Home देश सबरीमाला रिव्यू: CJI ने 9 जज बेंच तय की, क्या सबरीमाला पर नया फैसला आएगा?
देश

सबरीमाला रिव्यू: CJI ने 9 जज बेंच तय की, क्या सबरीमाला पर नया फैसला आएगा?

Share
Sabarimala women entry review
Share

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला रिव्यू केस के लिए 9 जज बेंच गठित किया, 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू। 14 मार्च तक लिखित सबमिशन दाखिल करने के आदेश। 2018 फैसले पर बहस।

सबरीमाला महिलाओं का प्रवेश: विपक्ष ने केरल सरकार को क्यों घेरा – अप्रैल में फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला रिव्यू की तारीख तय की: 7 अप्रैल से 9 जज बेंच में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विवादास्पद 2018 फैसले की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई की तारीख तय कर दी। CJI सूर्या कांत की बेंच ने कहा कि 9 जजों की संविधान पीठ 7 अप्रैल 2026 से सुनवाई शुरू करेगी। सभी पक्षों को 14 मार्च तक लिखित सबमिशन दाखिल करने का आदेश दिया। सुनवाई पहले यूपी बनाम जय बीर केस के बाद होगी। कोर्ट ने साफ कहा कि समयसीमा का सख्ती से पालन करें। यह केस 7 साल से लंबित था।

9 जज बेंच की सुनवाई का शेड्यूल: किसे कब मौका

कोर्ट ने विस्तृत शेड्यूल दिया। 7 से 9 अप्रैल तक रिव्यू के पक्ष में वकील अपनी दलीलें रखेंगे। 14 से 16 अप्रैल तक विरोध करने वाले पक्ष को सुनेंगे। 21 अप्रैल को रिजॉइंडर सबमिशन और 22 अप्रैल को एमिकस क्यूरी की अंतिम दलीलें। CJI ने कहा कि 9 जज बेंच का गठन अलग से नोटिफाई होगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र का पक्ष रिव्यू के समर्थन में बताया। कोर्ट ने सभी को समय पर तैयार रहने को कहा।

2018 का विवादास्पद फैसला: महिलाओं को सबरीमाला में प्रवेश की इजाजत

28 सितंबर 2018 को 5 जजों की बेंच ने 4:1 बहुमत से फैसला दिया कि सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंध असंवैधानिक है। CJI दीपक मिश्रा, जस्टिस नरीमन, खान्विलकर और चंद्रचूड़ ने कहा कि यह धारा 25 का उल्लंघन है। जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने असहमति जताई। केरल हिंदू प्लेसेज ऑफ वर्शिप रूल्स की रूल 3(बी) रद्द कर दी। अयप्पा भक्तों को अलग संप्रदाय नहीं माना। परंपरा को एसेंशियल रिलिजियस प्रैक्टिस नहीं कहा।

रिव्यू याचिकाएं क्यों दाखिल हुईं: मुख्य सवाल क्या हैं?

2018 फैसले के खिलाफ 19 रिव्यू याचिकाएं दाखिल हुईं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि कोर्ट ने धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप किया। क्या अयप्पा भक्त अलग डिनॉमिनेशन हैं? क्या उम्र प्रतिबंध एसेंशियल प्रैक्टिस है? धारा 25 और 26 का बैलेंस क्या? क्या रूल 3(बी) असंवैधानिक है? 2020 में 9 जज बेंच ने 7 सवाल तय किए। सुनवाई में ये सवाल तय होंगे। एमिकस क्यूरी भी दलील देंगे।

केरल में सियासी घमासान: LDF सरकार का स्टैंड क्या?

केरल में CPI(M) लेड LDF सरकार ने 2018 में महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया था। अब कांग्रेस ने पूछा कि क्या सरकार अपना एफिडेविट जारी रखेगी। CM पिनारायी विजयन सरकार ने कहा कि फैसला का सम्मान करेंगे। BJP ने कहा परंपरा बचेगी। सबरीमाला बोर्ड ने कहा कि सुरक्षा चिंता है। राजनीतिक बहस तेज हो गई। सुनवाई पर सभी नजरें टिकीं।

9 जज बेंच का गठन: कौन होंगे जज?

CJI सूर्या कांत 9 जज बेंच का गठन करेंगे। 2020 में पहली बेंच में CJI बोबड़े, जस्टिस बनुमथी आदि थे। अब नया गठन होगा। सुनवाई 22 अप्रैल तक चलेगी। सभी पक्ष तैयारियां तेज कर रहे। सॉलिसिटर जनरल ने रिव्यू का समर्थन किया। केंद्र का पक्ष धार्मिक स्वतंत्रता पर। एमिकस की भूमिका अहम।

सबरीमाला विवाद की पृष्ठभूमि: परंपरा बनाम अधिकार

सबरीमाला भगवान अयप्पा का प्रसिद्ध मंदिर है जहां सदियों से 10-50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जित था। त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड ने इसे परंपरा बताया। 1991 से रूल बना। 2006 में PIL आई। 2018 फैसले के बाद विरोध प्रदर्शन हुए। कई महिलाएं दर्शन को गईं लेकिन हिंसा हुई। केरल HC ने सुरक्षा दी। BJP ने विरोध किया।

रिव्यू का असर: अन्य धार्मिक स्थलों पर?

यह सुनवाई सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं। 7 सवाल अन्य धार्मिक स्थलों पर भी लागू हो सकते। जैसे दाऊदी बोहरा खतना, पर्सी मृत संहिता। क्या धार्मिक प्रथाएं एसेंशियल हैं? महिलाओं के अधिकार बनाम परंपरा। फैसला पूरे देश के धार्मिक मामलों को प्रभावित करेगा। हिंदू, मुस्लिम, पारसी परंपराओं पर बहस।

अब क्या होगा: सबमिशन और सुनवाई का इंतजार

सभी पक्ष 14 मार्च तक सबमिशन दाखिल करेंगे। अप्रैल में इंटेंस सुनवाई। फैसला आने में समय लगेगा। केरल सरकार का स्टैंड स्पष्ट होगा। भक्तों में उम्मीदें। विपक्ष सरकार पर दबाव डालेगा। कोर्ट ने समयसीमा सख्त रखी।

FAQs (Hindi)

  1. प्रश्न: सबरीमाला रिव्यू की सुनवाई कब से?
    उत्तर: 7 अप्रैल 2026 से 9 जज बेंच में, 14 मार्च तक सबमिशन दाखिल करने के आदेश।
  2. प्रश्न: 2018 फैसले का सार क्या था?
    उत्तर: 4:1 बहुमत से महिलाओं (10-50 साल) को प्रवेश की इजाजत, रूल 3(बी) असंवैधानिक।
  3. प्रश्न: सुनवाई का शेड्यूल क्या है?
    उत्तर: 7-9 अप्रैल रिव्यू पक्ष, 14-16 विरोधी, 21 रिजॉइंडर, 22 एमिकस अंतिम।
  4. प्रश्न: केरल सरकार का स्टैंड क्या?
    उत्तर: 2018 में महिलाओं के पक्ष में थी, अब कांग्रेस दबाव बना रही स्पष्टता के लिए।
  5. प्रश्न: 7 सवाल कौन–से हैं?
    उत्तर: धार्मिक प्रथा एसेंशियल है? धारा 25 vs 26? डिनॉमिनेशन स्टेटस? आदि।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

“जॉब छोड़कर गुजारा भत्ता से बचना” अब आम चाल? दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त संदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि कई पढ़े-लिखे पति स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेकर...