जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में ऑपरेशन ‘त्राशी‑I’ के तहत जैश‑ए‑मोहम्मद के 3 आतंकी मारे गए। इनमें कुख्यात कमांडर सैफुल्लाह की पहचान हुई है। मुठभेड़ चटरोo के पासरकुट इलाके में हुई; घटनास्थल से 2 AK‑47 और गोला‑बारूद बरामद हुआ। आग लगने से शव झुलस गए।
जुलाई 2024 हमले का आरोपी कमांडर सैफुल्लाह मारा गया: किश्तवाड़ के पासरकुट में सुरक्षा बलों की कार्रवाई
किश्तवाड़ मुठभेड़: ऑपरेशन ‘त्राशी‑I’ में जैश कमांडर सैफुल्लाह समेत 3 आतंकी मारे गए
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन ‘त्राशी‑I’ के तहत जैश‑ए‑मोहम्मद (JeM) के तीन आतंकियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स के मुताबिक, यह संयुक्त ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और CRPF की टीमों ने मिलकर चलाया, जिसे “विश्वसनीय खुफिया इनपुट” के आधार पर शुरू किया गया था।
सुरक्षा बलों ने बताया कि मारे गए आतंकियों में से एक की पहचान कुख्यात कमांडर सैफुल्लाह के रूप में हुई है। मुठभेड़ स्थल से दो AK‑47 राइफलें और अन्य गोला‑बारूद बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जिस कच्चे (मड) घर में आतंकी छिपे थे, मुठभेड़ के दौरान उसमें आग लग गई, जिसके कारण आतंकियों के शव बुरी तरह झुलस गए और पहचान करना मुश्किल हो गया।
कहां और कब हुई मुठभेड़?
सेना के अनुसार, किश्तवाड़ के चटरोo इलाके में पासरकुट (Passerkut) क्षेत्र में सुबह करीब 10:30 बजे मुठभेड़ शुरू हुई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने चुनौतीपूर्ण इलाके में करीब 11 बजे दोबारा आतंकियों को घेरकर कार्रवाई तेज की। यह पूरा अभियान “त्राशी‑I” ऑपरेशन के तहत चल रहा था।
खुफिया इनपुट और संयुक्त ऑपरेशन कैसे चला?
व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस, IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) और अन्य स्रोतों से मिले इनपुट्स के आधार पर किश्तवाड़ क्षेत्र में एक “डिलिबरेट जॉइंट ऑपरेशन” लॉन्च किया गया था। सेना के मुताबिक, CIF (Counter-Intelligence Force) डेल्टा के जवानों ने पुलिस और CRPF के साथ मिलकर आतंकियों को ट्रैक किया और संपर्क स्थापित होने के बाद उन्हें न्यूट्रलाइज किया।
सैफुल्लाह कौन था और उस पर क्या आरोप हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, जैश कमांडर सैफुल्लाह पिछले लगभग पांच साल से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय था, जब वह कथित तौर पर घुसपैठ के जरिए यहां आया था। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि वह कई घातक हमलों का “मास्टरमाइंड” रहा है, जिनमें जुलाई 2024 का वह हमला भी शामिल बताया गया है जिसमें चार सैनिक मारे गए थे।
आग लगने से शव झुलसे: पहचान में दिक्कत क्यों?
अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि जिस मड हाउस में आतंकी छिपे थे, मुठभेड़ के दौरान वहां आग लग गई। नतीजतन, तीनों आतंकियों के शव बुरी तरह झुलस गए और पहचान करना मुश्किल हो गया। इसी वजह से फिलहाल सिर्फ एक आतंकी की पहचान सैफुल्लाह के तौर पर सामने आई है, जबकि बाकी की पहचान की प्रक्रिया आगे जांच से स्पष्ट होगी।
फैक्ट बॉक्स: किश्तवाड़ एनकाउंटर की प्रमुख बातें
| पॉइंट | जानकारी |
|---|---|
| जगह | पासरकुट (Passerkut), चटरोo इलाका, किश्तवाड़ (J&K) |
| ऑपरेशन | ऑपरेशन ‘त्राशी‑I’ |
| मारे गए आतंकी | 3 (JeM से जुड़े) |
| पहचान | एक की पहचान कमांडर सैफुल्लाह के रूप में |
| बरामदगी | 2 AK‑47 और अन्य गोला‑बारूद |
| विशेष बात | मड हाउस में आग लगने से शव झुलसे |
आगे क्या?
सुरक्षा बल आमतौर पर ऐसे ऑपरेशन के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन, कॉर्डन, और आसपास के रूट्स की अतिरिक्त निगरानी बढ़ाते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य आतंकी समूह बचकर न निकले। इसके साथ ही, बरामद हथियारों और मौके से मिले सबूतों के आधार पर नेटवर्क, सपोर्ट मॉड्यूल और घुसपैठ रूट्स की जांच तेज की जाती है।
FAQs (5)
- किश्तवाड़ मुठभेड़ में कितने आतंकी मारे गए?
ऑपरेशन ‘त्राशी‑I’ के तहत जैश‑ए‑मोहम्मद के 3 आतंकी मारे गए हैं। - मारे गए आतंकियों में सैफुल्लाह कौन था?
सैफुल्लाह को कुख्यात JeM कमांडर बताया गया है और रिपोर्ट के मुताबिक वह कई हमलों का मास्टरमाइंड रहा है, जिसमें जुलाई 2024 का हमला भी शामिल है। - यह ऑपरेशन किसने चलाया?
यह संयुक्त ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और CRPF ने मिलकर चलाया। - मौके से क्या बरामद हुआ?
मुठभेड़ स्थल से दो AK‑47 राइफलें और अन्य गोला‑बारूद बरामद किया गया। - शव झुलसने की बात क्यों कही जा रही है?
अधिकारियों के मुताबिक, जिस कच्चे घर में आतंकी छिपे थे, मुठभेड़ के दौरान उसमें आग लग गई, जिससे शव झुलस गए और पहचान करना मुश्किल हो गया।
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