भारत सरकार ने US सुप्रीम कोर्ट के ट्रंप ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ पर 6-3 फैसले को नोट किया है और उसके प्रभावों तथा अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों का अध्ययन कर रही है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा—केंद्र आदेश देखकर ही आधिकारिक प्रतिक्रिया देगा।
IEEPA के तहत टैरिफ ‘असंवैधानिक’! US सुप्रीम कोर्ट का 6-3 फैसला, भारत बोला—“अगले कदम देख रहे हैं”
US सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप टैरिफ पर बड़ा फैसला: भारत ने तोड़ी चुप्पी, “इम्प्लीकेशंस स्टडी कर रहे हैं”
भारत सरकार ने US सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर अपना पहला औपचारिक संकेत दिया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ को रद्द कर दिया गया। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि उसने सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ जजमेंट को “नोट” किया है और साथ ही ट्रंप प्रशासन के अगले कदमों तथा उनके संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है। यह बयान बताता है कि नई दिल्ली फिलहाल कोर्ट के आदेश के साथ-साथ वॉशिंगटन की पॉलिसी-रिस्पॉन्स को भी देखकर ही अपना सार्वजनिक स्टैंड तय करना चाहती है।
मंत्रालय के आधिकारिक प्रेस स्टेटमेंट में कहा गया, “हमने US सुप्रीम कोर्ट का कल का टैरिफ जजमेंट नोट किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की है। US प्रशासन ने कुछ कदम घोषित किए हैं। हम इन सभी डेवेलपमेंट्स को उनके इम्प्लीकेशंस के लिए स्टडी कर रहे हैं।”
प्रल्हाद जोशी का बयान: “केंद्र कोर्ट आदेश पढ़कर प्रतिक्रिया देगा”
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी इसी दिन कहा कि भारत सरकार US सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रिव्यू करेगी और उसके बाद ही आधिकारिक प्रतिक्रिया देगी। यह भारतीय सरकार की ओर से इस मुद्दे पर पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया मानी जा रही है। जोशी ने कहा कि या तो वाणिज्य मंत्रालय या फिर विदेश मंत्रालय (MEA) आदेश का अध्ययन करने के बाद औपचारिक प्रतिक्रिया देगा।
US सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
रिपोर्ट के मुताबिक, US सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1977 के आपातकालीन कानून IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) का उपयोग करके व्यापक (broad) टैरिफ लगाने में अपनी वैधानिक सीमा (authority) से आगे निकलकर काम किया। कोर्ट ने ट्रंप के IEEPA के तहत ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ लगाने को असंवैधानिक करार दिया, जिससे बिना स्पष्ट कांग्रेस मंजूरी के व्यापक व्यापार टैरिफ लगाने की क्षमता पर रोक लगती है।
इस फैसले के बाद ग्लोबल ट्रेड में अनिश्चितता बढ़ गई है क्योंकि यह साफ नहीं है कि ट्रंप प्रशासन अब टैरिफ के लिए कौन सा वैकल्पिक कानूनी रास्ता अपनाएगा। इसी वजह से भारत भी “हड़बड़ी” में बयान देने से बचते हुए असर का आकलन कर रहा है।
ट्रंप का दावा: “Nothing changes… They’ll be paying tariffs”
कोर्ट से झटका मिलने के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड इक्वेशन पर “कुछ नहीं बदलेगा” और उनके मुताबिक टैरिफ भारत देगा, अमेरिका नहीं। ट्रंप ने यह भी कहा, “PM मोदी is a great man… We are not paying tariffs to them and they are. We did a little flip,” यानी उन्होंने इसे ट्रेड शर्तों को “री-बैलेंस” करने वाला कदम बताया।
रूसी तेल पर ट्रंप की टिप्पणी और भारत की लाइन
ट्रंप ने एक बार फिर यह दावा दोहराया कि भारत ने उनके अनुरोध पर रूस से तेल खरीद “काफी कम” कर दी, और इसे यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों से जोड़ा। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने खुलकर यह पुष्टि नहीं की है कि ऊर्जा स्रोतों में कोई बदलाव ट्रंप के अनुरोध पर किया गया, और नई दिल्ली लगातार यह कहती रही है कि ऊर्जा फैसले राष्ट्रीय हित और बाजार स्थितियों के आधार पर होते हैं।
क्या सारे टैरिफ अपने आप हट गए हैं? – एक अहम पॉइंट
यह फैसला IEEPA के तहत लगाए गए व्यापक ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ को अमान्य करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रंप के कार्यकाल में लगाए गए सभी टैरिफ अपने आप खत्म हो गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ट्रंप प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों का सहारा ले सकता है, जैसे Section 122, ताकि टैरिफ कार्रवाई जारी रखी जा सके। इसलिए भारत “अगला कदम” देखने की बात कर रहा है।
तालिका: इस फैसले के बाद क्या-क्या स्पष्ट है?
| सवाल | अभी क्या स्थिति है? |
|---|---|
| कोर्ट ने किस चीज़ पर रोक लगाई? | IEEPA के तहत व्यापक ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ को असंवैधानिक बताया |
| भारत ने क्या कहा? | “जजमेंट नोट किया, अगले कदम और इम्प्लीकेशंस स्टडी कर रहे हैं” |
| ट्रंप ने क्या कहा? | “Nothing changes… They’ll be paying tariffs” |
| आगे क्या हो सकता है? | ट्रंप अन्य कानून (जैसे Section 122) से टैरिफ रास्ता खोज सकते हैं |
भारत के लिए यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड, टैरिफ और मार्केट एक्सेस लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में US सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला—और उसके बाद ट्रंप प्रशासन का अगला कदम—भारतीय निर्यात, अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा और द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं पर असर डाल सकता है। इसी कारण भारत फिलहाल “स्टडी मोड” में रहकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहा है।
FAQs (5)
- भारत सरकार ने US सुप्रीम कोर्ट के ट्रंप टैरिफ फैसले पर क्या कहा?
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा कि उसने जजमेंट “नोट” किया है और ट्रंप प्रशासन के अगले कदमों सहित सभी विकासों को उनके प्रभावों के लिए “स्टडी” किया जा रहा है। - प्रल्हाद जोशी ने क्या बयान दिया?
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि केंद्र पहले US सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रिव्यू करेगा, फिर वाणिज्य मंत्रालय या MEA औपचारिक प्रतिक्रिया देगा। - US सुप्रीम कोर्ट ने किस आधार पर टैरिफ को रद्द किया?
कोर्ट ने कहा कि IEEPA (1977) के तहत व्यापक टैरिफ लगाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने अपनी सीमा से अधिक अधिकार का उपयोग किया, इसलिए यह असंवैधानिक है। - क्या इस फैसले से सभी ट्रंप-कालीन टैरिफ खत्म हो गए?
नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक फैसला IEEPA के तहत लगाए गए व्यापक ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ को अमान्य करता है, लेकिन सभी टैरिफ अपने आप खत्म नहीं होते। - आगे ट्रंप प्रशासन क्या कर सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अन्य कानूनी प्रावधानों जैसे Section 122 का इस्तेमाल कर टैरिफ कार्रवाई आगे बढ़ाने का संकेत दे चुके हैं।
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