लिक और पॉलिटिकल दोनों स्तर पर एक मैसेज भी देती हैं – कि अमेरिका गंभीर अपराधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा, चाहे वे किसी भी देश से हों। खास तौर पर ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के बाद से ऐसी कार्रवाई और भी तेज़ हो गई है।

भारतीय इमेज पर क्या असर?

भारत दुनिया भर में IT, मेडिकल, रिसर्च, बिजनेस और अन्य क्षेत्रों में पॉजिटिव योगदान के लिए जाना जाता है। ऐसे में जब “इंडियन” नामों के साथ मनी लॉन्ड्रिंग, सेक्स क्राइम और ड्रग्स जैसे आरोप सामने आते हैं, तो इमेज पर निश्चित रूप से असर पड़ता है।

हालांकि ये 89 लोग 140 करोड़ भारतीयों की तस्वीर नहीं बदल सकते, लेकिन डायस्पोरा समुदाय के लिए यह चिंता की बात है। अमेरिका में रहने वाले लाखों भारतीय‑अमेरिकन कड़ी मेहनत से अपनी पहचान बनाते हैं, ऐसे में कुछ लोगों की हरकतें पूरे समुदाय पर शक की नजर ला सकती हैं।

गुजरात के लिए अंदरूनी चेतावनी

21 गुजराती नाम केवल सांख्यिकीय डेटा नहीं, बल्कि एक चेतावनी हैं। यह दिखाता है कि कुछ जिलों में विदेश जाने की होड़ इतनी तेज है कि लोग कानून, नैतिकता और समाज की छवि तक दांव पर लगा दे रहे हैं।

परिवारों को भी यह समझने की जरूरत है कि “किसी भी कीमत पर अमेरिका” वाला सपना, जीवन भर की बदनामी और जेल‑डिपोर्टेशन में बदल सकता है। लाखों की दलाली देकर जो लोग नकली रास्तों से जाते हैं, वे न तो वहां सुरक्षित होते हैं, न यहां सम्मान के साथ लौट पाते हैं।

सीख क्या है? युवाओं और परिवारों के लिए ज़रूरी बात

  • विदेश जाएं तो कानूनी वीज़ा और साफ डॉक्यूमेंट्स के साथ जाएं।
  • किसी एजेंट के झांसे में आकर नकली कागज़ या खतरनाक रूट न अपनाएं।
  • जल्दी पैसे की चाह में कॉल‑सेंटर स्कैम, फर्जी लोन, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड जैसे काम से दूर रहें।
  • अगर आप US या किसी भी देश में रहते हैं, तो वहां के कानून पूरी तरह समझकर ही कोई काम करें।

भारत सरकार और राज्य सरकारों के लिए भी ज़रूरी है कि अवैध माइग्रेशन रोकने, एजेंटों पर कार्रवाई करने और युवाओं को सही काउंसलिंग देने पर ज़्यादा फोकस करें, ताकि ऐसी शर्मनाक सूचियों में भारतीयों की संख्या घट सके।

5 FAQs

प्रश्न 1: US की ‘worst of the worst criminal aliens’ लिस्ट में कितने भारतीय शामिल हैं?
उत्तर: इस लिस्ट में कुल 89 भारतीय नागरिकों के नाम हैं, जिन्हें गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया गया है।

प्रश्न 2: इनमें से कितने लोग गुजरात से हैं और वे कहां के हैं?
उत्तर: कुल 21 आरोपी गुजरात से हैं, और रिपोर्ट के अनुसार इनमें ज्यादातर उत्तर और मध्य गुजरात के जिलों से हैं।

प्रश्न 3: इन भारतीयों पर मुख्य तौर पर किस तरह के अपराध के आरोप हैं?
उत्तर: प्रमुख अपराधों में मनी लॉन्ड्रिंग, फ्रॉड, आइडेंटिटी थेफ्ट, बुजुर्गों को निशाना बनाकर स्कैम, माइनर्स से जुड़े सेक्स अपराध, ड्रग ट्रैफिकिंग, डोमेस्टिक वायलेंस और चोरी शामिल हैं।

प्रश्न 4: बुजुर्गों को कैसे टारगेट किया जाता है?
उत्तर: फोन और ऑनलाइन स्कैम के ज़रिए – जैसे फर्जी टैक्स कॉल, सोशल सिक्योरिटी बंद होने की धमकी, लॉटरी या प्राइज स्कीम – जिनमें उनसे बैंक डिटेल या पैसे ठगे जाते हैं।

प्रश्न 5: इस लिस्ट में नाम आने के बाद आगे क्या होता है?
उत्तर: ऐसे लोगों को US ICE हिरासत में रखकर केस चलाती है, सजा या कानूनी प्रक्रिया के बाद आमतौर पर उन्हें डिपोर्टेशन के लिए हाई‑प्रायोरिटी कैटेगरी में रखा जाता है।

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