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सिर्फ पेट खराब नहीं: तीव्र गैस्ट्रोएन्टराइटिस से Kidney फेलियर तक का सफर कैसे शुरू होता है?

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तीव्र गैस्ट्रोएन्टराइटिस में उल्टी–दस्त से डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जल्दी Kidney को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जानें, ORS, IV फ्लूइड और डॉक्टर के पास जाने के सही संकेत।

पेट का इंफेक्शन और Kidney का कनेक्शन


यशस्वी जैसवाल के तीव्र गैस्ट्रोएन्टराइटिस वाले मामले ने दिखाया कि दो दिन में तेज़ उल्टी–दस्त से 2 किलो से ज़्यादा वजन कम होना सिर्फ “फैट लॉस” नहीं, बल्कि खतरनाक डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा रिस्क फ्लूइड लॉस, इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस और किडनियों तक जाने वाले खून के फ्लो में कमी का होता है, जो आगे चलकर किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है।
कई क्लिनिकल स्टडीज़ कहती हैं कि तीव्र गैस्ट्रोएन्टराइटिस (acute gastroenteritis) यानी अचानक होने वाला उल्टी–दस्त वाला इंफेक्शन, हल्के से दिखने वाले डिहाइड्रेशन के माध्यम से भी acute kidney injury (AKI) तक ले जा सकता है, अगर समय पर फ्लूइड रीप्लेसमेंट न हो।

सेक्शन 1: तीव्र गैस्ट्रोएन्टराइटिस क्या है? कितनी जल्दी बिगड़ सकता है?
एक्यूट गैस्ट्रोएन्टराइटिस पेट और आंत की अचानक सूजन है, जो आमतौर पर वायरल, बैक्टीरियल या कभी–कभी पैरासाइटिक इंफेक्शन से होती है; भारत में अक्सर यह दूषित खाना–पानी, स्ट्रीट फूड, होटल में रखा हुआ खाना, या खराब हैंड हाइजीन से जुड़ी रहती है।
लक्षणों में पानी जैसी दस्त, उल्टी, पेट में मरोड़, गैस/फुलाव, बुखार, कमजोरी और प्यास ज़्यादा लगना शामिल हैं; गंभीर मामलों में पेशाब कम होना, चक्कर, ब्लड प्रेशर गिरना और बेहोशी तक हो सकती है, जो डिहाइड्रेशन और संभावित किडनी असर का संकेत है।

सेक्शन 2: डिहाइड्रेशन से किडनी पर असर – अंदर क्या होता है?
किडनियाँ हमारे शरीर के “फ़िल्टर और बैलेंसिंग सिस्टम” हैं; जब उल्टी–दस्त से शरीर से बहुत पानी और नमक निकल जाता है, तो खून की मात्रा (blood volume) कम हो जाती है, जिससे किडनी तक पहुँचने वाला रक्त और ऑक्सीजन घट जाता है – इसे प्री–रिनल हाइपोपरफ्यूज़न कहा जाता है।
हर बार जब शरीर बहुत ज़्यादा डिहाइड्रेट हो जाता है, किडनी अपने आप को बचाने की कोशिश करती है, लेकिन अगर यह स्थिति कुछ घंटों–दिनों तक चलती रहे और समय पर फ्लूइड न मिले, तो फिल्टर करने वाली छोटी–छोटी नलिकाएँ (नेफ्रॉन) चोटिल हो सकती हैं और acute kidney injury (AKI) विकसित हो सकती है, जिसमें क्रिएटिनिन बढ़ जाता है और पेशाब बनने में कमी आ सकती है।

कई स्टडीज़ के मुख्य पॉइंट:

  • एक बड़े हॉस्पिटल–बेस्ड अध्ययन में पाया गया कि तीव्र गैस्ट्रोएन्टराइटिस के कारण भर्ती मरीजों में AKI का रिस्क साफ़ तौर पर बढ़ा था, और यह हाई मोर्टैलिटी व खराब प्रोग्नोसिस से जुड़ा था।
  • सऊदी अरब और विकासशील देशों से आए डेटा में दिखा कि लगभग 96 प्रतिशत AKI केस ऐसे मरीजों में थे जिनमें सिर्फ “माइल्ड डिहाइड्रेशन” नोट किया गया था, यानी हल्के से दिखने वाले फ्लूइड लॉस से भी किडनी प्रभावित हो सकती है।

सेक्शन 3: किन लोगों में किडनी रिस्क ज़्यादा होता है?
हाल के रिव्यूज़ और नेफ्रोलॉजी पेपर्स के अनुसार, नीचे दिए गए समूहों में तीव्र गैस्ट्रोएन्टराइटिस के दौरान AKI का रिस्क ज़्यादा देखा गया:

  • पहले से किडनी डिज़ीज, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग।
  • बुजुर्ग, बहुत छोटे बच्चे, और वे जिनकी इम्युनिटी या पोषण स्थिति कमजोर हो।
  • वे मरीज जो ACE inhibitors, ARBs, NSAIDs (पेनकिलर की कुछ श्रेणियाँ) जैसी दवाएँ ले रहे हों – डिहाइड्रेशन के साथ ये दवाएँ किडनी पर अतिरिक्त लोड डाल सकती हैं।

इसीलिए डॉक्टर जैसवाल जैसे एथलीट में भी – भले वे पहले से स्वस्थ हों – बहुत तेज़ फ्लूइड लॉस और कुछ दिनों में वजन घटने पर किडनी पर असर की चिंता ज़रूर करते हैं और समय पर फ्लूइड, इलेक्ट्रोलाइट और टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।

सेक्शन 4: डिहाइड्रेशन और किडनी रिस्क के लक्षण – क्या ज़रूर नोटिस करें

हल्के डिहाइड्रेशन के संकेत:

  • मुंह व होंठ सूखना, त्वचा सूखी लगना।
  • प्यास ज़्यादा लगना, हल्की कमजोरी, चक्कर सा महसूस होना।

मध्यम से गंभीर डिहाइड्रेशन और संभावित किडनी रिस्क के संकेत:

  • पेशाब कम होना (कम बार या बहुत कम मात्रा), पेशाब का रंग गहरा पीला या भूरा होना।
  • तेज़ धड़कन, ब्लड प्रेशर गिरना (चक्कर आना, खड़े होते ही आंखों के आगे अंधेरा छा जाना)।
  • बहुत ज़्यादा थकान, सुस्ती, चित्त–अवस्था बदलना (कन्फ्यूजन, बातों का जवाब देर से देना), जो आगे चलकर AKI या शॉक का संकेत हो सकते हैं।

यदि उल्टी–दस्त के साथ–साथ ये लक्षण दिखें, तो घर पर सिर्फ घरेलू उपायों पर भरोसा करने की बजाय तुरंत अस्पताल या डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है।

सेक्शन 5: ORS और फ्लूइड मैनेजमेंट – कब क्या काफी है, कब डॉक्टर ज़रूरी

WHO/UNICEF और अन्य गाइडलाइंस साफ़ कहती हैं कि डायरिया से होने वाली मौतों का ज़्यादातर हिस्सा केवल डिहाइड्रेशन की वजह से होता है, और इन्हें सही समय पर ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) देकर रोका जा सकता है।

घर पर ORS कब और कैसे:

  • जैसे ही ढीली दस्त शुरू हों, तुरंत ORS देना शुरू कर दें – देरी न करें, ताकि डिहाइड्रेशन बढ़ने न पाए।
  • WHO–टाइप ORS या फार्मेसी से मिलने वाला ORS इस्तेमाल करें; हर ढीली स्टूल के बाद 200–400 ml ORS वयस्कों को दिया जा सकता है, जबकि बच्चों में वजन के हिसाब से छोटे–छोटे घूंटों में देना चाहिए।
  • उल्टी होने पर भी ORS पूरी तरह बंद न करें; हर 1–2 मिनट में छोटी–छोटी घूंट से देना जारी रखें, ताकि धीरे–धीरे फ्लूइड अंदर जा सके।

कब सिर्फ ORS काफी नहीं, अस्पताल ज़रूरी:

  • लगातार उल्टी से कोई भी चीज़ ठहर ही न पाए, या हर थोड़ी देर में तेज़ पानी वाली दस्त होती रहे।
  • पेशाब बहुत कम हो, ज़्यादा चक्कर, तेज़ दिल की धड़कन, सांस फूलना, बेहोशी या ब्लड प्रेशर गिरने जैसे लक्षण हों – ये सब IV फ्लूइड और हॉस्पिटल मैनेजमेंट के संकेत हैं।
  • बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएँ या किडनी/दिल के मरीज – इनमें डिहाइड्रेशन जल्दी खतरनाक हो सकता है, इसलिए हल्के लक्षण में भी जल्दी डॉक्टर दिखाना अच्छा है।

सेक्शन 6: हॉस्पिटल में किडनी कैसे मॉनिटर की जाती है?
नेफ्रोलॉजी और गैस्ट्रोएन्टराइटिस–रिलेटेड AKI पर हुई स्टडीज़ के अनुसार, अस्पताल में आए ऐसे मरीजों में निम्न चीज़ें नियमित देखी जाती हैं:

  • सीरम क्रिएटिनिन और ब्लड यूरिया–नाइट्रोजन (BUN) – ये किडनी फंक्शन के बेसिक ब्लड टेस्ट हैं; बढ़ना AKI का संकेत हो सकता है।
  • इलेक्ट्रोलाइट्स – सोडियम, पोटैशियम, बाइकार्बोनेट स्तर; असंतुलन (जैसे हाइपरकलेमिया या हायपोनेट्रेमिया) गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकता है और ECG व अन्य मैनेजमेंट की ज़रूरत पड़ सकती है।
  • पेशाब की मात्रा – हर घंटे या कुछ–कुछ घंटे में urinary output नोट करना; बहुत कम आउटपुट AKI और ज़्यादा डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है।

एक भारतीय रिव्यू में ज़ोर दिया गया कि डायरिया/गैस्ट्रोएन्टराइटिस के साथ आने वाले मरीजों में शुरुआती 4 घंटों के भीतर प्रभावी फ्लूइड रेस्सिटेशन करने से AKI काफी हद तक रोकी जा सकती है, लेकिन प्राइमरी लेवल पर प्रोटोकॉल की कमी और डिले की वजह से कई मरीज देर से गंभीर हालत में पहुँचते हैं।

सेक्शन 7: घर और यात्रा के दौरान फूड पॉइज़निंग से बचने के आसान तरीके
भारतीय मौसम, खासकर गर्मी और मानसून में, खाने–पीने की गड़बड़ी और फूड पॉइज़निंग के केस बढ़ जाते हैं; कई भारतीय हॉस्पिटल और पब्लिक हेल्थ ब्लॉग्स कुछ बेसिक टिप्स देते हैं:

  • हमेशा साफ़, उबला या फ़िल्टर किया हुआ पानी पिएँ; बाहर हों तो सीलबंद पैक्ड वॉटर या विश्वसनीय स्रोत से ही पानी लें।
  • कटे फल, सलाद, चाट जैसी चीज़ें जो खुली जगह पर लंबे समय से रखी हों, उनसे बचें; ताज़ा गरम पकाया हुआ खाना ज़्यादा सुरक्षित माना जाता है।
  • हाथों की सफ़ाई – खाने से पहले और टॉयलेट के बाद साबुन–पानी से 20 सेकंड तक हाथ धोना फूडबोर्न इंफेक्शन रोकने का सबसे बेसिक और असरदार तरीका माना गया है।
  • किचन हाइजीन – कच्चे और पके खाने के लिए अलग कटिंग बोर्ड/चाकू रखें, फ्रीज में खाना ठीक से स्टोर करें, एक्सपायरी या बदबूदार खाना तुरंत फेंकें।

सेक्शन 8: अगर खेल–कूद या काम के बीच अचानक उल्टी–दस्त शुरू हो जाए तो क्या करें? (स्पोर्ट्स/एक्टिव यंग एडल्ट्स के लिए)

  • तुरंत एक्टिविटी बंद करें और छायादार, आरामदायक जगह पर बैठें; यह मानकर चलें कि पानी–नमक की ज़्यादा ज़रूरत होगी।
  • तुरंत ORS या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स छोटे–छोटे घूंट में शुरू करें; सिर्फ plain पानी से भी मदद मिलती है, लेकिन ORS सोडियम–ग्लूकोज़ कॉम्बिनेशन के कारण फ्लूइड को बेहतर तरीके से absorb करवाने में ज्यादा असरदार माना जाता है।
  • अगर 4–6 घंटे में लक्षण कम न हों, या उल्टी–दस्त के साथ बहुत चक्कर, पेशाब कम होना, या दिल की तेज़ धड़कन महसूस हो, तो खुद दवा लेके खेल पर लौटने की बजाय स्पोर्ट्स डॉक्टर या नज़दीकी अस्पताल जाना ज़रूरी है – यही वह समय है जब किडनी को बचाया जा सकता है।

FAQs

  1. क्या हर गैस्ट्रोएन्टराइटिस केस में किडनी डैमेज हो जाता है?
    नहीं, हर केस में ऐसा नहीं होता; लेकिन स्टडीज़ दिखाती हैं कि हॉस्पिटल में भर्ती डायरिया/गैस्ट्रोएन्टराइटिस मरीजों में AKI का रिस्क साफ़ तौर पर बढ़ा हुआ रहता है, खासकर जब डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन या पहले से किडनी/दिल की बीमारी हो। इसलिए ऐसे मरीजों में किडनी फंक्शन पर नज़र रखना ज़रूरी है।
  2. कैसे पहचानें कि घर का ORS काफी है या मुझे अस्पताल जाना चाहिए?
    अगर मरीज ORS और हल्के खाने को रोक पा रहा है, पेशाब हो रहा है, बहुत ज़्यादा चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस नहीं हो रहा, तो आमतौर पर घर पर ORS और आराम से सुधार हो सकता है। लेकिन अगर उल्टी–दस्त बहुत ज़्यादा हों, पेशाब बंद/बहुत कम हो, तेज़ चक्कर, सांस फूलना या ब्लड प्रेशर गिरने जैसे लक्षण हों, तो तुरंत अस्पताल में IV फ्लूइड और टेस्ट की ज़रूरत होती है।
  3. क्या हल्का डिहाइड्रेशन भी किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है?
    हाँ। हाल की स्टडीज़ ने दिखाया है कि गैस्ट्रोएन्टराइटिस से जुड़ी AKI वाले कई मरीजों में सिर्फ “माइल्ड” डिहाइड्रेशन नोट किया गया, यानी हल्की कमी भी, खासकर रिस्क वाले लोगों में, किडनी पर असर डाल सकती है। इसलिए छोटे–छोटे संकेतों को भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
  4. क्या हर फूड पॉइज़निंग में एंटीबायोटिक लेना ज़रूरी है?
    नहीं। कई वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस केस में एंटीबायोटिक की ज़रूरत नहीं होती और सिर्फ फ्लूइड, ORS, आराम और हल्का खाना काफी होता है; गलत या अनावश्यक एंटीबायोटिक से रेसिस्टेंस और साइड इफेक्ट्स का रिस्क बढ़ता है। डॉक्टर लक्षण, बुखार, खून–मिश्रित स्टूल, उम्र और टेस्ट के आधार पर तय करते हैं कि एंटीबायोटिक ज़रूरी है या नहीं।
  5. पेट ठीक होने के बाद किडनी की जांच कब करवानी चाहिए?
    अगर इंफेक्शन हल्का था, जल्दी ठीक हो गया और डिहाइड्रेशन के गंभीर लक्षण नहीं थे, तो आमतौर पर अलग से किडनी टेस्ट की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अगर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, IV फ्लूइड लगे, ब्लड प्रेशर गिरा या डॉक्टर ने उस समय किडनी पर असर की बात की थी, तो रिकवरी के 1–3 महीनों के अंदर–अंदर क्रिएटिनिन और यूरिन टेस्ट किडनी के दीर्घकालिक असर का आकलन करने में मदद कर सकते हैं।

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