UP विधानसभा में रमज़ान के दौरान मस्जिदों से ‘सेहरी-इफ्तार’ ऐलान के लिए लाउडस्पीकर की अनुमति का मुद्दा उठा। सरकार ने कहा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर/PA सिस्टम नहीं चल सकते; आज मोबाइल से समय पता चलता है।
मस्जिदों के लाउडस्पीकर पर विधानसभा में बहस: मंत्री बोले—“मोबाइल में समय है, जरूरत नहीं; सुप्रीम कोर्ट नियम सबसे ऊपर”
रमज़ान में मस्जिदों के ‘सेहरी-इफ्तार’ ऐलान पर UP सरकार की सफाई: “रात 10 के बाद लाउडस्पीकर नहीं—SC आदेश लागू”
उत्तर प्रदेश विधानसभा में रामज़ान के दौरान मस्जिदों से ‘सेहरी’ और ‘इफ्तार’ के समय की जानकारी देने के लिए लाउडस्पीकर से किए जाने वाले ऐलानों को लेकर बहस छिड़ गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कोई राज्य सरकार का “नया आदेश” नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और ध्वनि पैदा करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के नियम सभी पर लागू हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह मुद्दा विधानसभा के जीरो आवर में समाजवादी पार्टी (SP) के सदस्य कमाल अख्तर ने उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी धर्मों के त्योहार—होली, दिवाली, दशहरा, कांवड़ यात्रा के साथ-साथ ईसाई और सिख समुदाय के आयोजनों—मनाए जाते हैं, इसलिए रामज़ान के दौरान मस्जिदों को भी लाउडस्पीकर से समय की छोटी घोषणाएं करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
कमाल अख्तर ने दावा किया कि मस्जिदों से ‘सेहरी’ (सुबह रोज़ा शुरू करने से पहले का भोजन) और ‘इफ्तार’ (रोज़ा खोलने का भोजन) के समय की जानकारी देने की परंपरा पुरानी है और यह लोगों की सहूलियत के लिए होती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने हाल में कई धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटवाए हैं, इसलिए रमज़ान में इन घोषणाओं की अनुमति देकर रोज़ेदारों को राहत दी जाए।
सरकार की दलील: “SC ने 10 PM–6 AM तक रोक लगाई है”
कमाल अख्तर के सवाल का जवाब देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर नहीं चलने चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि शादियों में भी अगर तय समय के बाद लाउडस्पीकर चलने की शिकायत आती है तो पुलिस कार्रवाई करके नियम लागू कराती है।
सरकार की तरफ से यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार 10 PM से 6 AM के बीच लाउडस्पीकर/PA सिस्टम/साउंड‑इंस्ट्रूमेंट्स की अनुमति केवल “बंद परिसर” (closed premises) जैसे ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस रूम और बैंक्वेट हॉल के अंदर “आंतरिक संचार” के लिए दी गई है। यानी खुले में रात के समय लाउडस्पीकर चलाना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
“घड़ियाँ नहीं थीं, अब मोबाइल में समय है”—मंत्री खन्ना का तर्क
मंत्री खन्ना ने मस्जिदों से ‘सेहरी’ और ‘इफ्तार’ के ऐलान की परंपरा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह परंपरा उस दौर से जुड़ी है जब लोगों के पास घड़ियां नहीं थीं और समय का अंदाजा सूरज की स्थिति से लगाया जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और लगभग हर व्यक्ति—चाहे रिक्शा चालक हो, ठेला लगाने वाला हो या सब्जी बेचने वाला—के पास मोबाइल फोन है, जिसमें समय दिखता है।
उन्होंने कहा कि सरकार किसी के धार्मिक विश्वास में हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नियम बना दिए हैं और “यह हमारा आदेश नहीं” है। इसका मतलब सरकार की लाइन यह है कि धार्मिक जरूरतों और कानून/नियमों के बीच संतुलन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही बनेगा।
विपक्ष की आपत्ति: “ऑर्डर साउंड लेवल पर है, इस्तेमाल पर नहीं?”
कमाल अख्तर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश ध्वनि स्तर (sound levels) से जुड़ा है और यह लाउडस्पीकर के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं करता। उन्होंने मंत्री से आग्रह किया कि रमज़ान में छोटी घोषणाओं की अनुमति दी जाए। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री ने इस पर आगे कोई अतिरिक्त जवाब नहीं दिया।
यह बहस बताती है कि लाउडस्पीकर का विषय अब केवल प्रशासनिक नियम नहीं रह गया है, बल्कि इसमें धार्मिक परंपरा, सार्वजनिक शांति, शोर‑प्रदूषण और समानता जैसे पहलू भी जुड़ जाते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय प्रशासन के स्तर पर भी अलग-अलग जिलों में चर्चा का विषय बन सकता है।
कौन क्या बोला? (संक्षिप्त तालिका)
| पक्ष | क्या मांग/दावा | सरकार का जवाब |
|---|---|---|
| SP विधायक कमाल अख्तर | रमज़ान में सेहरी‑इफ्तार के समय की घोषणाओं के लिए मस्जिदों को लाउडस्पीकर की अनुमति मिले | SC के नियमों के तहत रात 10 के बाद अनुमति नहीं |
| मंत्री सुरेश कुमार खन्ना | यह परंपरा पुराने समय की, अब मोबाइल में समय; सरकार धार्मिक विश्वास में दखल नहीं देती | “यह हमारा आदेश नहीं”, सुप्रीम कोर्ट की 10 PM–6 AM पाबंदी लागू |
| सुप्रीम कोर्ट नियम (सरकार के अनुसार) | रात 10 से सुबह 6 तक लाउडस्पीकर/PA सिस्टम पर रोक, बंद परिसर में अपवाद | नियमों का पालन अनिवार्य |
FAQs (5)
- UP सरकार ने रमज़ान में मस्जिद घोषणाओं पर क्या कहा?
सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर/PA सिस्टम का उपयोग नहीं किया जा सकता, इसलिए नियम सभी पर लागू हैं। - यह मुद्दा विधानसभा में किसने उठाया?
समाजवादी पार्टी के सदस्य कमाल अख्तर ने जीरो आवर में यह मुद्दा उठाया और रमज़ान में घोषणाओं की अनुमति मांगी। - मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने परंपरा को लेकर क्या तर्क दिया?
उन्होंने कहा कि यह परंपरा उस समय की है जब घड़ियां आम नहीं थीं, लेकिन अब लगभग हर व्यक्ति के पास मोबाइल फोन है जो समय बताता है, इसलिए “जरूरत” पहले जैसी नहीं रही। - सुप्रीम कोर्ट के नियम में क्या अपवाद बताया गया?
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रतिबंध के बावजूद बंद परिसर जैसे ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस रूम और बैंक्वेट हॉल के अंदर “आंतरिक संचार” के लिए अपवाद बताया गया है। - विपक्ष ने सरकार से क्या मांग की?
विपक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश ध्वनि स्तर से जुड़ा है और लाउडस्पीकर को पूरी तरह नहीं रोकता; इसलिए रमज़ान में छोटी घोषणाओं की अनुमति दी जाए।
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