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US-चीन की AI रेस के बीच नीदरलैंड PM का भारत को संदेश: “यूरोप-इंडिया मिलकर अपना AI रास्ता बनाएं”

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Netherlands PM Dick Schoof India AI collaboration
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नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक स्कूफ ने कहा कि AI में US-चीन का दबदबा बढ़ रहा है, इसलिए यूरोप और भारत को मिलकर अपना “स्वतंत्र अप्रोच” बनाना चाहिए। बेंगलुरु में उन्होंने AI, सेमीकंडक्टर, हेल्थकेयर, ट्रैफिक मैनेजमेंट और भारत‑EU FTA पर सहयोग बढ़ाने की बात की।

AI समिट के बाद बेंगलुरु दौरा: ट्रैफिक AI से ‘कंजेशन लगभग आधा’, अब भारत-EU सहयोग बढ़ाने पर जोर

नीदरलैंड PM डिक स्कूफ का भारत को AI संदेश: “US-चीन की रेस में यूरोप-इंडिया मिलकर अपना रास्ता बनाएं”

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक स्कूफ ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया इस समय अमेरिका और चीन के दबदबे में तेजी से आगे बढ़ रही है, इसलिए “अन्य देशों” को एक-दूसरे के करीब आकर अपना स्वतंत्र अप्रोच विकसित करना चाहिए। बेंगलुरु में चुनिंदा मीडिया बातचीत में उन्होंने भारत को AI का “बड़ा खिलाड़ी” बताया और यूरोप-भारत के बीच AI सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

स्कूफ ने कहा, “जब US और चीन AI में बेहद प्रतिस्पर्धी हैं और एक-दूसरे से कड़ी टक्कर ले रहे हैं, तब दूसरे देशों को साथ आकर अपना तरीका बनाना चाहिए। हम साथ मिलकर अपना रास्ता तय कर सकते हैं।” इस बयान का साफ संकेत यह है कि यूरोप और भारत दोनों, AI के मामले में “थर्ड पाथ” या “ऑन-देयर-ओन” रणनीति को गंभीरता से देख रहे हैं।

नीदरलैंड खुद को यूरोप में “डिजिटल हार्बर” बताता है: इंडिया के लिए गेटवे

डिक स्कूफ ने कहा कि नीदरलैंड यूरोप के भीतर एक मजबूत और इनोवेटिव AI प्लेयर बनना चाहता है। उन्होंने देश को “highly digitalised” बताया और कहा कि नीदरलैंड एक तरह से “digital harbour” है, यानी यूरोप का गेटवे। इसी संदर्भ में उन्होंने चाहा कि डच और भारतीय कंपनियां AI पर “बहुत करीब” से काम करें।

उनके अनुसार, यह सहयोग सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संस्थानों, बिजनेस और इकोसिस्टम के स्तर पर आगे बढ़ना चाहिए। भारत की ताकत ‘टैलेंट’ है और यूरोप/नीदरलैंड की ताकत ‘इंफ्रास्ट्रक्चर + रिसर्च + हाई-टेक कंपनियां’—इन दोनों को जोड़कर बड़ा परिणाम निकाला जा सकता है।

सेमीकंडक्टर सहयोग: ASML और NXP का जिक्र, भारत के टैलेंट पर भरोसा

स्कूफ ने सेमीकंडक्टर सेक्टर को सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ बताया और कहा कि इस दिशा में बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड के पास ASML और NXP जैसी मजबूत कंपनियां/इंस्टीट्यूट्स हैं, जबकि भारत के पास “enormous talent” है—दोनों मिलकर एक मजबूत इकोसिस्टम बना सकते हैं।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में चिप्स, मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन और रणनीतिक टेक्नोलॉजी को लेकर देशों की प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। भारत भी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और टेक डेवलपमेंट के लिए वैश्विक भागीदारों की तलाश में है, और नीदरलैंड का रोल यहां महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Skilled migration: शरणार्थी नीति सख्त, लेकिन हाई-स्किल्ड भारतीयों के लिए दरवाजे खुले

माइग्रेशन मुद्दे पर स्कूफ ने कहा कि नीदरलैंड शरणार्थी (asylum) प्रवाह पर “strict control” चाहता है, लेकिन अर्थव्यवस्था की जरूरत के हिसाब से हाई-स्किल्ड लेबर के लिए वह खुला है। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड में पहले से कई भारतीय काम कर रहे हैं, खासकर हाई-टेक सेक्टर्स में, लेकिन “uncontrolled overflow” नहीं चाहिए।

इसका अर्थ यह है कि यूरोप-भारत AI सहयोग का एक हिस्सा “टैलेंट मोबिलिटी” भी हो सकता है, जहां रिसर्च, इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स के लिए स्किल्ड प्रोफेशनल्स का आना-जाना आसान बनाया जाए—हालांकि इमिग्रेशन को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता बनी रहेगी।

AI सहयोग के 3 हाई-इम्पैक्ट सेक्टर: हेल्थकेयर, एग्री और स्मार्ट सिटी

स्कूफ ने खास तौर पर हेल्थकेयर को AI सहयोग का प्रायोरिटी एरिया बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप में उम्रदराज आबादी बढ़ने से मेडिकल सिस्टम पर दबाव है और AI सिस्टम की दक्षता बढ़ाकर वर्कफोर्स पर बोझ कम कर सकता है।

IISc में उन्हें एक AI-एनेबल्ड डिजिटल स्टेथोस्कोप दिखाया गया, जो स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के जरिए हार्ट रिद्म एनालाइज कर सकता है और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स द्वारा अर्ली स्क्रीनिंग में मदद कर सकता है। इसके अलावा एक स्टार्टअप ने मसालों (spices) की क्वालिटी को ग्रोथ स्टेज के अलग-अलग चरणों में AI से जांचने वाले टूल्स दिखाए, जिससे किसानों को रियल-टाइम क्वालिटी चेक और बेहतर प्राइस डिस्कवरी में सहायता मिल सकती है।

स्कूफ ने इन इनोवेशंस को “promising” कहा और यह भी नोट किया कि भारत में AI का इस्तेमाल “ग्रासरूट लेवल” तक हो रहा है, जो सहयोग के लिए बेहद मजबूत आधार बन सकता है।

ट्रैफिक AI: बेंगलुरु ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर में ‘एक हफ्ते पहले’ भीड़ का अनुमान

दिल्ली में AI समिट में हिस्सा लेने के बाद स्कूफ बेंगलुरु गए और वहां उन्होंने Philips Innovation Campus (Yelahanka), Bengaluru Traffic Police के Traffic Management Centre (Infantry Road) और IISc का दौरा किया।

Traffic Management Centre में अधिकारियों ने दिखाया कि CCTV फीड्स, ओपन डेटा प्लेटफॉर्म्स और प्रेडिक्टिव मॉडलिंग का इस्तेमाल करके वे एक हफ्ते पहले तक कंजेशन पैटर्न का अनुमान लगा सकते हैं और ट्रैफिक सिग्नल्स को प्रोएक्टिव तरीके से मैनेज कर सकते हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि AI-बेस्ड सिस्टम्स से कंजेशन लेवल्स “करीब आधे” हो गए हैं, तुलना में पिछले वर्षों के।

भारत‑EU FTA और ओपन ट्रेड: “टैरिफ के खिलाफ रहे हैं”

ग्लोबल ट्रेड पर स्कूफ ने कहा कि नीदरलैंड हमेशा ओपन ट्रेड एग्रीमेंट्स का समर्थक रहा है और भारत‑EU FTA पर जल्दी प्रगति की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि वे टैरिफ के खिलाफ रहे हैं; कुछ टैरिफ रोके नहीं जा सके, लेकिन फिलहाल वे नीदरलैंड की अर्थव्यवस्था को “severely” नुकसान नहीं पहुंचा रहे—फिर भी ओपन ट्रेड बेहतर है।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उन्होंने एक व्यापक “strategic partnership” पर चर्चा की, जिसमें सेमीकंडक्टर्स, वॉटर मैनेजमेंट और एग्रीकल्चर शामिल हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि नीदरलैंड भारत में सबसे बड़े यूरोपीय निवेशकों में है और यूरोप के लिए ट्रेड पार्टनरशिप को डाइवर्सिफाई करना जरूरी है—US में सक्रिय रहेंगे, लेकिन बाकी दुनिया में भी मजबूत जुड़ाव चाहिए।

टेबल: नीदरलैंड–भारत सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

क्षेत्रनीदरलैंड का फोकस/ताकतभारत की ताकत/मौका
AI सहयोगयूरोप में मजबूत AI प्लेयर बनना, “digital harbour” गेटवेबड़ा AI टैलेंट बेस, तेज़ी से बढ़ता इनोवेशन इकोसिस्टम
सेमीकंडक्टर्सASML, NXP जैसी कंपनियां, टेक डेवलपमेंटटैलेंट, मैन्युफैक्चरिंग/इकोसिस्टम बिल्डिंग की महत्वाकांक्षा
हेल्थकेयर AIएजिंग पॉपुलेशन, सिस्टम एफिशिएंसी की जरूरतAI स्टेथोस्कोप जैसे फ्रंटलाइन इनोवेशन, बड़े पैमाने पर अपनाने की क्षमता
एग्री AIटेक-ड्रिवन क्वालिटी कंट्रोलमसालों की क्वालिटी AI से जांच, किसानों के लिए प्राइस डिस्कवरी
स्मार्ट ट्रैफिकडेटा+AI से ऑप्टिमाइजेशनTMC में CCTV/ओपन डेटा/प्रेडिक्टिव मॉडलिंग से कंजेशन लगभग आधा

आगे क्या?—किस दिशा में जा सकता है यह सहयोग

यह दौरा संकेत देता है कि भारत और नीदरलैंड (और व्यापक रूप से यूरोप) आने वाले महीनों में AI को केवल “चर्चा” तक नहीं रहने देना चाहते, बल्कि उसे 3 ठोस लेयर पर ले जाना चाहते हैं:

  • उद्योग साझेदारी: AI/चिप्स में कंपनियों का जॉइंट वर्क
  • रिसर्च और टैलेंट: यूनिवर्सिटीज़, लैब्स और स्किल्ड माइग्रेशन चैनल
  • पब्लिक सेक्टर एप्लिकेशन: हेल्थ, एग्री, ट्रैफिक, वॉटर मैनेजमेंट जैसे हाई-इम्पैक्ट उपयोग

US‑China AI रेस के बीच यह “यूरोप‑इंडिया एलाइनमेंट” एक स्ट्रैटेजिक बैलेंसिंग की तरह भी देखा जा सकता है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी क्षमता जोड़कर अधिक स्वायत्त टेक पोजिशन बनाना चाहते हैं।

FAQs (5)

  1. नीदरलैंड PM डिक स्कूफ भारत में AI सहयोग क्यों बढ़ाना चाहते हैं?
    उन्होंने कहा कि AI पर इस समय US और चीन का दबदबा है, इसलिए यूरोप और भारत को मिलकर अपना “स्वतंत्र अप्रोच” बनाना चाहिए और संस्थानों/बिजनेस के स्तर पर सहयोग गहरा करना चाहिए।
  2. स्कूफ ने भारत को AI में कैसे देखा?
    उन्होंने भारत को AI का “big player” कहा और भारत के “enormous talent” को यूरोप/नीदरलैंड की कंपनियों व संस्थानों के साथ जोड़ने की बात की।
  3. सेमीकंडक्टर्स में किस तरह का सहयोग बताया गया?
    स्कूफ ने ASML और NXP जैसी डच ताकतों का जिक्र किया और कहा कि चिप मैन्युफैक्चरिंग व टेक डेवलपमेंट में सहयोग मजबूत करने के लिए चर्चा चल रही है।
  4. हेल्थकेयर AI में क्या खास दिखाया गया?
    IISc में उन्हें AI-एनेबल्ड डिजिटल स्टेथोस्कोप दिखाया गया जो स्मार्टफोन के जरिए हार्ट रिद्म एनालाइज कर सकता है और फ्रंटलाइन स्क्रीनिंग में मदद कर सकता है।
  5. बेंगलुरु ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर में AI का क्या उपयोग बताया गया?
    अधिकारियों ने बताया कि CCTV, ओपन डेटा और प्रेडिक्टिव मॉडलिंग की मदद से वे एक हफ्ते पहले कंजेशन पैटर्न का अनुमान लगा सकते हैं और AI-बैक्ड सिस्टम से कंजेशन “करीब आधा” हो गया है।

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