धनबाद : नगर निगम के नव निर्वाचित मेयर और पार्षदों का शपथ ग्रहण 18 मार्च को होगा। इसके साथ ही नगर निगम का नया बोर्ड अस्तित्व में आ जाएगा। नगर निगम बोर्ड की पहली बैठक भी शपथ ग्रहण के एक हफ्ते के अंदर बुलाई जाएगी।
शहर की नई सरकार को निगम का खजाना खाली मिलेगा। नगर निगम के पास अभी मात्र 337 करोड़ रुपए ही खाते में पड़े हैं। इसमें भी कई राशि केंद्र से मिली है, जिसके लिए योजनाएं पहले से ही तय हैं। नगर निगम बोर्ड की पहली बैठक में गर्मी को देखते हुए पानी की योजनाएं सबसे अधिक आएंगी, लेकिन इन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए नगर निगम के पास फंड नहीं होगा।
शहर में सबसे अधिक जरूरी सड़क, नाली है। इसमें मात्र 30 करोड़ रुपए हैं। नगर निगम बोर्ड को फंड के लिए या तो सरकार से गुहार लगानी होगी या फिर डीएमएफटी से मांगनी होगी। डीएमएफटी से फंड लेने के लिए सांसद-विधायक की स्वीकृति होनी जरूरी है। ऐसे में चुनाव जीतकर पहुंचे निगम के नए जनप्रतिनिधियों को फंड की कमी झेलनी पड़ेगी। अब नगर निगम को मार्च क्लोजिंग के समय सरकार से कुछ फंड मिल सकता है। नए वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल के बाद फंड आने की संभावना है।
आमदनी दो करोड़, खर्चा पांच करोड़ महीने नगर निगम के आंतरिक स्रोत से इतनी कम राशि आती है कि नगर निगम बोर्ड चाहकर भी कोई नई योजना इस राशि से नहीं बना सकता है। नगर निगम को हर माह टैक्स समेत अन्य स्रोतों से महीने में दो करोड़ रुपए आते हैं। वहीं खर्चा लगभग पांच करोड़ रुपए है। इसमें डोर टू डोर में 2.5 करोड़, वेतन में दो करोड़ और मिसलेनियस के रूप में लगभग 40-50 लाख रुपए का खर्च आता है। निगम अपना खुद का खर्चा भी टैक्स के रूप में नहीं कमा पा रहा है।
सड़क निर्माण : 30 करोड़
15वें वित्त आयोग की राशि : 150 करोड़ (तालाब निर्माण, पार्क निर्माण, बिटुमिनस की बड़ी सड़क)
14वें वित्त आयेाग की राशि : 80 करोड़
पीएम आवास योजना : 01 करोड़ शहरी जलापूर्ति योजना : 06 करोड़
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