कानपुर देहात । जनपद कानपुर देहात में निजी स्कूलों की मनमानी अब खुलकर सामने आ रही है। महंगी किताबों और तय दुकानों से खरीदारी के दबाव ने अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है। इस पूरे मामले को लेकर “एक उम्मीद जन कल्याण सेवा समिति” ने मोर्चा खोल दिया है और सीधे प्रदेश के शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
कानपुर देहात में शिक्षा के नाम पर हो रहे कथित खेल को लेकर “एक उम्मीद जन कल्याण सेवा समिति” के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी के माध्यम से शिक्षा मंत्री को संबोधित पत्र अधिकारियों को सौंपा।
पत्र के माध्यम से समिति के पदाधिकारियों ने निजी विद्यालय प्रबंधन पर अभिभावकों को एक विशेष दुकान से ही महंगी किताबें और स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य करने का आरोप लगाया।
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यह न केवल अभिभावकों के अधिकारों का हनन है, बल्कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का भी खुला उल्लंघन है। महंगी प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें थोपे जाने से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार आर्थिक बोझ तले दबते जा रहे हैं।
समिति के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह ने साफ कहा कि स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य की जाएं और किसी भी अभिभावक को एक तय दुकान से खरीदारी के लिए मजबूर न किया जाए।
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