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नौसेना को मिला ‘फ्लोटिंग क्लासरूम’: INS कृष्णा लॉन्च

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भारतीय नौसेना ने कैडेट्स की समुद्री ट्रेनिंग के लिए पहला स्वदेशी Cadet Training Ship ‘INS कृष्णा’ लॉन्च किया। L&T कत्तुपल्ली में बना यह “फ्लोटिंग क्लासरूम” नेविगेशन, सीमैनशिप और वॉच-कीपिंग की रियल कंडीशंस में ट्रेनिंग देगा; औपचारिक डिलीवरी/इंडक्शन 2026 के अंत तक प्रस्तावित है।

‘मेक इन इंडिया’ की समुद्री जीत: L&T कत्तुपल्ली में बना INS कृष्णा, अगले 30 साल की ट्रेनिंग रीढ़ बनेगा

INS कृष्णा: भारतीय नौसेना का नया “फ्लोटिंग क्लासरूम”, भविष्य के अफसरों की समुद्री ट्रेनिंग को नई दिशा

भारतीय नौसेना ने कैडेट्स की समुद्र-आधारित ट्रेनिंग को ज्यादा व्यवस्थित और आधुनिक बनाने के लिए नया कदम उठाया है। नौसेना ने ‘INS कृष्णा’ को पेश किया है, जो तीन स्वदेशी Cadet Training Ships (CTS) में पहला है और कैडेट्स के लिए “फ्लोटिंग क्लासरूम और लिविंग लैब” की तरह काम करेगा। इसका मकसद यह है कि कैडेट्स को नेविगेशन, सीमैनशिप और वॉच-कीपिंग जैसी स्किल्स केवल क्लासरूम में नहीं, बल्कि रियल समुद्री परिस्थितियों में हाथों-हाथ सिखाई जा सकें।

डिफेंस मंत्रालय के अनुसार, इन तीनों कैडेट ट्रेनिंग शिप्स से नौसेना की सी-ट्रेनिंग व्यवस्था में पहले की सीमाओं (limitations) को दूर किया जाएगा। योजना यह है कि कैडेट्स शोर-बेस्ड बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के तुरंत बाद समुद्र में ट्रेनिंग के लिए इन जहाजों पर एम्बार्क करें, ताकि शुरुआती करियर में ही उनकी प्रोफेशनल सी-रीडिनेस मजबूत हो।

लॉन्च से डिलीवरी तक: INS कृष्णा कब और कहां बना?

INS कृष्णा का लॉन्च 16 फरवरी को हुआ, जिसे CDS जनरल अनिल चौहान की पत्नी अनुपमा चौहान ने लॉन्च किया। इस मौके पर सीनियर डिफेंस ऑफिशियल्स और शिप-बिल्डर लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

यह जहाज (Yard 18003) चेन्नई के पास कत्तुपल्ली स्थित L&T शिपयार्ड में बना है। रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक जहाज स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित है, और इसका औपचारिक डिलीवरी/इंडक्शन 2026 के अंत में प्रस्तावित है।

कैडेट ट्रेनिंग शिप्स क्यों जरूरी हैं?

पहले नौसेना कैडेट्स को ऑपरेशनल वॉरशिप्स पर ट्रेनिंग के लिए स्लॉट्स और संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे ट्रेनिंग शेड्यूल और “हैंड्स-ऑन” एक्सपोजर में सीमाएं आती थीं। CTS जैसी डेडिकेटेड ट्रेनिंग शिप्स का फायदा यह है कि पूरी डिजाइन ही प्रशिक्षण के उद्देश्य से तैयार होती है—क्लासरूम, ट्रेनिंग ब्रिज, चार्ट रूम, और रहने की व्यवस्था सब उसी हिसाब से बनती है।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी कहा है कि ये तीनों जहाज अगले लगभग तीन दशकों तक नौसेना के सी-ट्रेनिंग फ्रेमवर्क का मुख्य आधार (core) बनेंगे। यानी यह सिर्फ एक नया जहाज नहीं, बल्कि ट्रेनिंग सिस्टम का स्ट्रक्चरल अपग्रेड है।

INS कृष्णा की क्षमता और ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

INS कृष्णा का पूरा कॉन्सेप्ट “सीखो और करके सीखो” (learn by doing) पर टिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 3 क्लासरूम हैं जिनमें हर एक की क्षमता 70 कैडेट्स की है, साथ ही एक स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग ब्रिज और चार्ट रूम भी है।

यह जहाज एक साथ 20 ऑफिसर्स, 150 सेलर्स और 200 कैडेट्स को रख/समायोजित (accommodate) कर सकता है। यही वजह है कि इसे कैडेट्स के लिए “लिविंग लैब” भी कहा जा रहा है, क्योंकि यहां ट्रेनिंग सिर्फ कुछ घंटे की नहीं, बल्कि पूरी “समुद्री दिनचर्या” के साथ होती है।

INS कृष्णा: प्रमुख स्पेसिफिकेशन्स (टेबल)

फीचरINS कृष्णा का डाटा
प्रकारCadet Training Ship (CTS), “Floating classroom”
निर्माणकर्ता/यार्डL&T, कत्तुपल्ली (चेन्नई के पास), Yard 18003
डिस्प्लेसमेंटलगभग 4,700 टन
टॉप स्पीड20 नॉट तक
एंड्योरेंस60 दिन
एक साथ क्षमता20 ऑफिसर्स + 150 सेलर्स + 200 कैडेट्स
ट्रेनिंग सुविधाएं3 क्लासरूम (70-70 कैडेट्स), ट्रेनिंग ब्रिज, चार्ट रूम
डिलीवरी/इंडक्शनऔपचारिक डिलीवरी 2026 के अंत में प्रस्तावित

सिर्फ ट्रेनिंग नहीं: HADR और SAR में भी भूमिका

INS कृष्णा को सिर्फ कैडेट ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रखा गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह जहाज नॉन-कॉम्बैटेंट एवैक्यूएशन (NEO), ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (HADR) और सर्च-एंड-रेस्क्यू (SAR) ऑपरेशंस में भी काम आ सकेगा। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर यह “ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म” होने के बावजूद वास्तविक जीवन के मानवीय ऑपरेशंस में भी उपयोगी रहेगा।

यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री जिम्मेदारियों और “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” वाली भूमिका के साथ भी मेल खाती है, जहां आपदाओं के समय तेज सहायता पहुंचाना रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ का डिफेंस एंगल

डिफेंस मंत्रालय ने INS कृष्णा को स्वदेशी शिपबिल्डिंग के लिए एक “महत्वपूर्ण माइलस्टोन” बताया है। बयान के मुताबिक यह कदम सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अनुरूप है।

देश में डिजाइन और निर्माण का मतलब यह भी है कि भविष्य में मेंटेनेंस, अपग्रेड और स्पेयर सपोर्ट के लिए विदेशी निर्भरता कम हो सकती है। इससे नौसेना के ट्रेनिंग फ्लीट की लंबे समय की लागत और उपलब्धता (availability) पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

महिला कैडेट्स और विदेशी मित्र देशों के कैडेट्स के लिए भी अवसर

रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, इन कैडेट ट्रेनिंग शिप्स का उपयोग समुद्र में अधिकारी कैडेट्स की ट्रेनिंग के लिए होगा, जिसमें महिला कैडेट्स भी शामिल होंगी। साथ ही, “मित्र विदेशी देशों” के कैडेट्स को भी यहां ट्रेनिंग देने की बात कही गई है। यह कदम भारतीय नौसेना की ट्रेनिंग डिप्लोमेसी को भी मजबूत कर सकता है, क्योंकि सैन्य प्रशिक्षण अक्सर दीर्घकालिक रक्षा संबंधों का आधार बनता है।

आगे क्या? INS कृष्णा के बाद बाकी दो CTS

INS कृष्णा तीन कैडेट ट्रेनिंग शिप्स में पहला है। बाकी दो जहाज आने पर नौसेना की ट्रेनिंग क्षमता और स्केल बढ़ेगा—यानी एक साथ ज्यादा बैच समुद्र में ट्रेन हो सकेंगे और ट्रेनिंग की क्वालिटी/स्टैंडर्डाइजेशन में भी सुधार होगा।

औपचारिक डिलीवरी 2026 के अंत में प्रस्तावित होने के कारण, अगले कुछ महीनों में सी-ट्रायल, सिस्टम इंटीग्रेशन और ट्रेनिंग-इक्विपमेंट की फाइनल इंस्टॉलेशन जैसे चरण अहम रहेंगे।

FAQs (5)

  1. INS कृष्णा क्या है?
    INS कृष्णा भारतीय नौसेना का स्वदेशी Cadet Training Ship (CTS) है, जो कैडेट्स के लिए “फ्लोटिंग क्लासरूम और लिविंग लैब” की तरह समुद्र में ट्रेनिंग देगा।
  2. INS कृष्णा कहां बना है और किसने बनाया?
    यह जहाज चेन्नई के पास कत्तुपल्ली स्थित L&T शिपयार्ड में बना है और इसे स्वदेशी रूप से डिजाइन व निर्मित बताया गया है।
  3. INS कृष्णा की क्षमता और स्पीड क्या है?
    रिपोर्ट के मुताबिक यह लगभग 4,700 टन डिस्प्लेसमेंट वाला जहाज है, 20 नॉट तक स्पीड पकड़ सकता है और 60 दिन की एंड्योरेंस रखता है; इसमें 20 ऑफिसर्स, 150 सेलर्स और 200 कैडेट्स एक साथ रह सकते हैं।
  4. यह जहाज किन-किन कामों के लिए उपयोग होगा?
    मुख्य रूप से अधिकारी कैडेट्स (महिला कैडेट्स समेत) की समुद्री ट्रेनिंग के लिए, और साथ ही NEO, HADR तथा SAR जैसे ऑपरेशंस के लिए भी।
  5. INS कृष्णा की डिलीवरी/इंडक्शन कब तक होगी?
    रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, जहाज की औपचारिक डिलीवरी/इंडक्शन 2026 के अंत तक प्रस्तावित है।

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