सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि दिल्ली के AQI संकट का सबसे टिकाऊ समाधान ग्रीन कवर बढ़ाना है। कोर्ट ने अफॉरेस्टेशन केस को प्राथमिकता पर सूचीबद्ध करने, FRI के 33% ग्रीन कवर प्लान व 4 साल की टाइमलाइन पर सवाल उठाने और विशेषज्ञ समिति में नया सदस्य जोड़ने के निर्देश दिए।
सिर्फ पेड़ लगाने से बनेगी सांस लेने लायक दिल्ली? SC ने एफॉरेस्टेशन केस को ‘प्रायोरिटी’ पर सुनने का संकेत
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत: “AQI संकट का टिकाऊ समाधान—दिल्ली की हरियाली बढ़ाना”
दिल्ली की बिगड़ती हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए संकेत दिया है कि राजधानी के AQI संकट का सबसे “लॉन्ग-ड्रॉन” और टिकाऊ समाधान ग्रीन कवर बढ़ाना हो सकता है। कोर्ट ने अफॉरेस्टेशन (वृक्षारोपण/हरियाली बढ़ाने) से जुड़ी एक लंबित याचिका को प्राथमिकता के आधार पर सुनने पर सहमति जताई और कहा कि बेहतर AQI की लड़ाई में यह सबसे “well-thought-out” समाधानों में से एक है।
यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने की, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। बेंच ने माना कि यह विषय सीधे तौर पर AQI से जुड़ा है और दिल्ली के लिए बेहद प्रासंगिक है, इसलिए इसे जल्द सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
अफॉरेस्टेशन केस क्यों अहम है और अब क्या बदलेगा?
सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्णकुमार, जो इस मामले में अमाइकस क्यूरी (कोर्ट के सहायक) हैं, ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली की हरियाली बढ़ाने वाली याचिका पर लंबे समय से कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। यह मामला MC Mehta प्रदूषण केस से जुड़ा है और पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के ग्रीन कवर को बढ़ाने के लिए एक वैज्ञानिक और विस्तृत एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए थे।
कृष्णकुमार ने कोर्ट को याद दिलाया कि देहरादून स्थित Forest Research Institute (FRI) को दिल्ली का ग्रीन कवर बढ़ाने और एक व्यापक “ट्री सेंसस” कराने का एक्शन प्लान बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। FRI ने मार्च (पिछले साल) में एक ड्राफ्ट प्लान भी सौंपा था, लेकिन इसके बाद से मामले की substantive hearing नहीं हो पाई। अब कोर्ट ने इसे प्राथमिकता पर लेने के संकेत दिए हैं और कहा है कि अमाइकस जरूरी डिटेल्स दें, ताकि इसे जल्द—संभवतः सोमवार को—लिस्ट किया जा सके।
FRI का ड्राफ्ट प्लान: 33% ग्रीन कवर लक्ष्य, 4 साल का टाइमफ्रेम
FRI के ड्राफ्ट प्लान में प्रस्ताव रखा गया है कि दिल्ली का ग्रीन कवर चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर उसके भौगोलिक क्षेत्र के 33% तक ले जाया जाए। इस प्रस्ताव के मुताबिक, पूरे “ग्रीनिंग इनिशिएटिव” और ट्री सेंसस को पूरा होने में करीब चार साल लग सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि FRI से कहा था कि वह टाइमलाइन और लागत के अनुमान को फिर से देखे, यानी कोर्ट को लगता है कि इसे ज्यादा व्यवहारिक और तेज बनाने की जरूरत हो सकती है।
प्लान में यह भी कहा गया कि पहले फेज में अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के बीच समन्वय करके एक विस्तृत रणनीति बनानी होगी। इसके लिए दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल स्टीयरिंग कमेटी बनाने की सिफारिश की गई है, जिसमें केंद्र और दिल्ली सरकार के 19 विभागों के प्रतिनिधि शामिल हों और वे अफॉरेस्टेशन के लिए उपलब्ध जमीन की पहचान करें। अलग से एक हाई-लेवल कमेटी ट्री सेंसस की निगरानी के लिए भी प्रस्तावित है, जिसकी अध्यक्षता भी चीफ सेक्रेटरी करेंगे।
दिल्ली में अभी कितनी हरियाली है? ISFR 2023 के आंकड़े
कोर्ट के नोट में India State of Forest Report 2023 (Forest Survey of India) का हवाला भी दिया गया है। इसके मुताबिक, दिल्ली का कुल forest and tree cover 371.31 वर्ग किमी है, जो दिल्ली के कुल क्षेत्रफल 1,483 वर्ग किमी का लगभग 25% है। इसमें से 195.28 वर्ग किमी इलाका वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। यानी दिल्ली में हरियाली है, लेकिन उसे बढ़ाकर 33% तक पहुंचाना एक बड़ा मिशन बनता है।
खर्च कितना आएगा? ग्रीनिंग और ट्री सेंसस का अनुमान
FRI के ड्राफ्ट के अनुसार, पूरी ग्रीनिंग परियोजना की अनुमानित लागत ₹3.69 करोड़ बताई गई है, जबकि ट्री सेंसस (जिसमें जियोस्पेशियल मैपिंग और वैज्ञानिक विशेषज्ञों की भागीदारी शामिल है) की लागत ₹4.43 करोड़ अनुमानित की गई है। कोर्ट ने इससे पहले FRI को लागत और टाइमलाइन के अनुमान फिर से देखने के निर्देश दिए थे, इसलिए आगे इसमें बदलाव संभव है।
विशेषज्ञ समिति में बदलाव: नए सदस्य की नियुक्ति
सुप्रीम कोर्ट ने अफॉरेस्टेशन और “कौन-सी प्रजाति के पेड़ कहां लगाने चाहिए” जैसे तकनीकी मुद्दों पर दिल्ली सरकार को सलाह देने के लिए बनी तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति में खाली पड़े पद को भी भर दिया है। यह रिक्ति इसलिए बनी थी क्योंकि पूर्व IFS अधिकारी ईश्वर सिंह को National Green Tribunal (NGT) में नियुक्त कर दिया गया था। समिति के अन्य दो सदस्य—पूर्व PCCF सुनील लिमये और पर्यावरणविद् प्रदीप किशन—पहले से हैं।
अमाइकस द्वारा सुझाए गए नामों में से कोर्ट ने MD सिन्हा (पूर्व IFS अधिकारी, हरियाणा कैडर) को इस समिति में नियुक्त किया। कोर्ट ने संकेत दिया कि सही प्रजाति चयन और सही जगह पर सही तरीके से वृक्षारोपण, दिल्ली की हरियाली बढ़ाने की सफलता के लिए बेहद जरूरी है।
152 पेड़ों की कटाई की अनुमति और “रिज” का मुद्दा
यह मामला एक दिन पहले भी चर्चा में आया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने Delhi Ridge क्षेत्र में 152 पेड़ों को काटने की अनुमति दी। यह अनुमति छत्तर्पुर में Central Armed Police Forces Institute of Medical Sciences तक पहुंच आसान करने के लिए सड़क विस्तार के संदर्भ में दी गई। हालांकि कोर्ट ने अनुमति देते हुए यह भी माना कि शहर स्तर पर अफॉरेस्टेशन की बड़ी रणनीति अलग और अधिक व्यापक मुद्दा है, जिसे प्राथमिकता पर सुनना जरूरी है।
यानी संदेश यह है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरतें अपनी जगह हैं, लेकिन दिल्ली को सांस लेने लायक बनाने के लिए शहर की हरियाली और ट्री मैनेजमेंट पर दीर्घकालिक, वैज्ञानिक और सख्त निगरानी वाला कार्यक्रम जरूरी है।
दिल्ली में AQI सुधार के लिए “ट्री-सोल्यूशन” कितना असरदार हो सकता है?
पेड़ प्रदूषण की समस्या का अकेला समाधान नहीं हैं, लेकिन शहरों में हरियाली बढ़ाने से धूल, गर्मी, शोर, और स्थानीय माइक्रो-क्लाइमेट पर सकारात्मक असर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “लॉन्ग-ड्रॉन” समाधान कहा, यानी यह रातों-रात परिणाम नहीं देगा, लेकिन अगर सही तरीके से लागू हुआ तो दिल्ली के लिए सबसे स्थायी उपायों में गिना जा सकता है।
इसीलिए कोर्ट का फोकस दो हिस्सों में दिखता है—एक तरफ शहर का ग्रीन कवर बढ़ाना, दूसरी तरफ वैज्ञानिक ट्री सेंसस करके यह समझना कि वर्तमान में पेड़ कहां हैं, उनकी स्थिति क्या है, और नए पेड़ कहां लग सकते हैं। यह काम सही डेटा और सही प्रशासनिक समन्वय के बिना संभव नहीं है, इसलिए 19 विभागों वाली स्टीयरिंग कमेटी और अलग ट्री-सेंसस कमेटी की सिफारिश अहम बनती है।
Delhi Greening Plan: मुख्य बिंदु (टेबल)
| पहलू | कोर्ट/FRI प्लान में क्या कहा गया |
|---|---|
| लक्ष्य | दिल्ली का ग्रीन कवर 33% तक ले जाना |
| वर्तमान स्थिति | Forest & tree cover 371.31 sq km (~25% of 1,483 sq km) |
| समय | ग्रीनिंग + ट्री सेंसस ~4 साल (टाइमलाइन रिविज़िट करने के निर्देश) |
| अनुमानित लागत | Greening ₹3.69 cr; Tree census ₹4.43 cr |
| संस्थान | Forest Research Institute (FRI), Dehradun |
| निगरानी ढांचा | Chief Secretary की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटियां; 19 विभागों का समन्वय |
| विशेषज्ञ समिति | 3-सदस्यीय पैनल; नए सदस्य MD Sinha नियुक्त |
FAQs (5)
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के AQI पर क्या कहा?
कोर्ट ने संकेत दिया कि दिल्ली की बिगड़ती हवा (AQI) के लिए ग्रीन कवर बढ़ाना एक दीर्घकालिक और सबसे अच्छी तरह सोचा गया समाधान हो सकता है, और अफॉरेस्टेशन वाले मामले को प्राथमिकता पर सुनने पर सहमति दी। - FRI को सुप्रीम कोर्ट ने क्या काम दिया था?
FRI को दिल्ली की हरियाली बढ़ाने का एक्शन प्लान बनाने और एक व्यापक ट्री सेंसस कराने की योजना तैयार करने का काम सौंपा गया था, जिसका ड्राफ्ट मार्च (पिछले साल) में जमा हुआ था। - दिल्ली का वर्तमान forest and tree cover कितना है?
India State of Forest Report 2023 के अनुसार, दिल्ली का कुल forest and tree cover 371.31 वर्ग किमी है, जो कुल क्षेत्रफल 1,483 वर्ग किमी का लगभग 25% है। - FRI का लक्ष्य क्या है और इसमें कितना समय लग सकता है?
ड्राफ्ट प्लान के अनुसार लक्ष्य ग्रीन कवर को 33% तक ले जाना है और ग्रीनिंग व ट्री सेंसस में लगभग 4 साल लग सकते हैं, हालांकि कोर्ट ने टाइमलाइन और लागत रिविज़िट करने को कहा है। - विशेषज्ञ समिति में नया सदस्य कौन बना?
कोर्ट ने MD Sinha (पूर्व IFS अधिकारी, हरियाणा कैडर; पूर्व में हरियाणा सरकार में प्रिंसिपल सेक्रेटरी) को तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति में नियुक्त किया।
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