असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि असम विधानसभा चुनाव के लिए NDA का सीट-शेयरिंग फार्मूला “डन डील” है और तय हो चुका है कि कौन-सा दल कहां से लड़ेगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों की सूची लेकर गृह मंत्री अमित शाह से मिलेगा। 126 सीटों पर चुनाव मार्च-अप्रैल में संभावित हैं, यह 2023 डिलिमिटेशन के बाद पहला चुनाव होगा।
डिलिमिटेशन के बाद पहली असम विधानसभा चुनाव: NDA में सीटों पर सहमति, हिमंता का बड़ा बयान
असम चुनाव 2026: NDA सीट-शेयरिंग ‘Done Deal’—हिमंता सरमा का दावा, अब अमित शाह को दिखेगी उम्मीदवारों की लिस्ट
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य विधानसभा चुनावों से पहले NDA के भीतर सीट-शेयरिंग को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के अंदर कौन-सा दल किस सीट पर चुनाव लड़ेगा, यह तय हो चुका है और यह एक “डन डील” है। सरमा ने यह बात राज्य BJP मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही और दावा किया कि NDA में गठबंधन “कंप्लीट” है तथा इसे जोड़ने में कोई समस्या नहीं है।
सरमा के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों की सूची लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलेगा। उनका कहना था कि राज्य नेतृत्व जब फाइनल प्रक्रिया से गुजर जाएगा, तब अमित शाह के साथ बैठक में संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट साझा की जाएगी।
NDA में कौन-कौन से दल हैं और उनकी ताकत क्या है?
असम में NDA के प्रमुख घटक दलों में BJP, असम गण परिषद (AGP), यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) शामिल हैं और इन सभी के विधानसभा में सदस्य हैं। इसके अलावा राभा हसोंग जौथा संग्राम समिति (RHJSS) और जनशक्ति पार्टी (JP) भी NDA का हिस्सा हैं, लेकिन इनके विधानसभा में विधायक नहीं हैं।
वर्तमान विधानसभा ताकत की बात करें तो BJP के 64 विधायक हैं, AGP के 9, UPPL के 7 और BPF के 3 विधायक बताए गए हैं। यानी गठबंधन के भीतर सीटों का बंटवारा तय करते वक्त हर दल अपने-अपने क्षेत्रीय प्रभाव और संगठनात्मक ताकत के आधार पर दावा रखता है—और यही वजह है कि “डन डील” वाला बयान राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है।
विपक्ष की संख्या और चुनावी मुकाबले का संकेत
विपक्षी खेमे में कांग्रेस के 26 विधायक, AIUDF के 15 और CPI(M) का 1 विधायक है, जबकि 1 निर्दलीय विधायक भी मौजूद है। इस आंकड़े से साफ है कि विधानसभा में NDA की स्थिति फिलहाल मजबूत है, लेकिन चुनाव नई सीमाओं और नए आरक्षण समीकरणों के साथ होने जा रहे हैं, इसलिए सीट-शेयरिंग का सही फॉर्मूला NDA के लिए निर्णायक बन सकता है।
मार्च-अप्रैल में चुनाव संभव: डिलिमिटेशन के बाद पहली परीक्षा
रिपोर्ट के मुताबिक, 126 सदस्यीय असम विधानसभा के चुनाव मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है। यह चुनाव 2023 में हुए डिलिमिटेशन (सीट परिसीमन) अभ्यास के बाद पहला विधानसभा चुनाव होगा। डिलिमिटेशन के बाद कई सीटों की भौगोलिक सीमाएं बदली हैं और कुछ सीटों का आरक्षण स्टेटस भी बदला है—कुछ सामान्य सीटें आरक्षित हुईं और कुछ आरक्षित सीटें सामान्य हुईं।
यही बदलाव NDA और विपक्ष—दोनों के लिए जटिलता बढ़ाता है, क्योंकि पुराने चुनावी गणित के आधार पर सीटों की “सेफ” और “टफ” कैटेगरी बदल सकती है। ऐसे में गठबंधन के भीतर कौन-सी सीट किसे दी जाए, यह सिर्फ पार्टी की ताकत नहीं बल्कि नए भूगोल और नए वोट-मिक्स पर भी निर्भर करता है।
“फरवरी 15 तक फाइनल” से “डन डील” तक: हिमंता की टाइमलाइन
सरमा ने पहले 7 जनवरी को कहा था कि BJP अपने सहयोगियों के साथ सीट-शेयरिंग को फरवरी 15 तक औपचारिक रूप से फाइनल कर सकती है। इससे पहले 5 दिसंबर (पिछले साल) उन्होंने कहा था कि यह प्रक्रिया 15 जनवरी तक पूरी होने की उम्मीद है। अब उनका यह कहना कि सीट-शेयरिंग “डन डील” है, यह संकेत देता है कि अंदरूनी स्तर पर फॉर्मूला तय हो चुका है और अगला कदम उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम चर्चा का है।
NDA के लिए आगे की रणनीति: उम्मीदवार चयन क्यों सबसे बड़ी चुनौती है?
सीट-शेयरिंग तय हो जाना बड़ी बात है, लेकिन असली परीक्षा उम्मीदवार चयन में होती है। डिलिमिटेशन के बाद कई क्षेत्रों में नए दावेदार उभरते हैं, पुराने नेताओं के प्रभाव क्षेत्र बदलते हैं और टिकट कटने का डर बढ़ता है। यही वजह है कि सरमा का “राज्य नेतृत्व अमित शाह से संभावित उम्मीदवारों की सूची लेकर मिलेगा” वाला बयान बताता है कि अब पार्टी “कैंडिडेट फाइनलाइजेशन” के चरण में जा रही है।
सीट-शेयरिंग डन डील होने का चुनावी अर्थ क्या है?
राजनीति में “डन डील” का संदेश अक्सर दो काम करता है। पहला, गठबंधन के भीतर अनिश्चितता को खत्म कर कार्यकर्ताओं में एकजुटता का संकेत देता है। दूसरा, विपक्ष को यह बताता है कि सत्तारूढ़ गठबंधन अंदरूनी खींचतान से कमजोर नहीं है और चुनाव के लिए तैयार है। सरमा का बयान भी इसी दिशा में देखा जा रहा है, खासकर तब जब डिलिमिटेशन के बाद सीट और आरक्षण के बदलाव से हर दल के अंदर नए समीकरण बन रहे हैं।
FAQs (5)
- हिमंता बिस्वा सरमा ने NDA सीट-शेयरिंग पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि असम विधानसभा चुनाव के लिए NDA के भीतर सीट-शेयरिंग “डन डील” है और तय है कि कौन-सा दल कहां से चुनाव लड़ेगा। - असम NDA में कौन-कौन से दल हैं?
BJP, AGP, UPPL और BPF के विधानसभा में सदस्य हैं; RHJSS और जनशक्ति पार्टी (JP) भी NDA में हैं लेकिन इनके विधायक नहीं हैं। - चुनाव कब होने की संभावना बताई गई है?
126 सदस्यीय असम विधानसभा के चुनाव मार्च-अप्रैल में होने की उम्मीद बताई गई है। - यह चुनाव क्यों खास है?
यह 2023 के डिलिमिटेशन के बाद पहला विधानसभा चुनाव होगा, जिसमें सीटों की सीमाएं और आरक्षण स्थिति कई जगह बदली है। - आगे NDA की प्रक्रिया क्या होगी?
सरमा के अनुसार, प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों की सूची लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलेगा।
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