चुनाव आयोग के Special Intensive Revision (SIR) के बाद 9 राज्यों और 3 UTs में अंतिम वोटर लिस्ट जारी होते ही 1.70 करोड़ से ज्यादा नाम कम हो गए (7.93% गिरावट)। गुजरात में 13.4% यानी 68.12 लाख की सबसे बड़ी कटौती हुई। बिहार को जोड़ें तो कुल नेट डिलीशन 2.16 करोड़ हो जाती है।
चुनाव आयोग का SIR अपडेट: 21.45 करोड़ से घटकर 19.75 करोड़ वोटर, बिहार जोड़ें तो कटौती 2.16 करोड़
SIR से वोटर लिस्ट में बड़ी कटौती: 9 राज्यों और 3 UTs में 1.70 करोड़ नाम घटे, 7.93% गिरावट
चुनाव आयोग के Special Intensive Revision (SIR) के बाद 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में अंतिम चुनावी रोल (final electoral rolls) प्रकाशित होते ही वोटर बेस में 1.70 करोड़ से ज्यादा की नेट कटौती दर्ज हुई है। आधिकारिक डेटा के मुताबिक, इन क्षेत्रों में SIR शुरू होने से पहले कुल मतदाता 21.45 करोड़ से अधिक थे, जो इस सप्ताह अंतिम रोल जारी होने के बाद घटकर 19.75 करोड़ रह गए। इसका मतलब है कि इन 12 क्षेत्रों में कुल 7.93% की गिरावट आई है।
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR को लेकर कई राज्यों में राजनीतिक बहस और कानूनी चुनौतियां चल रही हैं। आयोग का तर्क है कि मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अपात्र नाम हटाकर सूची को “शुद्ध” बनाया जा रहा है, जबकि विपक्षी दलों की चिंता यह है कि कहीं वैध मतदाता गलती से बाहर न हो जाएं।
सबसे ज्यादा गिरावट किस राज्य में? गुजरात टॉप पर
बड़े राज्यों में गुजरात में सबसे बड़ी कटौती हुई है। गुजरात की वोटर लिस्ट 13.4% यानी 68.12 लाख नाम घटकर 5.08 करोड़ से 4.40 करोड़ पर आ गई। यह न सिर्फ प्रतिशत के हिसाब से सबसे बड़ा झटका है, बल्कि बड़े राज्यों में संख्या के लिहाज से भी सबसे ज्यादा डिलीशन है।
इसके बाद मध्य प्रदेश में 34.35 लाख नाम हटे और मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ हो गई, यानी 5.96% की गिरावट। राजस्थान में 31.36 लाख की कटौती हुई और वोटर बेस 5.46 करोड़ से 5.15 करोड़ हुआ, जो 5.74% गिरावट है।
छत्तीसगढ़ में अनुपात के हिसाब से बड़ा असर: 11.77% की कटौती
छत्तीसगढ़ में कुल 24.99 लाख नाम हटाए गए और राज्य का मतदाता आधार 2.12 करोड़ से घटकर 1.87 करोड़ रह गया। प्रतिशत के हिसाब से यह 11.77% की गिरावट है, जो बड़े राज्यों में काफी अधिक मानी जा रही है।
केरल में सबसे कम गिरावट दर्ज हुई है। केरल में 8.97 लाख नाम घटे और मतदाता संख्या 2.78 करोड़ से 2.69 करोड़ हुई, यानी 3.22% की गिरावट। गोवा में 10.76% की गिरावट के साथ 1.27 लाख नाम हटे।
UTs और छोटे क्षेत्रों का डेटा: अंडमान में 16.87% की सबसे बड़ी गिरावट
केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में सबसे अधिक अनुपातिक गिरावट दर्ज हुई—16.87%। यहां 52,364 नाम घटे और मतदाता संख्या 3.10 लाख से घटकर 2.58 लाख हो गई।
पुडुचेरी में 7.5% की गिरावट के साथ 77,367 नाम हटे। लक्षद्वीप में कटौती बहुत मामूली रही—सिर्फ 206 वोटर (0.36%)।
राज्यवार कटौती (मुख्य हाईलाइट्स): एक नजर में टेबल
तालिका: SIR के बाद वोटर बेस में बदलाव (चयनित क्षेत्र)
| राज्य/UT | पहले (करोड़/लाख) | बाद में (करोड़/लाख) | नेट कटौती | % गिरावट |
|---|---|---|---|---|
| गुजरात | 5.08 करोड़ | 4.40 करोड़ | 68.12 लाख | 13.4% |
| मध्य प्रदेश | 5.74 करोड़ | 5.39 करोड़ | 34.35 लाख | 5.96% |
| राजस्थान | 5.46 करोड़ | 5.15 करोड़ | 31.36 लाख | 5.74% |
| छत्तीसगढ़ | 2.12 करोड़ | 1.87 करोड़ | 24.99 लाख | 11.77% |
| केरल | 2.78 करोड़ | 2.69 करोड़ | 8.97 लाख | 3.22% |
| गोवा | (लेख में कुल वोटर) | (लेख में कुल वोटर) | 1.27 लाख | 10.76% |
| अंडमान-निकोबार | 3.10 लाख | 2.58 लाख | 52,364 | 16.87% |
| पुडुचेरी | (लेख में कुल वोटर) | (लेख में कुल वोटर) | 77,367 | 7.5% |
| लक्षद्वीप | (लेख में कुल वोटर) | (लेख में कुल वोटर) | 206 | 0.36% |
नोट: इस टेबल में कुछ स्थानों पर “पहले/बाद” का कुल वोटर बेस लेख में प्रतिशत/डिलीशन के रूप में दिया गया है; इसलिए जहां कुल संख्या स्पष्ट रूप से नहीं लिखी , वहां डिलीशन और प्रतिशत को प्राथमिकता दी गई है।
बिहार को जोड़ें तो कुल कटौती 2.16 करोड़ तक कैसे पहुँचती है?
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि बिहार को भी शामिल किया जाए—जहां विधानसभा चुनाव से पहले SIR कराया गया था—तो कुल नेट डिलीशन 2.16 करोड़ (7.37%) तक पहुंच जाती है। बिहार में जून 2024 की 7.89 करोड़ मतदाता संख्या सितंबर 2024 में घटकर 7.43 करोड़ हो गई थी।
इसका अर्थ यह है कि सिर्फ एक राज्य (बिहार) को जोड़ने से राष्ट्रीय स्तर पर SIR के प्रभाव का आकार और बड़ा दिखाई देता है। इसलिए आने वाले महीनों में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों की अंतिम सूची जारी होने के बाद यह बहस और तेज हो सकती है।
SIR आगे कहाँ-कहाँ चल रहा है और अगली बड़ी तारीखें क्या हैं?
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR फिलहाल 12 राज्यों/UTs में चल रहा है, जो करीब 60 करोड़ मतदाताओं को कवर करता है। बाकी 40 करोड़ मतदाता 17 राज्यों और 5 UTs में कवर किए जाएंगे।
रिपोर्ट में बताया गया है कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश की अंतिम वोटर लिस्ट अभी पूरी तरह जारी नहीं हुई है। तमिलनाडु की फाइनल लिस्ट सोमवार को आने की उम्मीद है, पश्चिम बंगाल की सूची चरणबद्ध तरीके से जारी होगी, और उत्तर प्रदेश का रोल 6 अप्रैल को प्रकाशित होना तय है।
असम का केस अलग क्यों रहा?
रिपोर्ट के मुताबिक, असम में आयोग ने SIR की जगह ‘Special Revision’ कराया, जो 10 फरवरी को पूरा हुआ। वजह यह बताई गई कि NRC (National Register of Citizens) प्रक्रिया से जुड़े कानूनी मुद्दों के कारण SIR नहीं किया गया। असम की अंतिम सूची में 2.49 करोड़ वोटर हैं, जबकि ड्राफ्ट रोल में 2.52 करोड़ बताए गए थे; 2024 लोकसभा चुनाव में असम के 2.45 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर थे।
SIR पर कानूनी-राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ रहा है?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि SIR शेड्यूल कई बार बदला गया। बिहार की तरह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। विवाद का बड़ा कारण यह है कि SIR के दौरान कुछ लोगों के नाम दस्तावेज़ न दे पाने या पुराने रोल से रिकॉर्ड मैच न होने पर हटाए गए—और विपक्ष इसे संभावित “एक्सक्लूज़न” के रूप में देख रहा है।
आम मतदाताओं के लिए व्यावहारिक बात यह है कि ड्राफ्ट/फाइनल रोल आते ही अपना नाम तुरंत चेक करना, और अगर नाम/पता/एज में गड़बड़ी दिखे तो समय रहते क्लेम-ऑब्जेक्शन प्रक्रिया पूरी करना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
FAQs (5)
- SIR के बाद कुल कितने वोटर घटे हैं?
9 राज्यों और 3 UTs में अंतिम रोल जारी होने के बाद कुल 1.70 करोड़ से ज्यादा वोटरों की नेट कटौती दर्ज हुई है, जो 7.93% गिरावट है। - सबसे ज्यादा गिरावट किस राज्य में हुई?
बड़े राज्यों में गुजरात में सबसे ज्यादा गिरावट हुई—13.4% यानी 68.12 लाख नाम कम हुए (5.08 करोड़ से 4.40 करोड़)। - मध्य प्रदेश और राजस्थान में कितने नाम हटे?
मध्य प्रदेश में 34.35 लाख नाम हटे (5.96% गिरावट) और राजस्थान में 31.36 लाख नाम हटे (5.74% गिरावट)। - केरल और अंडमान-निकोबार का आंकड़ा क्या है?
केरल में बड़े राज्यों में सबसे कम गिरावट 3.22% (8.97 लाख) रही, जबकि UTs में अंडमान-निकोबार में सबसे ज्यादा 16.87% (52,364) गिरावट दर्ज हुई। - बिहार को जोड़ने पर कुल कटौती कितनी हो जाती है?
बिहार को शामिल करने पर कुल नेट डिलीशन 2.16 करोड़ (7.37%) तक पहुंच जाती है; बिहार का वोटर बेस 7.89 करोड़ से 7.43 करोड़ हुआ था।
- Andaman Nicobar 16.87 percent decline
- Bihar SIR net deletions 2.16 crore
- Chhattisgarh 11.77 percent drop
- Election Commission SIR voter deletions
- final electoral rolls SIR 2026
- Gujarat highest drop 13.4 percent 68.12 lakh
- Kerala smallest drop 3.22 percent
- Madhya Pradesh 34.35 lakh deletions
- Rajasthan 31.36 lakh deletions
- SIR trims 1.70 crore voters nine states three UTs
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