ई-ब्लॉक परियोजना पर घिरी डीजीएमएस : विजय झा ने निगरानी पर उठाए सवाल, 5 लाख आबादी के विस्थापन की जताई आशंका
धनबाद: बियाडा के पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार झा ने बीसीसीएल की महत्वाकांक्षी ‘ई-ब्लॉक’ कोयला परियोजना और खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीसीसीएल और निजी आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा संचालित खनन कार्यों की डीजीएमएस समुचित निगरानी नहीं कर रहा है। इसी अनदेखी के कारण क्षेत्र में अवैध उत्खनन और जान-माल की क्षति जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
झा ने प्रस्तावित ई-ब्लॉक परियोजना को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि यदि स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई, तो करीब 13 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 5 लाख से अधिक लोग विस्थापन का दंश झेलने को मजबूर हो जाएंगे।
नगर निगम के 13 वार्ड होंगे प्रभावित, विस्थापन नीति पर स्थिति स्पष्ट करे प्रबंधन
विजय कुमार झा के अनुसार, धनबाद नगर निगम के वार्ड संख्या 1 से 13 तक के कई घने इलाके इस परियोजना के प्रत्यक्ष प्रभाव क्षेत्र में आ सकते हैं। उन्होंने बीसीसीएल और जिला प्रशासन से मांग की कि परियोजना शुरू करने से पहले प्रभावित होने वाली आबादी के पुनर्वास, मूलभूत नागरिक सुविधाओं और आवास को लेकर एक स्पष्ट और पारदर्शी रोडमैप सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने स्थानीय निवासियों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और परियोजना से संबंधित सभी आधिकारिक दस्तावेजों और जानकारियों की पूरी जांच-परख करें।
क्या है बीसीसीएल की ई-ब्लॉक परियोजना?
ई-ब्लॉक परियोजना के तहत कतरास, सिजुआ और कुसुंडा क्षेत्र की कई मौजूदा खदानों को एकीकृत (इंटीग्रेट) करके बड़े पैमाने पर कोयला उत्खनन की योजना है:
- शुरुआत और अवधि: परियोजना में वर्ष 2027 से खनन शुरू करने का प्रस्ताव है, जो दो चरणों में लगभग 27 वर्षों तक संचालित होगी।
- उत्पादन लक्ष्य: कुल 376 मिलियन टन कोयला निकालने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 150 लाख टन (15 मिलियन टन) होगी।
- भूमि की आवश्यकता: परियोजना के लिए कुल 1,930 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इसमें से करीब 1,361 हेक्टेयर भूमि पहले से बीसीसीएल के कब्जे में है, जबकि शेष भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जानी है।
- एकीकृत होने वाली प्रमुख खदानें:
- कतरास क्षेत्र: आकाशकिनारी और AKWMC
- सिजुआ क्षेत्र: मोदीडीह, तेतुलमारी, सेन्द्रा बांसजोड़ा और निचितपुर
- कुसुंडा क्षेत्र: ईस्ट बसुरिया, बसुरिया और खास कुसुंडा
डीसी रेल लाइन की सुरक्षा और रोजगार की संभावनाएं
परियोजना के खाके में धनबाद-चंद्रपुरा (डीसी) रेल लाइन के समीप खनन को लेकर विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। बीसीसीएल के अनुसार, खनन गतिविधियां इस तरह संचालित की जाएंगी जिससे रेलवे ढांचे को कोई नुकसान न पहुंचे। साथ ही कोयला परिवहन को सुगम बनाने के लिए अलग से साइडिंग विकसित की जाएगी।
परियोजना के माध्यम से प्रभावित रैयतों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने का दावा भी किया गया है। नियमानुसार माइनिंग सरदार, ओवरमैन, इलेक्ट्रिकल और सर्वे जैसे पदों पर भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
हालांकि, भूमि अधिग्रहण और विस्थापन की भयावहता को देखते हुए जनहित, पारदर्शी पुनर्वास नीति और स्थानीय अधिकारों की रक्षा ही इस परियोजना की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होगी।
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