DGCA ने ‘अनरूली/डिसरप्टिव’ यात्रियों पर जीरो-टॉलरेंस के तहत नए ड्राफ्ट नियम सुझाए हैं। एयरलाइंस 30 दिन तक सीधे बैन लगा सकेगी, गंभीर मामलों में 2 साल+ का बैन प्रस्तावित है। अपील, कमेटी और ऑल-एयरलाइंस अनुपालन भी कड़ा होगा।
एयरलाइंस सीधे लगा सकेगी उड़ान बैन? DGCA ने प्रस्ताव रखा—डिसरप्टिव यात्रियों पर त्वरित कार्रवाई, नो-फ्लाई नियम टाइट
DGCA का ‘जीरो टॉलरेंस’ ड्राफ्ट: अनरूली/डिसरप्टिव यात्रियों पर तुरंत बैन और लंबी पाबंदियों की तैयारी
भारत में फ्लाइट के दौरान बदसलूकी करने वाले यात्रियों के लिए नियम और सख्त होने वाले हैं। नागरिक उड्डयन नियामक DGCA ने “No/Zero Tolerance Policy” के तहत अनरूली (unruly) और डिसरप्टिव (disruptive) यात्रियों से निपटने के लिए ड्राफ्ट नियम सार्वजनिक किए हैं, जिन पर 16 मार्च तक स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं। अगर ये नियम लागू होते हैं, तो एयरलाइंस को तेज कार्रवाई के ज्यादा अधिकार मिलेंगे और गंभीर मामलों में लंबी अवधि तक नो-फ्लाई बैन लग सकेगा।
यह ड्राफ्ट 2017 के मौजूदा CAR (Civil Aviation Requirement) फ्रेमवर्क की जगह लेने के लिए लाया गया है। DGCA का तर्क है कि उड़ान के दौरान अनुशासन और सुरक्षा बनाए रखना सिर्फ क्रू की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम—एयरलाइंस, एयरपोर्ट सुरक्षा और कानून-व्यवस्था—की साझा जिम्मेदारी है।
ड्राफ्ट में सबसे बड़ा बदलाव: ‘डिसरप्टिव’ कैटेगरी और 30 दिन का फास्ट-ट्रैक बैन
नई ड्राफ्ट व्यवस्था में DGCA ने एक नई कैटेगरी—“disruptive passenger”—का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई यात्री “डिसरप्टिव” व्यवहार करता है, तो एयरलाइन बिना इंडिपेंडेंट कमेटी को रेफर किए सीधे 30 दिनों तक का उड़ान बैन लगा सकेगी। यह एक तरह का “कूलिंग-ऑफ” पीरियड माना जा रहा है ताकि घटना के बाद तुरंत डिटरेंस बन सके।
महत्वपूर्ण बात यह भी है कि एयरलाइन द्वारा सीधे लगाए गए इस 30-दिन बैन के खिलाफ यात्री 15 दिनों के भीतर एयरलाइन की इंडिपेंडेंट कमेटी में अपील कर सकेगा। यानी तेज कार्रवाई के साथ न्यूनतम अपील-रूट भी रखा गया है।
अनरूली पैसेंजर के लिए ग्रेडेड सजा: Level 1 से Level 4 तक
DGCA ने अनरूली व्यवहार को 4 लेवल में बांटने का प्रस्ताव रखा है, ताकि एक ही तराजू से हर घटना को न तौला जाए। इसमें छोटी बदसलूकी से लेकर जानलेवा हिंसा और कॉकपिट/क्रू कंपार्टमेंट ब्रेच तक शामिल हैं।
ड्राफ्ट में उदाहरण के तौर पर बताया गया है:
- Level 1: शारीरिक इशारे, वर्बल हरासमेंट, नशे में हंगामा जैसी हरकतें।
- Level 2: धक्का-मुक्की, मारना, पकड़ना, अनुचित स्पर्श/सेक्शुअल हरासमेंट जैसी शारीरिक बदसलूकी।
- Level 3: लाइफ-थ्रेटनिंग व्यवहार, जैसे एयरक्राफ्ट सिस्टम को नुकसान, गंभीर हिंसा।
- Level 4: फ्लाइट क्रू कंपार्टमेंट में घुसने की कोशिश या वास्तविक ब्रेच।
कितने समय का नो-फ्लाई बैन? प्रस्तावित अवधि
ड्राफ्ट के मुताबिक, कमेटी के फैसले के बाद लगाए जाने वाले बैन की अवधि अपराध के लेवल पर निर्भर होगी:
- Level 1: 3 महीने तक।
- Level 2: 6 महीने तक।
- Level 3 और Level 4: 2 साल या उससे अधिक।
साथ ही, “इंटरिम बैन” की व्यवस्था भी कड़ी की जा रही है। ड्राफ्ट में प्रस्ताव है कि इंडिपेंडेंट कमेटी के फैसले तक एयरलाइन 45 दिनों तक का अस्थायी बैन लगा सकेगी, और कमेटी के निर्णय का समय भी 45 दिन तक रखा गया है।
महत्वपूर्ण बदलाव: एक एयरलाइन ने बैन किया तो बाकी को भी मानना होगा
ड्राफ्ट का एक बड़ा प्रावधान यह है कि जब किसी यात्री को कमेटी के निर्णय के बाद नो-फ्लाई लिस्ट में डाला जाएगा, तो अन्य सभी एयरलाइंस को भी उसी प्रतिबंध का पालन करना होगा। अभी यह कई मामलों में वैकल्पिक/अलग-अलग प्रैक्टिस के तौर पर देखा जाता है, लेकिन ड्राफ्ट इसे “अनिवार्य” बनाना चाहता है ताकि सिस्टम में एकरूपता रहे।
अपील कैसे होगी? 60 दिन वाला नियम
ड्राफ्ट के मुताबिक, कमेटी के निर्णय के बाद नो-फ्लाई लिस्ट में डाले गए यात्री 60 दिनों के भीतर नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा गठित Appellate Committee में अपील कर सकेंगे। वहीं, “डिसरप्टिव” कैटेगरी में सीधे लगाए गए 30-दिन बैन के खिलाफ 15 दिन में एयरलाइन की इंडिपेंडेंट कमेटी में अपील का विकल्प होगा।
एयरपोर्ट पर हंगामा: BCAS और CISF की भूमिका भी बढ़ेगी
DGCA ने प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट पर डिसरप्टिव व्यवहार के मामलों में Bureau of Civil Aviation Security (BCAS) और CISF (Central Industrial Security Force) को कार्रवाई के लिए सक्षम किया जाएगा। इसका मतलब है कि सिर्फ ऑनबोर्ड ही नहीं, बल्कि बोर्डिंग से पहले, सिक्योरिटी एरिया या टर्मिनल पर भी अनुशासन तोड़ने पर कार्रवाई का फ्रेमवर्क मजबूत होगा।
एयरलाइंस पर नई जिम्मेदारियां: SOP, रिपोर्टिंग और ‘अर्ली साइन’ पहचान
ड्राफ्ट सिर्फ सजा पर नहीं, रोकथाम पर भी फोकस करता है। DGCA ने प्रस्ताव रखा है कि एयरलाइंस को अनरूली यात्रियों को हैंडल करने और DGCA को रिपोर्ट करने के लिए एक SOP (Standard Operating Procedure) बनानी होगी और उसे सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स में सर्कुलेट करना होगा।
ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि कई बार अनरूली व्यवहार “खराब सेवा” या लगातार असंतोष की वजह से बढ़ सकता है, इसलिए एयरलाइन स्टाफ को शुरुआती संकेतों पर ही ध्यान देना चाहिए और genuine passenger rights के समाधान के दौरान स्टाफ को discourteous नहीं होना चाहिए।
2017 नियम बनाम 2026 ड्राफ्ट: क्या बदलेगा?
तालिका: मुख्य अंतर (सरल भाषा में)
यात्रियों के लिए “क्या करें, क्या न करें” (प्रैक्टिकल गाइड)
- ऑनबोर्ड बहस बढ़े तो पहले क्रू को शांत तरीके से बताएं; बहस को “फिजिकल” बनने न दें।
- शराब/नशे की हालत में उड़ान के नियमों का उल्लंघन सबसे तेज एक्शन ट्रिगर कर सकता है।
- सीट, लगेज, या सर्विस से शिकायत हो तो लिखित/डिजिटल शिकायत चैनल (एयरलाइन ऐप/मेल) का उपयोग करें, क्योंकि ड्राफ्ट में “genuine rights” की बात भी कही गई है।
- सिक्योरिटी एरिया/एयरपोर्ट पर हंगामा करने पर BCAS/CISF कार्रवाई कर सकते हैं, इसलिए टर्मिनल में भी संयम रखें।
5 FAQs
- DGCA ने अनरूली यात्रियों के लिए क्या नया प्रस्ताव रखा है?
DGCA ने जीरो-टॉलरेंस के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनमें “disruptive passenger” की नई कैटेगरी, तेज बैन मेकनिज्म, ग्रेडेड सजा और अपील सिस्टम में बदलाव शामिल हैं। - क्या एयरलाइंस अब सीधे बैन लगा सकेगी?
ड्राफ्ट के अनुसार, “disruptive” व्यवहार के मामलों में एयरलाइन बिना कमेटी को रेफर किए 30 दिन तक सीधे उड़ान बैन लगा सकेगी। - Level 1, 2, 3, 4 में क्या अंतर है?
Level 1 में वर्बल/हंगामा जैसे मामले, Level 2 में शारीरिक/सेक्शुअल हरासमेंट, Level 3 में जानलेवा हिंसा/सिस्टम डैमेज और Level 4 में कॉकपिट/क्रू कंपार्टमेंट ब्रेच शामिल है। - बैन कितने समय का हो सकता है?
ड्राफ्ट के अनुसार, Level 1 पर 3 महीने तक, Level 2 पर 6 महीने तक और Level 3/4 पर 2 साल या उससे अधिक का बैन हो सकता है। - अपील कैसे होगी?
कमेटी के निर्णय से नो-फ्लाई लिस्ट में डाले गए यात्री 60 दिन में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की Appellate Committee में अपील कर सकते हैं, जबकि “disruptive” कैटेगरी में सीधे 30-दिन बैन पर 15 दिन में एयरलाइन की इंडिपेंडेंट कमेटी में अपील का विकल्प है।
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